गुरुवार, 28 मार्च 2013

सिडकुल के बाद अब आईटी पार्क की ज़मीन बेचने की तैयारी में सरकार !! !

सिडकुल के बाद अब आईटी पार्क की ज़मीन बेचने की तैयारी!
राजेन्द्र जोशी
देहरादून, 23 मार्च। सिडकुल की रूद्रपुर और हरिद्वार की जमीनों को कौड़ियों के भाव बेचने के बाद अब राज्य सरकार देहरादून स्थित आईटी पार्क की वह जमीन बेचने जा रही है जिस पर कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का सपना देखा था।
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी जिन्हें भविष्यदृष्टा के रूप में जाना जाता है का सपना था कि रूद्रपुर,सितारगंज,भगवानपुर,हरि
द्वार, रोशनाबाद, सेलाकुई,कोटद्वार तथा काशीपुर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना कर राज्य के बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने में इन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका हो ताकि राज्य से पलायन को रोकने के साथ ही स्थानीय लोगों को उनके पास ही रोजगार उपलब्ध हो सके। तिवारी शासनकाल में इन औद्योगिक क्षेत्रों की ओर औद्योगिक घरानों ने रूख भी किया। लेकिन सरकार की थकाऊ कार्यप्रणाली से आजीज आ चुके कई उद्योग समूह यहां के अधिकारियों व नेताओं का गैर सहयोगी व्यवहार देखते हुए वापस चले गए। परिणामस्वरूप किसानों को उजाड़ कर औद्योगिक क्षेत्रों में सरकार द्वारा खरीदी गई सैकड़ों एकड़ भूमि बंजर हो गई। बहुगुणा सरकार के आने के बाद राज्य के कुछ नौकरशाहों और बड़े नेताओं की नजरे इन जमीनों पर जा टिकी और उन्होंने इन जमीनों पर कंक्रीट के बहुमंजिले भवनों का सपना देखना शुरू कर दिया और इन जमीनों को बेचने के लिए मुफीद भूूमाफियों की तलाश शुरू कर दी। इसी तलाशी के दौरान उन्हें वह बिल्डर मिल गया जो उनकी हर ख्वाहिश पूरी कर सकता था और राज्य सरकार ने उसे औने -पौने दामों पर बेच भी डाला।
ठीक इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने राजधानी के सहस्त्रधारा रोड़ पर आईटी पार्क की स्थापना कर राज्य के बेरोजगारों को रोजगाार का सपना देखा था। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों और बड़े नेताओं की गिद्ध दृष्टि इस जमीन पर भी पड़ गई है। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार के कुछ बडे़ अधिकारी इस जमीन को किसी बिल्डर को बेचने जा रहे हैं। जिसके लिए अखबारों में दिखावे के लिए विज्ञापन भी प्रकाशित किए जा चुके हैं। जिस भूमि को आईटी पार्क के लिए खरीदा गया था और जिस पर अंर्तराष्ट्रीय स्तर की आईटी कम्पनियों को अपने संस्थान खोलने से वह भूमि भी सिडकुल की भूमि की तरह बिकने को तैयार है ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि राज्य की बेशकीमती जमीनों को यदि इसी तरह खुर्द -बुर्द किया जाता रहा तो भविष्य में राज्य में सिडकुल और आईटी पार्क जैसे आस्थानों के लिए भूमि ही नहीं बचेगी।