शनिवार, 4 मई 2013

नैतिकता के आधार पर सरकार को इस्तीफा देना चाहिए: एनडी तिवारी

नैतिकता के आधार पर सरकार को इस्तीफा देना चाहिए: एनडी तिवारी
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम इस ओर साफ इशारा कर रहे हैं कि कांग्रेसी दिग्गजों की कोई भी रणनीति पार्टी को जिताने में कामयाब नहीं हो पायी और सत्ता में रहते हुए भी कांग्रेस का सूपड़ा लोकसभा उपचुनाव की तरह निकाय चुनाव में भी साफ हो गया। कांग्रेस को सूबे की सभी छह नगर निगम मेयर की सीटें पर करारी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने जीत की बड़ी उम्मीदों के साथ राज्य में पांच नगर निगमों और कई नगर पंचायतों का गठन किया था, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में कहीं भी उसे सफलता नहीं मिली। इतना ही नहीं गैरसैंण को नगर पंचायत बनाने और यहंा विधानसभा भवन का निर्माण कराने की राजनीतिक चाल भी कांग्रेस की फेल हो गई।
अब कांग्रेसी नेताओं को गैरसैंण में मिली शिकस्त ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्या हुआ है, जिसकी वजह से जनता ने उन्हें इतनी
बुरी तरह हार का स्वाद चखाया। नगर निगम मेयर पदों पर ही कांग्रेस को करारी शिकस्त नहीं मिली है, बल्कि नगर पंचायतों में भी उसका प्रदर्शन अत्यंत खराब रहा है, मगर कुछ नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में मिली जीत ने जरूर कांग्रेस का दर्द थोड़ा सा कम किया है। कांग्रेस की यह हार इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वह सूबे में सत्ता में है अब इस हार को लेकर कांग्रेस में घमासान मचना तय है। हार का ठीकरा एक दूसरे के सर फोड़ने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है सांसद सतपाल महाराज ने इस मुद्दे पर संगठन और सरकार दोनों को आड़े हाथ लिया और कहा कि इस हार के पीछे सरकार का कामकाज और संगठन का जनता तक कांग्रेस की उपलब्धियों तक न पंहुचा पाना अहम कारण है, वहीं उन्होंने कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात भी अपने पत्र में उठाई है।
    यह हास्यास्पद बात है कि इस करारी हार के बावजूद भी कांग्रेस नेताओं ने अपनी खीझ मिटाने के लिए कांग्रेस भवन में न सिर्फ अतिशबाजी की बल्कि मिठाईयां भी बांटी। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने तो सभी मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए कांग्रेस की हार के बाद भी चुनावों के परिणामों को निराशाजनक न होने की बात तक कह डाली है। उनका कहना है कि यह चुनाव लोकसभा और विधानसभा की तरह गंभीरता से नहीं लिये जा सकते। वहीं मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि लोकसभा उपचुनाव मंे कांग्रेस को मिली हार को उन्होंने कितनी गंभीरता से लिया था। अब यह मानने को कांग्रेस का कोई भी नेता तैयार नहीं है कि जनता ने उन्हें नकार दिया है और इस हार का कारण प्रमुखता से सरकार के 14 महीनों के कार्यों से नाखुश होना है, वहीं पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी भी इसका एक कारण हो सकती है। चुनाव परिणाम के आने के बाद जो कांग्रेस नेता कल तक बड़े-बड़े दावे कर रहे थे और इन निकायों चुनावों को लोकसभा चुनाव का रिहर्सल बता रहे थे अब वहीं नेता इन चुनावों में अपनी हार को स्वीकारने से भी कन्नी काटने लगे हैं। इस हार पर कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता एनडी तिवारी ने तो सरकार से इस्तीफा देने तक की बात कह डाली है। इन चुनावों से यह साबित हो गया है कि कांग्रेस की निचले स्तर पर स्थिति कितनी ज्यादा खराब है। कांग्रेस नेता भले ही इन चुनाव परिणामों को लेकर किसी को भी जिम्मेदार ठहराये लेकिन यह वास्तव में कांग्रेस के
लिए अत्यंत गंभीर और चिंतनीय बात तो है साथ ही यह लोकसभा चुनाव के लिए भी खतरे की घंटी है।