बुधवार, 17 जुलाई 2013

बारिश से बढ़ रहा है नदियों का जलस्तर, दहशत में ग्रामीण, खाद्यान्न संकट गहराया

बारिश से बढ़ रहा है नदियों का जलस्तर, दहशत में ग्रामीण, खाद्यान्न संकट गहराया
देहरादून   ।   आपदा प्रभावित उत्तराखंड में दो दिनों से जारी बारिश ने राहत कार्य बाधित कर दिया है. राज्य सरकार अब ऐसे हेलीकॉप्टर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है जो खराब मौसम में भी उड़ान भरकर रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली में खाद्य आपूर्ति कर सकें.
बारिश से मंदाकिनी और अलकनंदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे केदारघाटी के आस-पास के ग्रामीण दहशत में हैं. खराब मौसम की वजह से तीन दिनों से भी ज्यादा समय से केदारघाटी में राहत सामग्री नहीं पहुंचाई जा सकी है.
एक अधिकारी ने बताया कि आपदा प्रभावित जिलों में अहम सड़कों का नेटवर्क अब भी क्षतिग्रस्त है जिसकी वजह से प्रभावित गांवों में ट्रकों से राहत सामग्री पहुंचाना असंभव है. ऐसे में यही विकल्प बचा है कि मौसम प्रतिरोधी हेलीकॉप्टरों की सेवाएं ली जाएं. राज्य आपदा प्रबंधन व राहत विभाग आज एक आपातकालीन बैठक करेगा जिसमें इसी विषय पर चर्चा की जाएगी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मलबा और शव हटाने के लिए केदारघाटी भेजे गए विशेषज्ञों के दल को भी खराब मौसम और भारी उपकरणों की कमी से काम करने में दिक्कत हो रही है. एनडीआरएफ ने हल्के उपकरण मुहैया कराए हैं जो केदारघाटी का कई टन मलबा हटाने के लिए नाकाफी हैं. राहत काम में लगे जवानों के लिए भोजन की कमी है, जिससे उनका काम और मुश्किल हो गया है. भोजन का भंडार तेजी से घट रहा है और राहत कार्यों में लगे कुछ जवानों के बीमार पड़ने की खबर भी है. 13 जवानों का एक पुलिस दल मलबे की वजह से वहां पहुंच ही नहीं सका और उसे बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा. प्रशासन का दावा है कि रुद्रप्रयाग के 36 गांवों में राहत सामग्री भेजी गई है. लेकिन जि़ले के 128 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. यानी 80 से अधिक गांवों को तत्काल राहत सामग्री की जरूरत है. एक अधिकारी ने बताया कि केदारनाथ भेजी गई टीम को मलबा हटाने और शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए वापस बुलाने और नई टीम की जगह राहत कार्य पर लगाने पर विचार किया जा रहा है.
             केदारघाटी में हालात गंभीर बने हुए हैं। लगातार हो रही बारिश से गांवों में खौफ पसरा हुआ है। लाउडस्पीकर पर हुई घोषणा के बाद से कई लोग घर छोड़कर शुक्रवार शाम को ही सुरक्षित ठिकानों की ओर चले गए हैं। दहशतजदा लोग रातभर सो नहीं पाए और टार्च की रोशनी से मंदाकिनी व अलकनंदा के जलस्तर का जायजा लेते रहे। हेलीकाप्टर की उड़ान ठप होने से केदारनाथ और गौरीकुंड में राहत कार्यो में लगे कर्मचारियों के सामने भी खाद्यान्न संकट पैदा हो गया है। इस बीच, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी ,चमोली में हल्की बारिश जारी है। मौसम खराब होने से फिलहाल राहत कार्य रविवार को भी शुरू नहीं हो पाए हैं। पहाड़ों पर छायी धुंध के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। प्रशासन केदारनाथ के लिए वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार कर रहा है। जिनमें पगडंड़ियों के प्रयोग पर विचार किया जा सकता है। इस समय उत्तरकाशी में भागीरथी उफान पर है। जिले में असी गंगा पर बने पुल का एक हिस्सा धंस गया है। जिसके बाद पुल पर से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
    रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी दिलीप जावलकर ने बताया कि टीम के पास तीन दिन की खाद्य सामाग्री है और मौसम साफ होते ही सामान लेकर हेलीकाप्टर रवाना कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि केदारनाथ में काम रही सत्तर सदस्यीय टीम को वापस बुलाने पर विचार किया जा रहा है। इसके स्थान पर नई टीम भेजी जा सकती है। बताया जा रहा है कि टीम के कई सदस्य बीमार हैं। खराब मौसम से केदारनाथ में मलबे की सफाई के साथ ही शवों की तलाश के कार्य में बाधा पड़ी है। वहीं रास्ता बनाते हुए केदारनाथ की ओर बढ़ रही 13 पुलिस कर्मियों की टीम रामबाड़ा से वापस गौरीकुंड लौट आई। रास्ता ध्वस्त होने से टीम को लौटने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उधर, पुलिस महानिरीक्षक (कानून) रामसिंह मीणा ने बताया कि घाटी में शवों की तलाश को मानव रहित विमानों का उपयोग किया जाएगा। केदारघाटी में चार दिन से राहत सामाग्री भी नहीं भेजी जा सकी है। प्रशासन के अनुसार अब तक 36 गांवों को राहत सामाग्री दी जा चुकी है, लेकिन जिले में प्रभावित गांवों की संख्या 128 है। इनमें से 103 सर्वाधिक प्रभावित ऊखीमठ तहसील में हैं। साफ है कि तकरीबन अस्सी गांवों को तत्काल मदद की जरूरत है। पहाड़ों में भारी बारिश ने आपदाग्रस्त इलाकों की मुसीबत बढ़ा दी है। रुद्रप्रयाग के अलावा चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में भी हेलीकाप्टर नहीं उड़ पाए। तीनों जिलों के प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री नहीं पहुंचाई जा सकी। राशन की आपूर्ति न हो पाने से पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। गंगोत्री धाम में खाद्यान्न समेत जरूरी चीजों की आपूर्ति नहीं हो पाने से वहां तैनात पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों को खाने के लाले पड़े हुए हैं।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी आर. राजेश कुमार ने कहा कि खराब मौसम के कारण गंगोत्री में आपूर्ति नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वहां खाद्य सामाग्री भेज दी जाएगी। भागीरथी के उफान को देखते हुए उत्तरकाशी के मुख्य बाजार का जड़भरत मोहल्ला भी खाली करा लिया गया है।
लगातार भूस्खलन ने सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बदरीनाथ और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग मलबा आने से फिर बंद हो गए, जबकि केदारनाथ और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर अब तक यातायात शुरू नहीं हो पाया है। शुक्रवार को गोविंदघाट के पास सीमा सड़क संगठन ने जिस मार्ग को चलने लायक बना, शनिवार को वहां फिर से मलबा आ गया। इसके अलावा अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी उफान पर हैं। टिहरी जिले में भी बारिश से तबाही का सिलसिला जारी है। जिले के थत्यूड़ ब्लाक के तहत शिवा गांव में छह मकान मलबे में दब गए। हालांकि जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। 22 परिवारों वाले गांव में सभी लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर चले गए हैं। जिले के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांव भूस्खलन की चपेट में हैं।
अगले कुछ घंटों में सूबे में भारी बारिश
देहरादून। उत्तराखंड के कई स्थानों पर बारिश के चलते जनजीवन थम-सा गया है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शनिवार को बारिश से राहत कार्य प्रभावित हुए। अगले कुछ घंटों में राज्य के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। दक्षिणी उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर 20 से 40 एमएम और दक्षिणी कुमाऊं में 40 से 60 एमएम तक वर्षा के आसार हैं। आपदा प्रभावित रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में रात से ही मध्यम से भारी वर्षा हुई। दिन में भी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। चमोली में सर्वाधिक 46.7 एमएम जबकि रुद्रप्रयाग में 38.7 एमएम बारिश हुई। चंपावत और बागेश्वर में भी मध्यम बारिश हुई। अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर में भी 21 से 22 एमएम तक वर्षा हुई हालांकि पिथौरागढ़ में थोड़ी राहत रही। टिहरी और पौड़ी जिले में बादल छाए रहे, लेकिन वर्षा से जनजीवन पर कोई असर नहीं पड़ा। राज्य मौसम विभाग के निदेशक डॉ. आनंद शर्मा के अनुसार अगले 24 घंटे में राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी वर्षा हो सकती है। आठ जुलाई को 20 से 40 एमएम तक वर्षा की संभावना है जबकि नौ और 10 जुलाई को वर्षा में कमी आएगी।