शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

आपदा पर्यटन का मजा ले रहे है उत्तराखंड के मंत्री



आपदा पर्यटन का मजा ले रहे है उत्तराखंड के मंत्री




देहरादून। उत्तराखण्ड की कांग्रेस सरकार को हवा में दावे करने में महारत हासिल हो चुकी है क्योंकि अगर सरकार चारधाम यात्रा को लेकर गंभीर होती तो प्रदेश में बनाया गया आपदा प्रबंधन मंत्रालय 11 दिन पूर्व पहाड़ में आई जल प्रलय के बाद एक्शन में आकर हजारों जिंदगियां बचा सकता था। लेकिन यह मंत्रालय तो सिर्फ कागजों में ही दिखाई पड़ा। जिस कारण देश के अलग-अलग राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं को मौत के आगोश में जाने को मजबूर होना पड़ गया। आपदा में बचाव कार्य करने के बजाए जिस तरह से उत्तराखण्ड सरकार ने दिल्ली में जाकर प्रदेश के लिए झोली फैलाते हुए मदद की गुहार की, वह हाईकमान नागवार गुजरी और प्रदेश सरकार के आपदा राहत में फेल होने के कारण बचाव व राहत की कमान अपने हाथों में लेते हुए दिल्ली से सामंजस्य के लिए दल उत्तराखण्ड में भेजना पड़ा। लेकिन हाईकमान की नसीहत को जहां सरकार हवा में उड़ा रही है। वहीं केन्द्रीय गृह मंत्री के आदेशों को ठेंगे पर रखकर नेता आए दिन मौज मस्ती के लिए बचाव व राहत के लिए किराए पर मंगाए हैलीकॉप्टरों से हवाई सैर सपाटा करके पीड़ितों के जख्मों से खेलने में लगे हुए है। वहीं सरकार, बदरीनाथ में फंसे लोगों का आंकड़ा मात्र दो हजार बताने का दावा कर रही है। लेकिन यह शंका उठ रही है कि वहां लगभग साढ़े नौ हजार यात्री व स्थानीय लोग फंसे हुए हैं। ऐसे मे सरकार एक बार फिर कटघरे में आकर खड़ी हो गई है?
उत्तराखण्ड में आई महाजल प्रलय में हजारों श्रद्धालुओं व पहाड़ के सैकडों लोगों की मौत के बाद प्रदेश के कई मंत्रियों व विधायकों ने बेशर्मी की सारी हदेें पार करते हुए जिस तरह से मौज-मस्ती हवाई यात्रा का आए दिन आनंद ले रहे हैं उससे देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं के परिजनों में उत्तराखण्ड सरकार के प्रति एक बड़ी नाराजगी देखने को मिल रही है। सरकार के कई मंत्रियों व विधायकों के खिलाफ जिस तरह से बरबाद हो चुके पहाड़ के लोग अपनी नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। उससे दिल्ली में बैठा हाईकमान भी काफी चिंतित और विचलित नजर आ रहा है। प्रदेश सरकार पीड़ितों के जख्मों के साथ कैसे खेल रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगातार सरकार दावा कर रही है कि बदरीनाथ में मात्रा दो हजार फंसे हैं। जबकि शंका यह उठ रही है कि वहां साढ़े छः हजार श्रद्धालु व तीन हजार स्थानीय लोग फंसे हुए हैं। सवाल उठ रहा है कि सरकार भ्रमित आंकड़े पेशकर श्रद्धालुओं के परिजनों के जख्मों पर कहीं न कहीं नमक छिड़क रही है। सरकार के मुखिया बस पहले दिन से ही यही दावा करते आ रहे हैं कि प्रदेश में बहुत बड़ी त्रासदी हुई है, बहुत बड़ी तबाही हुई है और सबको मिलकर प्रदेश के लिए आर्थिक मदद जुटानी चाहिए। हैरानी वाली बात यह है कि पूरे आपदा रेस्क्यू ऑपरेशन में सरकार पूरी तरह से फेल हुई और इस आपदा में बचे श्रद्धालुओं ने जिस तरह से उत्तराखण्ड सरकार को जमकर कोसा है। उससे दिल्ली में बैठे हाईकमान के माथे पर लगातार बल पड़ रहे है। हालांकि उन्होंने जो प्रदेश सरकार को आपदा प्रभावितों की मदद के लिए नसीहत दी थी उसकी उपेक्षा का दौर लगातार जारी है। सवाल यह भी तैर रहा है कि जब हाईकमान ने को-आर्डिनेशन के लिए प्रदेश में एक टीम को तैनात कर रखा है तो क्या उसे कुछ मंत्रियों व विधायकों द्वारा हवाई यात्रा की मौज मस्ती दिखाई नहीं पड़ रही ? सवाल यह तैर रहे हैं कि आखिरकार एक मंत्री, मीडिया मंे छाने के लिए जिस तरह से आए दिन पहाड़ों में हैलीकॉप्टर ले जाकर पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा है। वह दिल्ली में बैठे हाईकमान को क्यों नजर नहीं आ रहा हैै। हैरानी वाली बात यह है कि केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उत्तराखण्ड में आकर ऐलान किया था कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के अलावा किसी भी प्रांत के मुख्यमंत्री व अन्य वीआईपी को आपदा प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर नहीं उतारने दिया जाएगा। लेकिन केन्द्रीय गृह मंत्री के इस आदेश को उत्तराखण्ड के कई नेताओं ने ठेंगे पर रखते हुए, जिस तरह से आए दिन मौज मस्ती व मीडिया में छाने के लिए हवाई यात्रा से सैर सपाटा कर रहे है। उससे देश के कई प्रांतों से आए श्रद्धालुओं के परिजनों में इन नेताओं के प्रति काफी नाराजगी है। सवाल यह भी तैर रहे कि जिन हैलीकॉप्टरों पर यह नेता व मंत्री हवाई सैर सपाटा कर रहे है उसका भुगतान आखिरकार क्या नेता अपनी जेब से कर रहे या फिर आपदा राहत के लिए मंगाए गए हेलीकॉप्टरों से यह नेता सेवा का नाटक करने के लिए सरकारी पैसों को खुलकर दोनो हाथों से लूटा रहे हैं ?