मंगलवार, 9 जुलाई 2013

नहीं हो पाया राज्य के 233 संवेदनशील गांवों का विस्थापन

नहीं हो पाया राज्य के  233 संवेदनशील गांवों का विस्थापन
राजेन्द्र जोशी
देहरादून,10 जून   । सरकार ने उत्तराखंड के 233 गांवों को प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील गांव के रूप में चिन्हित तो किया है, लेकिन अभी तक इन गांवों के विस्थापन की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पिथौरागढ़, चमोली और बागेश्वर जिलों में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों की संख्या सर्वाधिक है। अकेले पिथौरागढ़ जिले में 71 संवेदनशील गांव चिन्हित है। इन गांवों का अस्तित्व खतरे में है। बरसात के दिनों में इन गांवों के लोग डर-डर कर जीते हैं।
  चमोली जिले में प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से 49 संवेदशनील गांव, बागेश्वर जिले में 42 संवेदनशील गांव, पिथौरागढ़ जिले में 71 गांव, पौड़ी गढ़वाल में 19 संवेदनशील गांव, अल्मोड़ा जिले में 9 संवेदनशील गांव, नैनीताल जिले में 6 संवेदनशील गांव, टिहरी गढ़वाल जिले में 19 संवेदनशील गांव, उत्तरकाशी जिले में 5 संवेदनशील गांव, रुद्रप्रयाग जिले में 1 गांव, देहरादून जिले में 2 गांव, उधमसिंहनगर में 1 गांव और चंपावत जिले में 9 गांव प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांव हैं। पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी ब्लॉक के अंतर्गत मदकोट-भौराबाड़, बसंतकोट, सुरिंग-गनघरिया, तोमिक-झापुली, डोबरी-नारकी, साणा, कुलथम, जिमिया, नाचनी, सेनर, लाझेकला-गिरगांव-भंडारीगांव, साईपोलू-साईंभाट, बजेता-जिबलाधार-पांगरपानी-कोलि
या, रूडीमोला, मवानी-दवानी, वल्थी-रोपड़, गोल्फा, चंचना-दाफा, पापड़ी-पैकुती, सेरा-सरईधार-कैठीतेली, बरा-बांसबगड़, नई बस्ती-नाचनी, मवानी-दवानी-गढ़ानी, सिरमौला, साईधूरा, होकरा, गिनीगांव, पुरदम, रूई सपाटा, कापा, कोटा गांव को प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया गया है। बेरीनाग ब्लॉक अंतर्गत योग्यूड़ा-गर्जिला, घनकुराली, कूड़ी-लोहाथल, हलियाडोब-संगोड़ा, कराला महर, आमथल और धारचूला ब्लॉक के जिप्ती तोक गर्वा, स्याकूली, जुम्मा, सुवा, देवल, बगीचा, बिनकाना, माणाखेत, ग्वालगांव, तड़कोट, हाडडाणा, ताकुंल-मांगती, खेला-चैतुलकोट, रैतोली, खुमती-कटौजिया, गर्गुवा, खेतगांव, बेलकोट, छल्मा-छिलासौ, न्यू झिमारगांव, बरमतोम-स्यालधार-मल्लासैम, कनारतोक-टोयला, बुंगबुंग, घट्टाबगड़, जम्कू, घटखोला, लुमती, बलुवाकोट-पोखरी और डीडीहाट ब्लॉक के जौरासी, सिंगाली, कौली हुड़की, नई बस्ती डीडीहाट, कनालीछीना, देवलथल गांव दैवीय आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। चमोली जिले में दशोली विकासखंड के पिंलग-खोला, सैकोट-नगाड़ी, सैकोट-टैटुणा, रोपा-कोलधार, बछेर-गांधीनगर, पलेठी-भरसेंजी, नैथोली, सरतोली, लासी, लस्यारी-सिन्ना, कनोल, नारंगी, मंजू लगा बेमरु व तल्ला रोपा गांव दैवीय आपादा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। पोखरी विकासखंड में गुडम, बुंगा तोक व बंगथल, जोशीमठ ब्लॉक में हनुमान चट्टी तोक में घृत गांव, द्वीप तपोण, करछौ, पल्ला, जखोला, किमांणा, मोल्टा, भैंटा-पिलखी, पाखी-बजूड़ा-अलग्वाड़, ल्यारी थौणा, चाई, गणाई, टंगली मल्ली, टंगणी तल्ली, दाडिमी, डुग्री, भैंटा, पंया चोरमी, खरोड़ी, परसारी व बरोसी गांव संवेदनशील हैं। थराली ब्लॉक में भ्याड़ी, छपाली, त्यूला, नौण, नैना, कर्णप्रयाग ब्लॉक में मैखुरा, नौसारी, चमोली ब्लॉक में भरसंजी, बणद्वारा, नारंगी और गैरसैंण ब्लॉक का देवपुरी गांव संवेदनशील श्रेणी में है। बागेश्वर जिले में बागेश्वर ब्लॉक में देवलचौड़ा, पपोली, बहाली व मटियोली और कपकोट जिले में बघर-तोक डाना, सुमगढ़, कर्मी गांव, स्यालढूंगा, कन्यालीकोट, शामा, कफलानी, बडे़थ, रिखाड़ी, सुडिंग, सलिंग, सौंग, गासी, मुनार, दोबाड़, काफलीकमेड़ा, तोली, किलपारा, कुंवारी, वाछम, लीती, जैंती, स्यूणीदलाड़ी, गोगिना-मोभेरी तल्ला-लोथरे, कीमू-तलगाड़ा, गुण्ठी-कालापैर-कापड़ी, लामाघर, नैकोड़ी, पोथिंग तोक-छोया-भकाना, तोली-रोपाड़ी, बदियाकोट-तोक पटाख, झूनी का गोरा तोक, गासी कुई तोक, मिकिला खलपट्टा-कुलकुटी तोक, हरकोट-पासगांव तोक और कांडा विकासखंड में सेरी, बास्ती व द्वारी गांव को प्राकृतिक आपदाकी दृष्टि से संवेदनशील घोषित किए गए हैं। सरकार ने इन गांवों के सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की बात कही थी लेकिन अब तक विस्थापन नहीं हो पाया है। इन गांवों में सबसे अधिक खतरा बरसात के दिनों में बना रहता है। बरसात में भूस्खलन, भू-धंसाव, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं के डर से लोग ठीक ढंग से सो भी नहीं पाते।