मंगलवार, 9 जुलाई 2013

खुफिया रिपोर्ट नहीं है सरकार के पक्ष में!

खुफिया रिपोर्ट नहीं है सरकार के पक्ष में!
यशपाल आर्य और बहुगुणा नहीं कर पाए कोई करिश्मा
सरकार और प्रदेश संगठन में नेतृत्व परिवर्तन तयरू सूत्र
राजेन्द्र जोशी
देहरादून । कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी संसदीय चुनावों को लेकर कांग्रेस की सेहत सुधारने में गले हैं तो वहीं उत्तराखंड राज्य के बारे में उनको मिली खुफिया रिपोर्ट ने आलाकमान की परेशानी बढ़ा दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस रिपोर्ट में सूबाई सरकार के खिलाफ अंदर और बाहर उफनता जनाक्रोश स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव के साथ ही संसदीय चुनाव में उत्तराखंड से कांग्रेस का सफाया कर सकता है। वहीं अब हाईकमान के सामने यह चुनौति है कि अगर हाईकमान इस बढ़ते आक्रोश को समय रहते नहीं रोकती तो प्रमुख प्रतिद्वंदी भाजपा को संसदीय चुनाव से ष्वाक ओवरष् मिलने की पूरी संभावना है।
प्रदेश के बदलते राजनीतिक परिवेश ने सूबे के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की कांग्रेस सरकार के साथ ही प्रदेश कांग्रेस पार्टी की भी खूब किरकिरी कर दी हैए ऐसे में प्रदेश में होने वाले निकाय और निगम चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस की राह आसान नजर नहीं आ रही है। प्रदेश में पार्टी के बिगड़ते हालातों को देखकर जहां कांग्रेसी सांसद एक बार फिर से चुनाव मैदान में उतरने से कतराते दिख रहे हैं तो वहीं टिहरी लोकसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री अपने पुत्र साकेत को भी जीत नहीं दिला पाएए वहीं साकेत की यह शिकस्त भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस सरकार और पार्टी की साख कार्यकर्ताओं की नाराजगी से लड़खड़ाती जा रही है तो वहीं कांग्रेस का कम होता जनाधार की एक चिंता का विषय बन चुका है। वहीं हाईकमान इस स्थिति को साधने के लिए सरकार और पार्टी संगठन की गतिविधियों की युद्धस्तर पर मानीटरिंग कर रही है। प्रदेश में सरकार और संगठन के बीत मनमुटाव के कारण प्रदेश कांग्रेस सियासी तूफानों में घिर चुकी है। ऐसे में संसदीय चुनाव जीतना पार्टी के एक पहाड़ सा साबित हो रहा है। इसमें खास यह रहा कि इस मुसिबत के लिए प्रदेश के मुखिया के साथ ही चारों कांग्रेसी सांसद भी जिम्मेदार रहे है क्योंकि आलाकमान द्वारा सूबाई मुखिया की कुर्सी हरीश रावत को न देकर विजय बहुगुणा को सौंपे जाने से रावत और बहुगुणा की सियासी प्रतिद्वंद्विता अपरोक्ष रूप से सतह पर है। वहीं दूसरी ओर सतपाल महाराज की पत्नी व पर्यटन मंत्री अमृता रावत को महत्वपूर्ण विभाग न मिलने की बात खुद संासद सतपाल महाराज को खटक रही है। साथ ही गुटबाजियों के चलते सांसद प्रदीप टम्टा भी सरकार से नाराज हैं है। ऐसे मंे जबकि दिग्गजियों की गुटबाजियां सतह पर हो तो पार्टी का जनाधार घटना और साख का लड़खड़ना लाजमी। वहीं अब प्रदेश के बिगड़ते समीकरणों को देखते हुए पार्टी आलाकमान सूबे की राजनीतिक हाला की मानीटरिंग के बाद  सरकार और प्रदेश संगठन में कोई बड़ा फेरबदल कर सकती हैए इमसें कोई संदेह नहीं है। वहीं हाईकमान को विजय बहुगुणा और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य की जुगलबंदी नहीं भा रही है। क्योंकि दोनों दिग्गजी पार्टी की स्थिति को मजबूत करने की दिशा मंे कोई करिश्मा नहीं दिखा पाये है। पार्टी सूत्रों का कहना है सूबे में सरकार और प्रदेश संगठन में नेतृत्व परिवर्तन तो तय है। संगठन के नेतृत्व परिवर्तन के लिए हाईकमान ने पार्टी के दिग्गजों की सूची भी तैयार कर ली हैए हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी के मामले में सतपाल महाराज को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। सूत्रांे का कहना है कि हाईकमान सरकार के नेतृत्व परिवर्तन पर भी मंथन कर रही है और अगर हालात नहीं बदले तो हाईकमान सूबे में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार का नेतृत्व केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत को ऐन संसदीय चुनाव से पहले सौंप सकती है।