बुधवार, 17 जुलाई 2013

अंतिम संस्कार किये गये शवों की नहीं है सरकार के पास कोई पहचान

अंतिम संस्कार किये गये शवों की नहीं है सरकार के पास कोई पहचान
सबसे बड़ा सवाल क्या किसी भी शव के पास नहीं मिली उसकी पहचान
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। उत्तराखण्ड के चार धाम में आई महा जलप्रलय में सरकार ने पांच सौ से छः सौ श्रद्धालुओं की मौत होने का दावा किया था लेकिन जल प्रलय के 16 दिन बाद भी पुलिस अब तक मात्र 56 श्रद्धालुओं का अन्तिम संस्कार कर पायी है। सवाल उठ रहा है कि अगर इस जल प्रलय में सैकड़ों श्रद्धालु मारे गये तो क्या सरकार के पास उनकी मौतों का कोई सही आकड़ा मौजूद है? वहीं रेस्क्यू मिशन में सेना ने कितने श्रद्धालुओं को मौत के मुंह से बचाया इसका भी आज तक सहीं आंकड़ा सरकार के पास मौजूद न होने से उसकी मंशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं? हालांकि आज प्रशासन ने केदारनाथ में श्रद्धालुओं का अंतिम संस्कार करने का दावा किया था लेकिन भारी बारिश के कारण प्रशासन अंतिम संस्कार नहीं कर पाया। वहीं पुलिस प्रशासन के पास ऐसा कोई आंकड़ा दोपहर तक नहीं था कि कितने शवों का आज अंतिम संस्कार करने की योजना बनाई गई थी।
चारधाम यात्रा में आई महा जलप्रलय में केदारनाथ व रामबाड़ा में हजारों श्रद्धालुओं के मारे जाने की आशंका बनी हुई है। सरकार लगातार दावे करती आयी कि मलवे में दबे शवों को बाहर निकालने के लिए जल्द अभियान चलाया जायेगा। लेकिन 16 दिन बाद भी सरकार मलबे में दबे शवों मे बाहर निकालने के लिए कोई पहल नहीं कर पाई। वहीं अपनों को खोज-खोज कर आखों में आंसू लिये श्रद्धालुओं के परिजन अपने घरों को लौट गये। उनके मन में बस एक ही आस रही कि उनके अपने जिन्दा या मुर्दा हैं उन्हें इसकी जानकारी तो कम से कम उन्हे दे दी जाए जिससे वह अपनों का अन्तिम संस्कार करने का हक तो अदा कर दें। हजारों श्रद्धालुओं के मारे जाने की आशंका से डरी सरकार ने आज तक पूरे देश के सामने सही दृश्य पेश नहीं किया। क्योंकि उसे इस बात का डर सताया हुआ है कि अगर मौत के आंकड़ों को सही रूप से पेश कर दिया गया तो पूरे देश के अन्दर उत्तराखण्ड सरकार का दामन दागदार हो जायेगा। सरकार ने दावा किया कि चारधाम यात्रा में मरे श्रद्धालुओं का अन्तिम संस्कार किया जायेगा। लेकिन अभी तक शासन ने केदारघाटी में दो बार ही श्रद्धालुओं का अन्तिम संस्कार करवाया जिनकी संख्या लगभग 56 के बताई गयी है।  ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रशासन ने केदारघाटी में जिन श्रद्धालुओं का अन्तिम संस्कार कराया है क्या उनकी पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनकी फोटो मौके पर खिंचवाई गयी। सवाल यह भी तैर रहे हैं कि जिन श्रद्धालुओं को अन्तिम संस्कार किया गया उनके संस्कार से पहले उनकी फोटो खींचकर प्रशासन ने क्या उसे अपनी वेब साइड़ में अपलोड़ किया है?  सवाल उठ रहे हैं कि जिन 56 लोगों का अन्तिम संस्कार किया गया क्या उनमें से किसी एक के पास से भी कोई पेन कार्ड या कोई अन्य पहचान का सामान नहीं मिला। जिसे वेबसाइड पर डालकर उसकी पहचान कराकर उनके परिजनों को अन्तिम संस्कार में शामिल कराया जा सकता था? कुल मिलकर कहा जाए तो प्रशासन व पुलिस के पास ऐसे कोई आंकड़ा या ठोस सबूत अभी तक नहीं है जिससे की वह दावा कर सके कि कितने शवों के डीएनए टेस्ट किये गये हैं या वे कौन थे, और केदारनाथ घाटी में मलबों के उपर कितनी लाशें बिछी हुई हैं? सवाल यह भी तैर रहे हैं कि अगर केदारघाटी में जो शव इधर-उधर फैले हुए हैं उनकी पहचान कराने के लिए क्या प्रशासन ने उनकी फोटो खींचकर वेबसाइड पर डालने का काम किया है? अब तक सरकारी तंत्र लाशों के आंकड़ों को सही उजागर न करने के लिए जिस तरह से केदारघाटी से मीडिया को दूर रख श्रद्धालुओं का अन्तिम संस्कार करने में लगा हुआ है उससे उसकी मंशा पर सवाल उठ रहे हैं कि अगर जिन श्रद्धालुओं का अन्तिम संस्कार किया गया है अगर मीडिया को वहां साथ रखकर उनके चेहरों व पहचान को पूरे देश में उजागर करते तो अपनों का अन्तिम संस्कार देखकर उनके परिजनों में इस बात का दर्द मिट जाता कि कम से कम उनके अपनों को संस्कार के लिए चिता तो नसीब हो गई।