बुधवार, 21 नवंबर 2012

पोंटी की पार्टी में कौन मौजूद था उत्तराखण्ड का आईएएस!



पोंटी की पार्टी में कौन मौजूद था उत्तराखण्ड का आईएएस!

भाजपा ने किया नामधारी का बचाव, कहा मुख्यमंत्री करें चर्चित अधिकारी को पदमुक्त
राजेन्द्र जोशी
देहरादून पोंटी चढ्ढा हत्याकाण्ड के समय मौजूद उत्तराखण्ड का कौन वरिष्ठ आईएएस उनके साथ था, यह पहेली उत्तराखण्ड के सचिवालय में बैठे आलाधिकारियों के माथे पर बल ला रही है। अधिकारियों में सुगबुगाहट है कि मुख्यमंत्री दरबार से जुडे़ दो चर्चित आईएएस अधिकारियों के अलावा और कोई नहीं हो सकता। इस पहेली को सुलझाने के लिए कई आईएएस तो आपस में सिर जोड़कर अटकलें लगाने पर जुटे पड़े हैं।
                राजनैतिक दलों और शराब माफिया पूंजीपतियों का गठजोड़ काफी पुराना रहा है, किशोर अवस्था में पहुंच चुके इस राज्य पर अब शराब माफियाओं और पूंजीपतियों के साथ गठजोड़ का आरोप भी लगना शुरू हो गया है। राजधानी देहरादून सहित हरिद्वार, काशीपुर, रूद्रपुर तथा हल्द्वानी तक में पोंटी चढ्ढा से संबंध रखने वाले लोगों की शुमारी हो रही है। सूत्रों का दावा है कि उत्तराखण्ड में पोंटी चढ्ढा उसके भाई हरदीप चढ्ढा सहित सुखदेव सिंह नामधारी के व्यवसाय में कई पूंजीपतियों सहित राजनैतिक दलों ब्यूरोक्रेट्स का पैसा लगा हुआ है। राज्य में सरकारें किसकी बनें और कौन मुख्यमंत्री बने सूत्रों का दावा है इसका निर्णय भी अब इस तरह के लोग करने लगे हैं। राज्य में शराब सिंडिकेट से मित्रता निभाने वाला राजनैतिक दल जब सत्ता में होता है, तो उनकी पौ बारह हो जाती है। वैसे यह बात भी यहां दीगर है कि इनके लिए किसी भी दल की सरकार हो वह कोई मायने नहीं रखती, ये किसी भी दल में अपनी पैठ बनाकर उस दल को अपनी उंगलियों पर नचाने का माद्दा रखते हैं। इसका उदाहरण सुखदेव सिंह नामधारी की अल्पसंख्यक आयोग में ताजपोशी का होना है। इतना ही नहीं राज्य सरकार में औद्योगिक विभाग, आबकारी विभाग में कौन अधिकारी तैनात हो, इसका खाका भी ये लोग ही तय करते हैं। सूत्रों का दावा है कि राजनेता-माफिया का यह गठजोड़ मलाईदार विभागों में अपने अधिकारी गुर्गों को फिट करता रहा है। राज्य में चाहे किसी की भी सरकार है, इससे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। सूत्रों का कहना है कि राज्य में खनन नीति, आबकारी नीति और भूमि कानून तक अब इनके इशारों पर बनाए गए हैं ताकि इस गठजोड़ को इसका पूरा-पूरा लाभ मिल सके।
                पोंटी चढ्ढा उसके भाई हरदीप चढ्ढा के साथ नामधारी प्रदेश के आईएएस का गठजोड़ कोई नया नहीं है, राज्य में अधिकतम शराब की दुकानें और खनन का कार्य इन्हीं के गिरोह के हाथों चलाया जा रहा है। ऐसे में एक आईएएस का वहां होना कोई हैरानी की बात नहीं है। सूत्रों का दावा है प्रदेश के कई आलाधिकारियों के संपर्क इस माफिया गुट से रहे हैं, जिससे इन्होंने काफी माल भी कमाया है। जहां तक पोंटी चढ्ढा की पार्टी में उत्तराखण्ड के आईएएस की मौजूदगी की बात उठ रही है, इसको मामले पर प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स को यह सब पता है कि उस दिन दिल्ली के पंच सितारा होटल में आयोजित पार्टी में राज्य का कौन आईएएस था, लेकिन पता होने के बावजूद भी सरकार जहां इस मामले में चुप्पी साधे हुए है, वहीं आईएएस लॉबी इस मामले को दबाने के प्रयास में है। सूत्रों का यह भी दावा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात दो चर्चित आईएएस अधिकारियों में से एक अधिकारी की वहां मौजूदगी रही है।
                वहीं इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र ने आज यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को उस आईएएस अधिकारी को तुरंत हटा देना चाहिए, उन्होंने साथ ही सुखदेव सिंह नामधारी का बचाव करते हुए कहा कि उसके खिलाफ जब कोई मामला नहीं है, तो कांग्रेस ने नामधारी को कैसे पदमुक्त कर दिया। उन्होंने कहा केवल नाम आने से जब सुखदेव सिंह नामधारी को हटाया जा सकता है, तो चर्चित आईएएस अधिकारी पर क्यों नहीं कार्यवाही की गई।