मंगलवार, 23 जुलाई 2013

प्रधानमंत्री ने कैबिनेट समिति बनाकर मुख्यमंत्री के कतरे पर!

 प्रधानमंत्री ने कैबिनेट समिति बनाकर मुख्यमंत्री के कतरे पर!
राजेन्द्र जोशी
देहरादून, 11 जुलाई। आजादी के बाद से देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री की अक्षमताओं को लेकर केंद्र ने केंद्रीय कैबिनेट की एक समिति का गठन किया हो। उल्लेखनीय है कि देश के इतिहास में पहली बार किसी आपदा को लेकर केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों की एक समिति बनाई और उसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री को महज स्थाई आमंत्रित सदस्य के रूप में स्थान दिया है। गौरतलब हो कि बीते दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य के पुर्ननिर्माण और पुर्नवास कार्या को लेकर एक विशेष 14 सदस्यी समिति का गठन किया है। जिसके अध्यक्ष स्वंय प्रधानमंत्री होंगे, इस समिति में रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी, कृषि मंत्री शरद पंवार, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, सड़क परिवहन मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस, कानून मंत्री कपिल सिब्बल, आवास मंत्री गिरिजा व्यास, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और जल संसाधन मंत्री हरीश रावत को शामिल किया गया है, जबकि योजना अयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार उपाध्यक्ष एम शशिधर रेड्डी सहित उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को स्थाई   आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
    राज्य में आई आपदा के बाद से प्रदेश सरकार पर लगातार आपदा राहत कार्यों में हिलाहवाली सहित आपदा के दिन से चार दिन तक असहाय सा बने रहना केंद्र को नागवार गुजरा है। वहीं प्रदेश का दौरा कर वापस लौट चुके राहुल गांधी की रिपोर्ट को भी प्रदेश सरकार के खिलाफ बताया गया है। इतना ही नहीं तीर्थयात्रियों की संख्या को लेकर व मरने वालों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रदेश सरकार अभी भी कटघरे में है, जबकि आपदा और राहत कार्याें सहित खाद्यान्न की सप्लाई के मामले में भी सरकार फिसड्डी साबित हुई है। वहीं यह भी उल्लेखनीय है कि आपदा के 27 दिन बाद अभी तक प्रदेश के चार धाम यात्रा मार्ग पूरी तरह से नहीं खुल पाए हैं, यह भी सरकार की अक्षमता को प्रदर्शित करता है। वहीं मनमोहन और सोनिया के दौरे के बाद केंद्र सरकार ने प्रदेश में अपना प्रतिनिधि पूर्व गृह सचिव वी.के. दुग्गल को भी राहत एवं बचार्व कार्य की देखरेख के लिए लगाया था। उनकी रिपोर्ट भी प्रदेश की अफसरशाही व नेताओं के बीच सामंजस्य न होना और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की लापरवाही को लेकर केंद्र को गई है। इन सबको देखते हुए आखिकार केंद्र सरकार ने आपदा एवं राहत कार्याें के बाद राज्य के पुर्ननिर्माण और पुर्नवास के कार्याें को अपने हाथों में लेकर यह जता दिया है कि वह भी प्रदेश सरकार के कार्याें से खुश नहीं है। हालांकि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा केंद्रीय 14 सदस्यी विशेष कमेटी को राज्य के पुर्ननिर्माण में मददगार बता रहे हैं, लेकिन इस समिति के गठित हो जाने के बाद यह साफ है कि केंद्र ने मुख्यमंत्री के पर कतर दिए हैं। यह समिति राज्य में पुर्ननिर्माण और पुर्नवास कार्याें पर जहां नजर रखेगी वहीं उत्तराखण्ड में हुए व्यापक नुकसान और उसके पुर्ननिर्माण पर होने वाले खर्च पर निगरानी रखेगी। गौरतलब हो कि उत्तराखण्ड में हुए जलप्रलय के बाद प्रधानमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्याें के लिए एक हजार करोड़ के पैकेज के साथ ही ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 340 करोड़ रूपये का पैकेज और केंद्र के अन्य मंत्रालयों और सरकारी संस्थाओं ने उत्तराखण्ड पुर्ननिर्माण और पुर्नवास कार्याें के लिए और भी मदद देने की घोषणा की है।
    वहीं दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में आपदा के बचाव और राहत कार्याें के लिए आई धनराशि में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की आशंका थी, इसी आशंका पर प्रधानमंत्री ने मुहर लगाते हुए केंद्रीय मंत्रियों की निगरानी कमेटी बनाई है।