शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

हमारी है एक पहचान हैं हम उत्तराखण्डी: बहुगुणा

राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन तीन से पांच हजार हुई
गुमशुदा आंदोलनकारियों को मिला आंदोलनकारियों का सम्मान

हमारी है एक पहचान हैं हम उत्तराखण्डी: बहुगुणा
राजेन्द्र जोशी।
देहरादून, 9 नवम्बर। राज्य आंदोलन के दौरान गुमशुदा हुए आंदोलनकारियों को मृत मानते हुए आंदोलनकारियों की श्रेणी में रखने के साथ ही अन्य राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाली पेंशन राशि 3000 रूपसे से बढ़ाकर 5000 रूपये की जाएगी, वहीं राज्यवासियों को एकता की नसीहत देते हुए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि हम सबकी एक पहचान है और हम उत्तराखण्डी हैं, यह बात सबको समझनी चाहिए। वे आज यहां सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित विकास पुस्तिका उत्तराखण्ड उत्कृष्टता के पथ पर के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। राज्य के इतिहास में यह पहला अवसर था जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मुजफ्फरनगर काण्ड के दौरान राज्य आंदोलनकारियों की मदद करने वाले चार गांवों रामपुर, मेधपुर, सिसोना तथा बड़ोवाली के दो-दो लोगों को सम्मानित किया।
    इसे ऐतिहासिक क्षण ही कहा जाएगा कि राज्य बने बारह साल बाद आज किसी मुख्यमंत्री ने तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को राज्य बनाने के लिए उनको कृतज्ञता ज्ञापित की। राजनीति से उपर उठकर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने केंद्र में शासन करने वाली तत्कालीन भाजपा सरकार को राज्य बनाने के लिए जहां धन्यवाद किया, वहीं वे तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य बनाने के लिए धन्यवाद करना भी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मुजफ्फरनगर काण्ड के दौरान दो अक्टूबर को राज्य के आंदोलनकारियों की मदद करने वाले चारों गांवों को 10-10 लाख रूपये की सहायता देने की घोषणा पहले की थी, जो गांवों को मिल चुकी है, इस राशि से गांवों में मिलन केंद्र बनाए जा रहे हैं जो राज्य आंदोलनकारी शहीदों के नाम पर स्थापित होंगे।
    मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि राज्य के निर्माण के आज बारह वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और उत्तराखण्ड राज्य के साथ बने दो अन्य राज्यों से उत्तराखण्ड आज कहीं आगे विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यहां अन्य राज्यों की उपेक्षा जल, जंगल और जमीन की कोई कमी नहीं है और वहीं यहां का जनमानस प्रदूषित मानसिकता का भी नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा देश का यह एकमात्र ऐसा राज्य हैं, जहां सर्वधर्म समाभाव की भावना है। उन्होंने राज्यवासियों का आहवान किया कि वे क्षेत्रवाद और जातिवाद के चक्कर में न पड़ते हुए अपनी एक पहचान की हम उत्तराखण्डी हैं के लिए प्रयासरत रहें। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन गैरसैंण के नाम पर चला था और राज्य आंदोलन का केंद्र बिंदु गैरसैंण ही रहा था। गैरसैंण को लेकर अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के इतिहास में पहली बार गैरसैंण में कैबिनेट बैठक कर राज्य आंदोलन में शरीक रहे लोगों की भावनाओं को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा आगामी मकर संक्रांति को जहां गैरसैंण में विधानभवन के निर्माण की आधारशीला रखी जाएगी, वहीं विधायकों के आवास को भी गैरसैंण में बनाने की सरकार की योजना है। उन्होंने कहा राज्य आंदोलनकारियों को अभी तक मिल रही तीन हजार रूपये की पेंशन को बढ़ाकर पांच हजार रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जबकि राज्य आंदोलन के दौरान गुमशुदा आंदोलनकारियों को मृत मानते हुए उनके परिजनांे अन्य राज्य आंदोलनकारियों की भांति सुविधाएं दी जाएंगी।
    मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा राज्य आंदोलन के दौरान के इतिहास को लिपिबद्ध कर इसे दस्तावेज के रूप में संजोने की सरकार की योजना है। इसके लिए उत्कृष्ट लेख पर राज्य सरकार द्वारा पांच, तीन और दो लाख रूपये के की धनराशि पारितोषी के रूप में दी जाएगी। वहीं राज्य के उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए भी राज्य सरकार द्वारा तीन ईनाम की घोषणा की गई है, जिनकी धनराशि तीन, दो और एक लाख रूपये होगी। वहीं लोक संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले तीन व्यक्तियों को राज्य सरकार द्वारा तीन, दो और एक लाख रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं राज्य के परंपरागत वाद्य यंत्रों के इतिहास, उनकी पौराणिकता तथा उसके रख रखाव को लेकर राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार की घोषणा की गई है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने घोषणा की कि जिला मुख्यालय पौड़ी के पुराना कारागार परिसर को राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को समर्पित करते हुए राज्य अभिलेखागार एवं सग्रहालय के रूप में स्थापित करने की सरकार की योजना है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के इतिहास के सभी प्रशासनिक विधायी एवं संवैधानिक घटनाक्रमों को लिपिबद्ध कर विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा और राज्य के विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए जिला प्लान के अतिरिक्त विकास के लिए धन उपलब्ध कराया गया है और प्रदेश में पंपिग पेयजल योजनाओं में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। और पर्वतीय क्षेत्रों में पिछड़ते विकास कार्यों को आगे बढ़ाकर विकास अंतिम छोर तक पहुंचाया जाएगा, जिससे वहां पलायन के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ सकें। इस दौरान कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, दिनेश अग्रवाल, हरीश दुर्गापाल, विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी, शूरवीर सिंह सजवाण, हरीश धामी, ललित फर्सवाण, गणेश जोशी, राजकुमार, ब्रहमस्वरूप ब्रहमचारी, राज्य आंदोलनकारी परिषद की अध्यक्ष सुशीला बड़ोनी, सेवा दल के अध्यक्ष रामविलास रावत, कांग्रेस अधिवक्ता परिषद की अध्यक्ष पूनम उनियाल, सूर्यकांत धस्माना, सचिव सूचना एम.एच. खान, अपर सचिव दिलीप जावलकर, संयुक्त निदेशक राजेश कुमार, सहायक निदेशक योगेश मिश्रा, सहायक निदेशक कलम सिंह चौहान, जिलाधिकारी देहरादून वी.वी.आर. पुरूषोत्तम, एसएसपी देहरादून केवल खुराना सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सूचना विभाग के अपर निदेशक डॉ. अनिल चंदोला द्वारा किया गया।