मंगलवार, 9 जुलाई 2013

दावों के उलट चार धाम यात्रा की तैयारियां.... इस बार भी हिचकोले खाते हुए होगी यात्रा

दावों के उलट चार धाम यात्रा की तैयारियां
इस बार भी हिचकोले खाते हुए होगी यात्रा
राजेन्द्र जोशी
देहरादून,3 अप्रैल  । विश्व विख्यात चार धाम यात्रा के शुरू होने में केवल एक माह ही शेष रह गया है, विश्व प्रसिद्ध इस चार धाम यात्रा में प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार की चार धाम यात्रा को लेकर तैयारियां अभी तक अधूरी ही हैं, वहीं सरकार यात्रा की तैयारियों का कछुवा चाल में अंजाम देने में लगी हुई है, सरकार की इन तैयारियों ने यह साफ कर दिया है कि चार धाम यात्रा का शुभारंभ इस वर्ष भी आधी-अधूरी तैयारियों व इंतजामों के साथ होने वाला है। जिससे यात्रियों को सुविधा मिलने के बजाए उन्हें परेशानी से दो चार होना पड़ेगा।
विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा के लिए राज्य में जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं तो वहीं देश व विदेश के वीआईपी से लेकर वीवीआईपी तक भी यहां दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार की तैयारियां आज भी यात्रा को लेकर कछुवा गति से चल रही है, जिसका खामियाजा यात्रियों और स्वंय सरकार को भी यात्रा के दौरान भुगतना होगा। यात्रा मार्गों की स्थिति लंबे समय से खराब है, यात्रा मार्गों की स्थिति इतनी दयनीय है कि यात्रियों को हिचकोले खाते हुए यात्रा करने को मजबूर होना होगा। यात्रा मार्ग पर चलते समय यात्रियों में मन में भगवान के लिए श्रद्धा कम अपनी जान के लिए मन में भय ज्यादा बना रहता है। वहीं सरकार चार धाम यात्रा को लेकर बड़े-बड़े दावे कर अपनी पीठ भले ही थपथपा रही हो, लेकिन धरातल पर सरकार के दावों के विपरीत स्थिति कुछ और ही दिखाई देती है। चारधाम यात्रा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी हर वर्ष यात्रा मार्ग में होने वाली खामियांे से कोई सबक नहीं ले रहे, यह भी हैरानी का विषय है। मौसम का मिजाज एक बड़ी समस्या के रूप मंे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य उत्तराखण्ड में हमेशा सामने आता रहा है। यात्रा सीजन में हर वर्ष  बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं कई वर्षों से बरसात के कारण जहां पहाड़ों में भूस्खलन होने के चलते उसका मलबा सड़कों में आ जाता है, जिसको साफ करने में कई-कई दिन लगने से श्रद्धालुओं को रास्तों में ही कैद हो जाना पड़ता है। वहीं मार्गों के अवरूद्ध होने से यात्रा मार्ग सहित धार्मिक स्थलों पर खाद्यान्न और जरूर सामान का टोटा पड़ता है, वहीं दूसरी समस्या अव्यवस्थाओं से पैदा होती है। बदरी-केदार और गंगोत्री-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की
स्थिति यह है कि बारिश के दौरान मार्ग कभी एक माह के लिए भी बंद करना पड़ जाता है। ऐसे में राह में फंसे श्रद्धालुओं को काफी संघर्ष करना पड़ जाता है। वहीं यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को बरकरार रखने के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति किसी से
छिपी नहीं है। बता दें कि वर्ष 2012 में केदारनाथ और यमुनोत्री में यात्रा के दौरान हार्टअटैक से करीब 100 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, जिसने सरकार के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी थी। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की कमी का रोना रोकर व्यवस्थाओं से पल्ला झाड़ने में हमेशा आगे खड़ा रहता है। यह सब बातें यह साफ करती हैं कि राज्य सरकार चार धाम यात्रा को जो बड़े-बड़े दावे करती आ रही है, वह सब दावे धरातल पर फेल साबित हो गए हैं, क्योंकि सरकार अभी तक यात्रा मार्गों पर वह पेयजल, सार्वजनिक शौचालय आदि तक की व्यवस्था तक नहीं कर पाई। उत्तराखण्ड सरकार चार धाम यात्रा को सरकारी कागजों में भले ही ऐतिहासिक बनाने की बात कहती रही हो, लेकिन चार धाम यात्रा पर सरकार का कोई नियंत्रण और सुविधाएं मुहैया न कराना स्वतः ही प्रदर्शित करता है कि सरकार इसके विकास के लिए और यात्रियों की सुविधा के लिए कितनी संवेदनशील है।