मंगलवार, 20 नवंबर 2012

नाकामी का ठीकरा मेरे सिर फोड़ना चाहते हैं असफल कलाकार: नेगी

नाकामी का ठीकरा मेरे सिर फोड़ना चाहते हैं असफल कलाकार: नेगी
लोक गायकों में विवाद दुर्भाग्यपूर्ण: भरतवाण
राजेन्द्र जोशी
देहरादून । उत्तराखण्ड में आज कल लोक गायकों के बीच जंग छिड़ी हुई है। यह जंग उभरते हुए गायक गजेन्द्र राणा के हीरा समधिणी ऑडियो एलबम के बाजार में आने के बाद छिड़ गई है। इस मामले में अभी तक लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का कहना कि कुछ कलाकार अपनी नाकामी का ठीकरा मेरे सिर फोड़ना चाहते है, उनका साफ कहना था कि किसी भी प्रतिभा को कोई भी नहीं रोक सकता और प्रतिभा किसी के परिचय की मोहताज भी नहीं होती, उन्होंने कहा कि जब मैं 40 वर्ष पहले इस क्षेत्र में आया तो लोगों ने मुझे भी रोकना चाहा, लेकिन मैं विपरित परिस्थितियों में भी खड़ा हुआ हूं, उन्होंने नए गायकों को सीख देते हुए कहा कि वे ईमानदारी के साथ आगे बढ़ें उन्हें कोई रोक नहीं सकता। वहीं सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक और ट्वििटर पर भी लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के समर्थक गजेन्द्र राणा की इस करतूत से खासे नाराज हैं।
    गजेन्द्र राणा द्वारा हीरा समधिणी एलबम में गाए गए गाने नरूमा नारेणा को यह विवाद छिड़ा है, हालांकि इस गाने के पहले तीन मिनट के गीत को जागर शैली में नरेन्द्र सिंह नेगी के नौ छमि नारेणा की धुन पर गाया गया है, वहीं तीन मिनट के बाद छहः मिनट का यह गना है, एलबम के निर्देशक अरविंद नेगी और संगीत संजय कुमोला का है, छहः मिनट का यह विवादित गीत भी नरेन्द्र सिंह नेगी की एलबम सल्याणा श्याली के गीतों की धुन पर गाया गया है। लोक कला क्षेत्र में कार्य करने वाले अमित रावत का कहना है कि लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी की गीतों की धुनो को चुराकर और उन्हीं पर तंज कसते गानों को जनता के बीच लाना लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, उनका कहना है कि उभरते गायक को राज्य की संस्कृति और लोक गीतों से इस तरह का भद्दा मजाक नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि गजेन्द्र राणा को इस एलबम के लोकार्पण से पूर्व यह सोचना चाहिए था कि वह उत्तराखण्ड के उस महान कलाकार पर आक्षेप लगाने के बजाए उनसे कुछ सीख लेते, क्यांेकि लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का जीवन पहाड़ के दुख-दर्द और वहां की संस्कृति व समाज के सरोकारों के लिए समर्पित रहा है। वहीं गजेन्द्र राणा के क्षेत्र के संस्कृति कला प्रेमी दिनेश रतूड़ी का कहना है कि लोक गायक व लोक कवि नरेन्द्र सिंह नेगी को उत्तराखण्ड का भूपेन हजारिका कहा जाता है, क्यांेकि जिस तरह असम के लोक गायक स्व. भूपेन हजारिका ने असम की भाषा, संस्कृति और लोक गीतों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर पहुंचाकर उसको लोगों की जुबान पर लाने का प्रयास किया था, ठीक उसी तरह लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने भी गढ़वाल की हमारी प्राचीन संस्कृति व लोक गीतों को संगीत में पिरोकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहुंचाने का काम किया है।
    समूचे प्रकरण लोक गायक नरेन्द्र सिहं नेगी का कहना है कि आज जितने लोक गायक आगे आए हैं, वे उन्होंने उनके 20-25 साल बाद गाना शुरू किया, उन्होंने प्रतिभाओं को आगे बढ़ने से रोके जाने के सवाल पर कहा कि अनर्गल बयानबाजी करके सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की यह एक साजिश है, उन्होंने कहा कि कोई किसी को कैसे रोक सकता है, क्यांेकि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, हां राजनीति में तो आगे बढ़ने से कार्यकर्ता व नेताओं में टांग खिंचाई मानी जा सकती है, लेकिन लोक संगीत और लोककलाओं को आगे बढ़ाने वालों को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग उन पर आरोप लगा रहे है, वें अपनी नाकामी का ठीकरा मेरे सिर फोड़ना चाहते हैं।
    वहीं इस मामले में निर्देशक व गायक अनिल बिष्ट का कहना है कि कलाकारों को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए, हम अपनी आने वाले पीढ़ी को क्या संस्कृति और संस्कार देना चाहते हैं इस पर हमें ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस समूचे प्रकरण पर दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा, इससे जनता में अच्छा मैसेज नहीं गया, उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और लोकगायन को आगे बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहिए अन्यथा हमें आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी। वहीं गढ़वाली गीतकार व कवि गणेश खुगसाल ‘‘गणी‘‘ ने कहा कि इस कलाकारों को इस तरह प्रतिस्पर्धा से बचना चाहिए, उन्होंने कहा कि हमें स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, ताकि हम अपनी विलुप्त हो चुके संगीत और वाद्य यंत्रों के संरक्षण और संवर्धन में अपना समय लगाएं। इस प्रकरण पर जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने कहा कि लोक गायक नेरन्द्र सिंह नेगी उत्तराखण्ड की धरोहर हैं और उनके खिलाफ इस तरह के षडयंत्र को दुर्भाग्यपूर्ण ही कह जाएगा।
    वहीं सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक पर सोबन सिंह गुंसाई ने इसे भारी बात कहते हुए कहा कि राजनेताओं की तरह गजेन्द्र राणा ने नेगी जी के खिलाफ जो शब्दावली का प्रयोग किया है, वह शर्मनाक है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात तो यह है कि मीना राणा ने नेगी जी के बारे में नहीं सोचा, जिनकी बदोलत मीना राणा आज इस मुकाम तक पहुंची है। वहीं रविश पोखरियाल ने कहा कि हमारी राणा से कोई जातीय दुश्मनी नहीं जो हम उनके खिलाफ हैं, उन्होंने नरेन्द्र सिंह नेगी को पहाड़ की शान और पहाड़ की आवाज बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा भ्रष्ट लोगों और नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई है, गजेन्द्र राणा को उनके सम्मान के लिए गीत गाना चाहिए था, पर यहां तो उलटी गंगा बह रही है हम राणा का विरोध क्यों न करें।