मंगलवार, 9 जुलाई 2013

केदारनाथ में राहत और बचाव कार्य जारी

केदारनाथ में राहत और बचाव कार्य जारी
राजेन्द्र जोशी
देहरादून : शनिवार से लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने गढ़वाल में भी भयंकर तबाही मचाई है। इस तबाही के बाद अब सेना और आपदा प्रबंधन की टीम बुधवार सुबह से ही राहत कार्य में जुट गई है। मौसम साफ होने के चलते सेना को केदारनाथ में फंसे सभी लोगों को हेलीकाप्टर से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। बताया जा रहा है कि केदारनाथ को पूरा खाली करा दिया गया है। वहीं इस क्षेत्र में हजारों लोगों के मरने की संभावना व्यक्त की जा रही है। 
गौरतलब है कि मंगलवार से शुरू हुई इस मुहिम के तहत केदारनाथ से अब तक करीब डेढ़ हजार से अधिक लोगों को निकाल लिया गया है। रेस्क्यू के लिए सेना के हवाले किए गए केदारनाथ घाटी क्षेत्र में पहले केदारनाथ में फंसे लोगों को ही सुरक्षित निकालने की अभियान चलाया गया। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकाला जाना है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर बंद पड़े रास्तों को खोलने की कवायद भी शुरू हो गई है।
शासन के अनुसार पूरे प्रदेश में अब तक आपदा से मरने वालों का आंकड़ा 54 पर पहुंच गया है। हालांकि अभी केदारनाथ, रामबाड़ा आदि स्थानों में लापता लोगों की तलाश का काम शुरू नहीं किया गया। माना जा रहा है कि मरने वालों की संख्या हजारों तक हो सकती है। उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमुनोत्री मार्ग पर फंसे यात्रियों की मदद के लिए भी रेस्क्यू शुरू कर दिया गया है। साथ ही चमोली में भी जोशीमठ से लेकर बदरीनाथ तक व गोविंदघाट से लेकर घांघरिया तक फंसे करीब दस हजार लोगों को खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम शुरू हो चुका है। शासन का दावा है कि दोपहर तक चारधाम यात्रा मार्ग पर फंसे करीब 19 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
शनिवार से हुई बारिश ने गढ़वाल में रुद्रप्रयाग के केदारनाथ, रामबाड़ा, चमोली, टिहरी व उत्तरकाशी जनपद में भारी तबाही मचाई। इस तबाही का सही आंकलन जिला प्रशासन के पास भी नहीं था। रविवार की देर रात तक यही सूचना थी कि रुद्रप्रयाग-केदारनाथ मार्ग,चमोली में चमोली से लेकर बदरीनाथ तक,उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमुनोत्री मार्ग में सैकड़ों स्थानों पर सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। कई पुलिया व मकान टूटने से चार धाम के रास्तों में करीब तीस हजार यात्री फंसे हुए हैं। इस दिन केदारनाथ में मलबे में दबकर दो लोगों की मौत व एक व्यक्ति के बरसाती नाले में बहने की सूचना थी।
देहरादून में एक मकान के ढहने से एक ही परिवार के तीन लोग के मरने, हरिद्वार में गंगा के खतरे के निशान पर होने, हेमकुंड साहिब में ग्लेशियर टूटने, उत्तरकाशी में बाढ़ जैसे हालात व रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक मंदाकनी व बदरीनाथ से लेकर देवप्रयाग तक अलकनंदा के उफान पर होने की सूचना थी। कुमाऊं में पिथौरागढ़ में भी बारिश से सड़कें ध्वस्त हो गई थी। आपदा से रुद्रप्रयाग में 11, देहरादून में सात, टिहरी में नौ, उत्तरकाशी में दो व चमोली में एक और कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में पांच लोगों के मरने की सूचना सोमवार की देर रात तक थी। तब तक केदारनाथ में 11 शव निकाल लिए गए थे। रामबाड़ा में 50 से अधिक लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही थी।
गौरीकुंड से केदारनाथ के 14 किलोमीटर के पैदल मार्ग के बीच में पड़ने वाले रामबाड़ा का कोई निशान तक नहीं मिल पा रहा था, लेकिन वहां की पुख्ता जानकारी प्रशासन के पास थी नहीं थी।
रुद्रप्रयाग में मंदाकनी नदी के उफान से जिले के सोनप्रयाग, चंद्रापुरी, अगस्त्यमुनि का बड़ा भाग जलमग्न हो गया। यात्रा का अहम पड़ाव गौरीकुंड का निचला हिस्सा भी जलमग्न हो गया था। रविवार की रात ही प्रशासन ने प्रभावित स्थानों को खाली कराकर करीब बीस हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा दिया। रुद्रप्रयाग के एक दर्जन से ज्यादा झूला पुल और तीन मोटर पुल बहने से ज्यादातर इलाके अलग-थलग पड़ गए।
  केदारनाथ मंदिर के पुरोहित दिनेश बगवाड़ी ने बात की और बाढ़ के मंजर को बयान किया. बाढ़ में दिनेश के परिवार के पांच लोग लापता हैं. उनका 17 साल का बेटा अभी भी केदारनाथ में फंसा हुआ है. पढ़िये उन्होंने क्या बताया-
 रविवार की रात भारी बारिश हुई थी जिससे केदारनाथ में इमारतों को काफ़ी नुकसान हुआ था, हालांकि लोग सलामत थे. लेकिन सोमवार की सुबह केदारनाथ में प्रलय बनकर आई.
सुबह 6 बजे से ही केदारनाथ पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था. लोग भारी बारिश से हुए नुकसान का जायजा ले रहे थे.
 सुबह आठ बजे के करीब मैं मंदिर के प्रांगड़ में था और लोगों का हौसला बढ़ा रहा था. यहीं मेरी मुलाकात सर्किल ऑफिसर से हुई. वह बाढ़ में बहते-बहते बचे थे. बाढ़ के खतरे के बारे में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया था.
तबाही का मंजर
 आठ बजकर दस मिनट के करीब एक धमाके की आवाज आई. केदारनाथ से करीब तीन किलोमीटर ऊपर स्थित गांधी सरोवर फट गया और मलबा बहकर केदारनाथ आने लगा.
 सवा आठ बजे प्रलय सी आई. मलबे और पानी का प्रवाह इतना तेज था कि 15 मिनट में केदारनाथ तबाह हो गया. बड़े-बड़े पत्थर, रेत, कंक्रीट और पानी के प्रवाह ने केदारनाथ को बर्बाद कर दिया. चारों ओर हाहाकार मच गया. दो घंटे बाद तबाही का मंजर नजर आने लगा. उन्होने बताया कि केदारनाथ के चारों ओर लाशें ही लाशें पड़ीं थी. मेरे अपने परिवार के पांच लोग लापता हैं. छत्तीसगढ़ से आ कर होटल में रुके एक परिवार के 11 सदस्य भी लापता हो गए. एकमात्र बचे व्यक्ति को हमने ढांढस बंधाने की कोशिश की।
 उनका कहना है कि पीढ़ितों तक कोई मदद नहीं पहुंच रही थी. सरकार को इस तरह की बाढ़ का पहले से ही अंदेशा था. स्थानीय प्रशासन ने सुबह 6 बजे ही वरिष्ठ अधिकारियों को खतरे के बारे में अवगत करा दिया था. लेकिन केदारनाथ तक किसी भी प्रकार की मदद नहीं पुहंची. आईटीबीपी या कोई अन्य सैन्य दल हम तक नहीं पहुंचा।
बाढ़ और तबाही के बाद हम 36 घंटे केदारनाथ में फंसे रहे. यहां देशभर से आए लोग सहमे हुए थे. हमारे पास न खाने के लिए कुछ था और न ही पीने के लिए पानी. लोगों ने 36 घंटे बिना साफ़ पानी के बिताए।
उन्होने कहा कि मैंने हज़ारों की तादाद में लोगों को फंसे हुए देखा. ज्यादा तबाही पानी के साथ आए मलबे और पत्थरों से हुई. बह जाने से ज्यादा संभावना लोगों के मरने की है। उन्होने कहा कि फ़िलहाल जैसे-तैसे मैं सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया हूं. मेरे परिवार की हालत खराब है. पांच लोग अभी भी लापता हैं. आर्थिक नुकसान का हिसाब अभी हमने नहीं लगाया है. बस किसी भी तरह हम अपने बेटे को सुरक्षित वापस लाने की जुगत में लगे हैं.
 प्राप्त जानकारी केदारनाथ, रामबाड़ा और गौरीकुंड कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इसे चमत्कार ही कहा जाएगा कि केदारनाथ में सब कुछ तबाह हो गया है, लेकिन बारहवें ज्योतिर्लिंग में से एक और केदार नाथ मंदिर का सदियों पुराना गुंबद अभी भी सुरक्षित है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में पानी के साथ बहकर मलबा घुस गया है। लगातार बारिश और पानी के तेज बहाव से मंदिर के आसपास के ज्यादातर भवन जमींदोज हो गए हैं। सिर्फ केदारनाथ में 50 से ज्यादा लाशें मिलने की बात कही जा रही है। पानी निकलने के बाद मंदिर परिसर में कई शव बिखरे पड़े थे। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर गौरीकुंड से 7 किलोमीटर दूर रामबाड़ा का तो वजूद ही समाप्त हो गया है। शासन ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। 100-150 दुकानों वाले रामबाड़ा बाजार में आमतौर पर यात्रा के दौरान 500-600 लोग हमेशा मौजूद रहते थे। यहां कितने लोग हताहत हुए हैं, इसका पता अभी तक नहीं चल पाया।
  तबाही के करीब 36 घंटे बाद मंगलवार सुबह मौसम साफ होने पर बचाव और राहत कार्य शुरू हुआ। केदारनाथ घाटी में दो दिन से फंसे करीब 400 लोगों को हेलिकाप्टरों के जरिए गुप्तकाशी पहुंचाया गया, जबकि घांघरिया के आसपास फंसे करीब 3000 यात्रियों को गोविंदघाट पहुंचाया। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों के लिए दस हजार फूड पैकेट्स, ग्लूकोज, पानी, कंबल, टैंट आदि भेजे गए हैं, जिन्हें हेलिकॉप्टरों से गिराया जा रहा है।