सोमवार, 27 मई 2013

स्थाई राजधानी का मुद्दा एक बार फिर उछला

स्थाई राजधानी का मुद्दा एक बार फिर उछला
स्थाई राजधानी : सूबे में तीन विधानसभा भवन और दो सचिवालय किस लिए!
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। एक बार फिर सूबे की स्थाई राजधानी का मुद्दा ठीक लोकसभा चुनाव से पूर्व राजनैतिक दलों द्वारा जमकर उछाला जा रहा है। उत्तराखण्ड की कांग्रेस सरकार ने जहां बीते दिनों गैरसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास किया, वहीं अब रायपुर में भी नये विधानसभा भवन के निर्माण की कवायद ने स्थाई राजधानी के मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है। वहीं रायपुर में नए विधानसभा भवन के बारे में विपक्षी भाजपा का कहना है कि पहले सरकार राज्य की स्थायी राजध्रानी पर तो फैसला लें। राज्य में एक विधानसभा भवन और सचिवालय पहले ही बन चुका है। अब दून में ही दूसरा विधानसभा भवन तथा गैरसैंण में तीसरा विधानसभा तथा सचिवालय बनाने का क्या औचित्य। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस सरकार का यह कदम को जनता में भ्रम फैलाने वाला है।
पूर्ववर्ती सरकारों की तरह सूबे की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने राज्य की स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, तो वहीं दूसरी ओर वह नये विधानसभा भवनों के निर्माण की कवायद में भी जुटी हुई है। वहीं इस मुद्दे पर राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि 13 जनपदों वाले इस छोटे राज्य के लिए एक ही राजधानी काफी है, बस सरकार को यह निर्णय लेना होगा कि स्थाई राजधानी पहाड़ में होगी या मैदान में। राजनैतिक सूत्रों का कहना है कि यदि सूबे के नेताओं का विचार यह है कि राज्य की राजधानी हिमाचल और पंजाब की तर्ज पर दो हो तो सरकार को अपनी इस राय पर आम सहमति बनाने पर विचार करना चाहिए। इतना ही नहीं स्वंय अल्मोड़ा से कांग्रेस सांसद प्रदीप टम्टा ने भी इस मुद्दे पर कहा कि क्या हर एक जिले में सरकार एक विधानसभा भवन बनाना चाहती है, किसी न किसी नेता द्वारा हर रोज एक ही मुद्दे पर अलग-अलग बयान जारी कर दिये जाते है। राज्य की स्थायी राजधानी कहां बनेगी पहले कैबिनेट में इस बात का फैसला तो कर लो, । स्थायी राजधानी पर तो कोई फैसला आज तक हो नहीं सका है विधानसभा भवनों की लाइन लगायी जा रही है।
गैरसैंण और रायपुर में सरकार द्वारा राज्य की अस्थायी राजधानी की घोषणा से पूर्व विधानसभा भवन बनाने का विरोध भाजपा और यूकेड़ी दोनों ही दलों ने कराना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार पहले राज्य की स्थाई राजधानी घोषित कर, जिसके बाद विधानसभा भवन बनाये। वहीं अब माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में एक बार फिर राज्य की स्थायी राजधानी का मुद्दा अहम होगा।