बुधवार, 19 जून 2013

स्थिति स्पष्ट करे सरकार: उत्तराखण्ड डेमोक्रेटिक एलाइन्स

स्थिति स्पष्ट करे सरकार: उत्तराखण्ड डेमोक्रेटिक एलाइन्स
राजेन्द्र जोशी
देहरादून,15 जून । इधर उत्तराखण्ड की राजनीति भी पल-पल नई करवट ले रही है, उधर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने 17-18 जून को एक बार फिर नाराज विधायकों को सुनने का मन बनाया है, तो इधर सरकार को समर्थन दे रहे उत्तराखण्ड डेमोक्रेटिक एलाइन्स के नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि विधायकों की नाराजगी के चलते प्रदेश में अनिश्चितता का वातावरण बना हुआ है और विकास कार्य ठप्प हो गए हैं। एलाइन्स के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने स्थाई और मजबूत सरकार के लिए कांग्रेस को समर्थन दिया है, यदि कांग्रेस स्थिति स्पष्ट नहीं करती है तो उन्हें भी सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।
    गौरतलब हो कि बीते सप्ताह मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार से नाराज चल रहे पांचों विधायकों को सचिवालय में अपने कार्यालय पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन विधायक ने उनके प्रस्ताव को ठुकराकर प्रदेश के नियोजन मंत्री को अपनी समस्याओं को पुलिंदा थमा गए थे, जिसके बाद विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री को न मिलने को लेकर प्रदेश सरकार की काफी फजीहत भी हुई थी। इसके बाद अब एक बार फिर मिल रही जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने 17 व 18 जून को इन विधायकों की समस्याओं को सुनने का मन बनाया है, वहीं दिल्ली स्थित सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश की राजनीतिक स्थिति से असहज मुख्यमंत्री बीते तीन दिन से सोनिया दरबार में मिलने के लिए समय की मंाग कर रहे हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उन्हें सोनिया दरबार से कोई न्यौता नहीं मिल पाया था।
    यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार में शामिल उत्तराखण्ड डेमोक्रेटिक एलाइन्स के चार मंत्रियों सहित एक दर्जा धारी ने प्रदेश की वर्तमान राजनैतिक स्थिति पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है, इन नेताओं का कहना है कि उन्होंने स्थाई और स्वच्छ पारदर्शी सरकार के लिए विजय बहुगुणा को समर्थन दिया था, लेकिन जब कांग्रेस के विधायकों का ही उन पर भरोसा नहीं है, तो वे कैसे उन पर भरोसा कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश का राजनैतिक वातावरण अस्थिर है और राज्य के तमाम विकास कार्य ठप्प पड़े हुए हैं, लिहाजा सरकार को प्रदेश की जनता सहित सरकार को समर्थन दे रहे सहयोगी दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।