शनिवार, 8 दिसंबर 2012

एमपी, एमएलए और ब्यूरोक्रेट्स से आम आदमी का उठ रहा विश्वास: राज्यपाल



एमपी, एमएलए और ब्यूरोक्रेट्स से आम आदमी का उठ रहा विश्वास: राज्यपाल
राजेन्द जोशी
देहरादून, 08 दिसम्बर । राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी वर्तमान राजनैतिक व्यवस्था व ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम से खुश नहीं है। उनका कहना है कि सांसदों, विधायकों तथा ब्यूरोक्रेट्स से आज आम आदमी का विश्वास उठता जा रहा है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का जो विकास होना चाहिए थावह नहीं हुआ।
    सक्रिय राजनीति के लगभग 60 बसंत देख चुके वयोवृद्ध राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी के मन की पीड़ा यूं ही बाहर नहीं आई राजनीति के सफर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुकामों को जहां हासिल किया है, वहीं कांग्रेस के पुराने नेता होते हुए भी वे तटस्थ राजनीति में अपवाद के रूप में जाने जाते रहे हैं। 1959 से कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद वे तमाम महत्वपूर्ण संगठनों के महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, स्वभाव से बेहद शांत और मृदुभाषी डा. अजीज कुरैशी वकालत के चलते 1972 में मध्य प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे, इस दौरान वे मध्य प्रदेश के सिंचाई और उर्जा मंत्री भी रहे। इतना ही नहीं वे भोपाल के अरविंद कला एवं न्याय विद्यालय में विभागाध्यक्ष भी रहे। 15 मई 2012 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने डा. कुरैशी को उत्तराखण्ड का राज्यपाल मनोनित किया। राजनैतिक जीवन में समाज के कमजोर वर्ग, ग्रामीण युवाओं, छात्रों, विकलांग आदि के जीवन स्तर के सुधार के लिए वे कार्य करते रहे। लोगों के आंखों के आंसू पोंछने और मानव सेवा का उद्देश्य लेकर वे राजनीतिक क्षेत्र में एक मील के पत्थर साबित हुए हैं। राज्य की भौगोलिक परिस्थिति और राज्यवासियों के जीवन यापन की कठोर व्यवस्था को देखते हुए वे कई बार विचलित हुए हैं, लेकिन उनका उद्देश्य राज्य के आम जन तक विकास की किरण का अहसास कराना रहा है। राज्य के सांसदों, विधायकों और अफसरशाही पर उनकी यह टिप्पणी राज्य के इन लोगों के लिए प्रेरणा का सबब बनेगी। वहीं उनकी पीड़ा कि इन 12 सालों में जो विकास इस राज्य का होना चाहिए था, वह नहीं हुआ इससे साफ लगता है कि उन्होंने यहां की समस्याओं को आत्मसात किया है।
    गाहे-बगाहे केंद्रीय मंत्री हरीश रावत सहित सांसद सतपाल महाराज भी राज्य की अफसरशाही पर नाखुशी जाहिर करते रहे हैं, अब राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी के ताजा बयान से यह साबित हो गया है कि राज्य के सांसद, विधायक और ब्यूरोक्रेट्स राज्यवासियों के विश्वास को अर्जित करने में असफल रहे हैं, राजनैतिक व्यक्तियों से लगातार वार्तालाप और विचार विमर्श करने के साथ ही राज्य की अफसरशाही से भी वे रूबरू होते रहे हैं। राज्यपाल के इस बयान से राज्य की सेवा से जुड़े लोगों को सतर्क होना चाहिए कि उन पर भी किसी की नजर है।