मंगलवार, 26 मार्च 2013

29 साल पहले मरे व्यक्ति से खरीदी आईपीएस सिद्धू ने जमीन

29 साल पहले मरे व्यक्ति से खरीदी आईपीएस सिद्धू ने जमीन
वन भूमि पर बढ़ रहे हैं बेतहाशा कब्जे, वन विभाग की चुप्पी पर सवालिया निशान!
राजेन्द्र जोशी

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सटे जंगलों में राजधानी में तैनात कई अधिकारी वन भूमि को कब्जाने पर लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण राजपुर क्षेत्र में एक आईपीएस अधिकारी द्वारा खरीदी गई उस विवादास्पद जमीन का है जिसका मालिक 1983 में स्वर्ग सिधार गया था और बीते महीने इस आईपीएस अधिकारी ने उससे जमीन का सौदा कर जमीन अपने नाम करा दी। ठीक इसी तरह राजधानी क्षेत्र के कई और स्थानों पर भी वन भूमि पर कब्जा करने की नियत से जंगलो का सफाया आज भी जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस के इस अधिकारी के मातहत पुलिस कर्मी अब वन अधिकारियों को धमकानें पर जुट गये हैं कि वे इस मामले में चुप्पी साध लें।  

पुलिस मुख्यालय में तैनात इस आईपीएस अधिकारी ने राजपुर क्षेत्र के वीरगिर वाली गांव के जगंल की जमीन पर बीते दिन 25 हरे साल के पेड़ कटवा डाले। इस जमीन पर यह अधिकारी फार्म हाऊस बनाना चाहता है ऐसा सूत्रों ने बताया है। इतना ही नहीं 7450 वर्ग मीटर इस जमीन पर लगभग तीन 100 से ज्यादा साल के हरे वृक्ष खड़े हैं। जिनमें से लगभग 25 पेड़ों को बीते दिन काट दिया गया है। एक जानकारी के अनुसार आईपीएस सिद्धू ने जिस जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवाई है उस जमीन पर 55 साल पुराना मकान दिखाया गया है जबकि मौके पर वहां मकान का एक खंडर ही मौजूद है। इतना ही नहीं आईपीएस अधिकारी द्वारा जमीन की रजिस्ट्री को लेकर भी तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों ने बताया है कि जिस नत्थूराम पुत्र मटकूमल्ल से आईपीएस ने जमीन खरीदी है उसकी मौत 1983 में हो चुकी है। 29 साल पहले मर चुके नत्थूराम से आईपीएस अधिकारी ने राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा नम्बर एक (क) पुराना नम्बर 1/1 खतौनी संख्या 6 की 1.490 हेक्टेयर जमीन खरीदी है। जिसके एवज में नत्थूराम को एक करोड़ 20 लाख रूपये दिये गये जिस पर 35 लाख की स्टांप डियूटी भी चुकायी गई जबकि इस जमीन का दाम सरकारी दरों के हिसाब से लगभग साढ़े छह करोड़ बताया गया है। एक जानकारी के अनुसार नत्थूराम के पोते शरदसूद ने वन विभाग के अधिकारियों के बताया कि उसके दादा के नाम से किसी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि बेच डाली है। जबकि उनका कहना है कि उसके दादा नत्थू राम के मृत्यु आज से 29 साल पहले हो चुकी है और यह जमीन हमारे परिजनों यशपाल,सत्यपाल, राजपाल, विजयपाल तथा मेरे दादा नत्थू राम के नाम दर्ज है, 
    राजधानी से लगे तमाम इलाको में वन भूमि पर कब्जे को लेकर कमोवेश यही स्थिति है। जोहड़ी गांव के जंगल से लगी वन भूमि में भी बीते दिन 20 पेड़ों को काट वन भूमि को हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। वहीं भगवंतपुर, पुरकुल, सहस्त्रधारा, नवादा, दुधली, सहसपुर, ऋषिकेश, विकासनगर आदि क्षेत्रांे में भी वन भूमि कब्जाने का मामला लगातार सुर्खियों में रहा है, लेकिन कभी पुलिस के बड़े अधिकारियों, कभी राजस्व के बड़े अधिकारियों और कभी आला प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं द्वारा वन भूमि पर कब्जे को लेकर मामले तो दर्ज हुए लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। परिणामस्वरूप वन भूमि पर कब्जे करने वालों के हौसले बुलंद हैं और वन विभाग की चुप्पी पर सवालिया निशान।