मंगलवार, 9 जुलाई 2013

उत्तराखंड: केदारनाथ के जंगलों में अब तलाशी अभियान तेज

उत्तराखंड: केदारनाथ के जंगलों में अब तलाशी अभियान तेज 
देहरादून, 25  जून । उत्तराखंड में भयानक प्राकृतिक आपदा के छह दिन बीत जाने के बाद भी सेना ने राहत कार्य जारी रखा है। केदारनाथ क्षेत्र में लापता लोगों की तलाश और तेजी से हो रही है। सेना अब केदारनाथ के आसपास के जंगलों में अपना तलाशी अभियान चलाएगी। इसके लिए पैराट्रूपर्स उतारे जा रहे हैं।
शुक्रवार को बदरीनाथ में भी सुबह सात बजे से हेलीकाप्टर की मदद से फंसे हुए यात्रियों को निकालने का काम शुरू हो गया है। 100 से अधिक रास्ते खुल गए हैं। इससे पहले अब तक सेना ने 32 हजार से अधिक लोगों की जान बचा ली है, जबकि अब भी 40 हजार से अधिक लोग जहां-तहां फंसे हुए हैं और 14 हजार से अधिक लापता हैं। ये आंकड़ा खुद राज्य सरकार ने जारी किया है।
तबाही का मंजर देख डीएम को हार्ट अटैक
बीते दिनों रेसक्यू ऑपरेशन की ओर से राज्य सरकार को दी गई रिपोर्ट में ये आंकड़ा सामना आया है। हालांकि चार दिनों में जितने लोगों को बचाया गया है वह आंकड़ा काफी कम है। बचाव एवं राहत कार्य में 26 हेलीकॉप्टर के साथ-साथ 10 हजार से ज्यादा सेना के जवान लगे हुए हैं, लेकिन यह भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। खासकर केदार घाटी में के चारों ओर दुर्गम पहाड़ होने के कारण यहां बड़े हेलीकॉप्टरों को ले जाना मुश्किल है इसलिए छोटे हेलीकॉप्टरों से ही काम चलाया जा रहा है।
इधर, सरकार पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है। उत्तराखंड के कई जिलों में जहां हजारों लोग अब भी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनके परिजनों ने सड़कें जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी है। महिलाएं उत्तरकाशी और की जगहों पर रैली निकालकर सरकार के खिलाफ अपनी विरोध प्रदर्शन कर रही है। लोग सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार इतनी आपदा के बाद भी ढीला रवैया अपना रही है। यही नहीं सरकार पर आरोप है कि प्रदेश के पास आपदा प्रबंधन की सही व्यवस्था नहीं थी, इसलिए ऐसी स्थिति पैदा हुई है।
अब भी तीन जिले रुद्रप्रयाग, चमोली व उत्तरकाशी में जलप्रलय से हुई भारी तबाही ने कितनी जिंदगियां ली है, इसे लेकर स्थिति अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि ये आंकड़े बढ़ सकते हैं।
गौरतलब है कि चार दिन पहले उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा में सबसे ज्यादा तबाही केदारनाथ धाम में हुई है। प्राचीन केदारनाथ धाम का अधिकतर हिस्सा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया, जबकि केदानाथ के अहम पड़ाव रामबाड़ा का नामोनिशान ही मिट गया। गौरीकुंड में भी चारों ओर तबाही का मंजर पसरा हुआ है। यही वजह है कि इन तीनों जगहों पर जानमाल का सर्वाधिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की ओर से दी जा रही सूचनाओं के मुताबिक अब तक कुल 72 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि गुरुवार को केदारनाथ से 17 शव और निकाले गए हैं। लापता लोगों के बारे में शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसे में आपदा के वास्तविक नुकसान को लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। केदारनाथ के नजदीक बनी 90 धर्मशालाओं का अस्तित्व खत्म हो गया है। आपदा के समय इन धर्मशालाओं में कई हजार लोग थे, ज्यादातर का कोई पता नहीं चल रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आपदा के समय मंदिर के चारों तरफ स्थित पहाड़ों से पानी के साथ बहकर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आए, उसी से वहां तबाही मची। केदार घाटी के 60 गांवों की भी कोई सूचना नहीं है। कई स्थानों पर मुख्य मार्ग और ज्यादातर रास्ते बह गये हैं। केदारनाथ में हालात को सामान्य बनाने में तीन साल भी लग सकते हैं। चमोली, रुद्रप्रयास और उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले इलाकों में स्थित गांवों-कस्बों के लोग अभी भी राहत और बचाव से वंचित हैं। प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन केंद्र की गृह मंत्रालय को दी गई रिपोर्ट आपदा से हुए इस नुकसान और दशा की पुष्टि करती है।
फंसे और लापता लोगों में उत्तर प्रदेश के लोगों की संख्या सर्वाधिक है। इस पड़ोसी राज्य से चारधाम यात्रा और पर्यटन के लिए दस हजार से ज्यादा लोग उत्तराखंड गए थे। इसके अतिरिक्त करीब ढाई हजार लोग सुदूर आंध्र प्रदेश से आए थे जिनमें से दो हजार लोग लापता हैं। कमोबेश यही स्थिति अन्य राज्यों से आए लोगों की है। सड़क और पार्किग में खड़े छह सौ से ज्यादा छोटे-बड़े चौपहिया वाहनों के बह जाने की सूचना है।
फंसे हुए लोगों का ठंड-भूख-संताप से बुरा हाल है। आसपास पड़ी लाशों से दुर्गध उठ रही है। लोग तिल-तिल करके मरने के लिए विवश हैं। कुछ लोग तो खतरा उठाकर दरिया लांघ रहे हैं और पहाड़ों के फिसलन वाले रास्तों से होकर बच निकलने का जोखिम उठा रहे हैं। बुधवार रात रुद्रप्रयाग जिले के गौरी गांव में छह और जंगलचट्टी में सात यात्रियों की मौत की भी सूचना है। यात्री कहां के थे, अभी यह पता नहीं चल पाया है।
पुलिस महानिरीक्षक [कानून-व्यवस्था] राम सिंह मीणा ने बताया कि केदारनाथ में 17 शव मिले हैं। आपदा को हिमालयी सुनामी बताने वाले मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य को चमोली में प्रभावितों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। जोशीमठ में बैरीकेडिंग तोड़कर महिलाएं मुख्यमंत्री पर बिफर पड़ीं।