बुधवार, 3 अप्रैल 2013

सरकार ने लगाई हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर

सरकार ने लगाई हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर
15 साल से रहने वाले स्थायी निवासी
राजेन्द्र जोशी
देहरादून, 2 अप्रैल। स्थाई निवास और जाति प्रमाण पत्र को जारी करने के लिए प्रदेश सरकार ने मंगलवार को अपनी स्थिति साफ करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को स्वीकार किया। राज्य गठन नौ नवम्बर 2000 से पहले रहने वाले (जो 15 वर्षों से उत्तराखण्ड में रह रहा है) को स्थायी निवासी माना जएगा तथा 1985 से पहले से रहने वालों को जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, जिसके लिए मंगलवार को सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
    पहले प्रदेश में स्थाई निवास और जाति प्रमाण पत्रों को जारी करने में 1950 की व्यवस्था थी। पूर्व भाजपा सरकार ने स्थाई व जाति प्रमाण पत्रों को जारी करने के लिए 1950 के भूमि से संबंधित दस्तावेजों को शामिल करना अनिवार्य किया हुआ था। जिसको लेकर राज्य में मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने आपत्ति जताई थी और आंदोलन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश भी की थी। अजय कुमार ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ नैनीताल उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिसमें सरकार के स्थाई और जाति प्रमाण पत्रों को निर्गत करने वाले आदेशों को अदालत में चुनौती दी गई थी। 17 अगस्त 2012 को नैनीताल हाईकोर्ट की एकल बैंच ने याचिकाकर्ता के तथ्यों से सहमति जताते हुए सरकार को आदेश किए थे कि वह नौ नवम्बर 2000 को कट ऑफ डेट मानते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग को जाति प्रमाण पत्र जारी करें और उन्हें स्थाई निवासी माना जाए। राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही कई राजनैतिक दलों ने भी अदालत के इस आदेश के बाद आपत्ति जताते हुए एक दिन का बंद किया था और कहा था कि इसका लाभ उन लोगों को मिलेगा जो राज्य निर्माण से पहले यहां आकर रहने लगे हैं इसके खिलाफ जमकर हंगामा व प्रदर्शन भी हुआ था।
मंगलवार को यहां मुख्य सचिव आलोक कुमार जैन ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि नौ नवम्बर 2000 को कट ऑफ डेट मानते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को जाति प्रमाण पत्र जारी करें और उन्हें स्थाई निवासी माना जाए तथा अन्य लोगों को जो 1985 से उत्तराखण्ड में रह रहे हैं को जाति प्रमाण पत्र जारी करें। उन्होंने कहा कि ऐेसे लेागों को भूमि से संबंधित या यहां रहने वाले प्रमाण पत्रों के आधार पर ही जाति प्रमाण पत्रों को जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई किरायेदार है और उसके पास किराये की रसदी है तो उसको भी दस्तावेजों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा जिनका यहां आवास है और वह रोजगार के लिए बाहर चला गया है को भी जाति और स्थाई निवास प्रमाण पत्रों को जाारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नैनीताल हाईकोर्ट की एकल बैंच का यह निर्णय है, जिसे सरकार ने माना है और इस मामले में दो और याचिकाएं रविन्द्र जुगरान व त्रिवेन्द्र सिंह पंवार की पर अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है यदि इस मामले में हाईकोर्ट अपना फैसला देती है तो उसे अंतिम माना जाएगा।