शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

परिवहन विभाग का कारनामा

परिवहन विभाग का कारनामा
लाखों रूपये के राजस्व का लगा रहे हैं प्रदेश को चूना
18 सीट की मिनी बस को बना डाला टैक्सी
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। उत्तराखंड के परिवहन विभाग के अधिकारी वाहन मालिकों से मिलकर प्रदेश को यात्री कर के रूप में मिलने वाले लाखों रूपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। यह घोटाला पिछले तीन साल से चल रहा है, जिस में सरकार को अब तक लगभग करोड़ों रूपये का चूना लगाया जा चुका है। मामले के सज्ञान में आने के बाद अधिकारी वाहन स्वामियों को नोटिस देने की बात तो करते है, लेकिन इस घोटाले के लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनका नाम लेने से बच रहे हैं। मामले में परिवहन मंत्री सुरेन्द्र राकेश का कहना है कि इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। एआरटीओ का कहना है कि तीन साल से चल रहा यह मामला अब पकड़ में आया है। लिहाजा वाहन स्वामियों से इसकी वसूली की जाएगी। लेकिन इस घोटाले के कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं इस पर एआरटीओ चुप्पी साध लेते हैं। 
    प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश तथा हल्द्वानी परिवहन कार्यालयों द्वारा टैम्पो ट्रेवलर वाहन, जिनका व्हील बेस 3700 मिलीमीटर होता है और इन वाहनों में यात्री क्षमता 18 लोगों की वाहन निर्माता कंपनी ने बनाई है। राज्य के परिवहन कार्यालयों द्वारा इन 18 सीटर वाहन को सात और 10 सीटों में पर्वतीय मार्गो में चलने के लिए स्वास्थता प्रमाण पत्र के साथ ही परमिट जारी किए गए हैं। एक जानकारी के अनुसार राज्य सरकार को ऐसे वाहनों से 800 रूपया प्रतियात्री प्रतिमाह प्रतिवाहन का नुकसान हो रहा है। ऐसे में बीते तीन सालों से राज्य को लाखों रूपया का चूना परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा राज्य को लगाया जा चुका है। एक जानकारी के अनुसार देहरादून और ऋषिकेश परिवहन कार्यालयों द्वारा लगभग 200 ऐसे वाहनों को परमिट जारी किए गए हैं जो सरकार को प्रतिदिन लाखों रूपये का चूना लगा रहे हैं। यह भी जानकारी मिली है इन वाहनों को मध्यम दर्जे के यात्री वाहनों की जगह टैक्सी और मैक्सी कैब में पास किया गया है। 
 मामले के सामने आने के बाद उप सम्भागीय परिवहन अधिकारी संदीप सैनी ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और इस प्रकरण पर वाहन स्वामियों को नोटिस जारी किये गये हैं लेकिन उन्होंने इस मामले में लिप्त अधिकारियों की जांच पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया कि सरकार को चूना लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते पाच मार्च को शासन द्वारा कई परिवहन अधिकारियों की प्रोन्नोती हुई है लेकिन मलाईदार पदो पर बैठे होने के कारण और ऊंची पहुंच के चलते ऐसे अधिकारियों को नई तैनाती नहीं दी गई है।