मंगलवार, 23 जुलाई 2013

जनता त्रस्त, मंत्री हवाई दौरों में मस्त

जनता त्रस्त, मंत्री हवाई दौरों में मस्त

राजेन्द्र जोशी
देहरादून  । जहां एक ओर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में महिलाएं प्रसव पीड़ा से तड़प रही हैं, लोगों के पास खाने के लिए अन्न नहीं है, आने-जाने के लिए मार्ग इतने क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि इनमें पैदल चलना भी जान को जोखिम में डालना है, ऐसे में प्रदेश सरकार के मंत्री अपनी छवि चमकाने के लिए हैलीप्टरों का सहारा लेकर आपदा ग्रस्त क्षेत्रों के लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। आपदा का आज एक माह पूरा हो गया, आज तक पहाड़ के दुर्गम इलाकों में न तो खाद्यान्न ही पहुंच पाया है और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं। देहरादून सचिवालय के वातानुकूलित कमरों में बैठकर मुख्यमंत्री और मंत्री आपदा राहत के नाम पर भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन पहाड़ों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। आपदा के बाद अपनी जान बचा चुके स्कूली बच्चे अपने स्कूलों को ढूंढ रहे हैं, तो अध्यापक छात्रों को। ऐसी स्थिति में पहाड़ों पर पढ़ाई भी भगवान भरोसे ही है।
उल्लेखनीय है कि भले ही आज तक उत्तराखण्ड सरकार राज्य में आए महा जलप्रलय में बचाव व राहत का कार्य पूरा न कर पाई हो, लेकिन सरकार के मंत्री हवाई दौरों का रिकार्ड बनाने में जुटे हैं, ऐसे ही एक मंत्री ने गुप्तकाशी में नियम विरूद्ध एक दिन पूर्व केदारधाम में जबरन अपना हैलीकॉप्टर उतरवाया और बुधवार को दिल्ली से आई एक मीडिया कर्मी को गुप्तकाशी से हैलीकॉप्टर के द्वारा देहरादून तक पहंुचवाया। वहीं तीन दिन से गुप्तकाशी हैलीपैड़ पर मौजूद रामबाड़ा के दर्जनों वाशिंदे गौरीकुंड जाने की आस लगाये बैठें हैं, लेकिन उन्हें हैलीकॉप्टर नसीब नहीं हो पा रहा है। जिस कारण उनके परिवारों की गर्भवती महिलाओं के सामने भी जीवन-मरण का संकट आ खड़ा हुआ है। इतना ही नहीं गुप्तकाशी के लोगों के मन में इस बात को लेकर भी काफी नाराजगी है कि जब वह प्रशासन से खाद्य सामग्री मांगने के लिए जाते हैं तो उनसे पहले पूछा जाता है कि उनके घर का कौन सा सदस्य इस आपदा मंे मरा है। प्रदेश में दैवीय आपदा क्या आई, सरकार के कुछ नेताओं को तो मानो हवाई सैर सपाटा करने का चस्का लग गया। पहाड़ों   में आज भी हजारों वाशिंदे खाने के एक-एक दाने के लिए तरस रहे हैं। जहां हवाई मार्ग से खाद्य सामग्री पहंुचाने के लिए भले ही सरकार आगे न आ रही हो लेकिन गुप्तकाशी में इन दिनों प्रदेश के एक मंत्री जमकर हवाई सैर सपाटा करने में लगे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए हेलीकाप्टर की व्यवस्था की गई है, लेकिन गुप्तकाशी में एक हेलीकॉप्टर में सरकारी मशीनरी के बजाए एक मंत्री हवाई सैर करने में लगे हुए हैं। उन्हें इन दिनों मीडिया में छाने का चस्का सा लग गया है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार की शाम मंत्री जी ने नियम विरूद्ध तरीके से हैलीकॉप्टर केदारधाम में उतरवाया और उसके अगले दिन उसे गुप्तकाशी ले जाया गया। गुप्तकाशी में सड़क मार्ग जहां खराब हालत में हैं वहीं आज तक सरकार इस इलाके में बिजली तक बहाल नहीं करा पाई है। गुप्तकाशी के आसपास के गांवों में खाद्यान्न व दवाईयों का एक बड़ा संकट आकर खड़ा हो रखा है। बताया जा रहा है कि रामबाड़ा गांव के 10-12 ग्रामीण पिछले तीन दिन से गुप्तकाशी हैलीपैड पर गौरीकुंड जाने के लिए राह देख रहे हैं लेकिन इन्हें बहाना बनाकर हैलीकॉप्टर से गौरीकुंड तक नहीं ले जाया जा रहा है। गुप्तकाशी का हाल देखकर साफ तौर पर झलक रहा है कि वहां प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है और सब कुछ भगवान भरोंसे चल रहा है। गुप्तकाशी के लोगों मंे इस बात को लेकर भी काफी नाराजगी है कि जब वह खाद्यान्न लेने के लिए प्रशासन के पास जाते हैं तो उनसे पूछा जाता है कि उनके घर का कौन व्यक्ति मरा है उसके बाद ही उसे राशन दिया जाएंगा। सरकार सचिवालय में बैठकर दावे कर रही है कि पहाड़ों में खाद्यान्न सामग्री पहंुचाई जा रही है और प्रशासनिक अमला सही ढं़ग से काम कर रहा है। सरकार ने ग्राम प्रधानों से जानकारी लेने की पहल की है लेकिन जिस तरह से बर्बाद हो चुके पहाड़ के हजारों बाशिंदे खाने-पीने के सामान के लिए तरस रहे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि सरकार सिर्फ मुआवजा राशि देकर अपना पिंड़ इस आपदा से छुड़ाने में लगी हुई है। सवाल उठ रहे हैं आखिरकार सरकार में ढे़ड साल पूर्व दावा किया था कि अधिकारी पहाड़ के दूरदराज के गांवों में डेरा डालेंगे लेकिन प्रदेश में जब आपदा आई तो सरकार ने तमाम अधिकारियों को आखिरकार क्यों पहाड़ों में डेरा डालने का हुक्म नहीं दिया, यह भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ें कर रहा हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द खण्डूरी इन दिनों आपदा ग्रस्त इलाकों के दौरे पर है। बीते रोज उन्होंने गुप्तकाशी व उसके आसपास के इलाकों का दौरा करने के बाद वहां सरकार द्वारा पहंुचाई जा रही आपदा राहत सामग्री की हकीकत अपनी आंखों से देखी तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस आपदा में उजडें ग्रामीणों को खराब गेंहू व चावल दिया जा रहा है तथा अधिकांश गांवों में आज तक सरकार राहत तक नहीं पहंुचा पाई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखण्ड को बनाने के लिए सरकार कितनी गभीर हो रखी है।