मंगलवार, 9 जुलाई 2013

केदारनाथ मंदिर छोड़ कुछ नहीं बचा

केदारनाथ मंदिर छोड़ कुछ नहीं बचा
17जून
जैसे जैसे मौसम  साफ हुआ वैसे वैसे  प्रकृति  के कहर की  जानकारी सामने आने लगी है ..उत्तराखंड धीरे-धीरे बाढ़ के अब तक के सबसे बड़े कहर की चपेट में आ गया है। केदारनाथ से लौट रहे चश्मदीदों के मुताबिक वहां जबरदस्त तबाही हुई है। इस बार बादल फटने से हुई जबरदस्त बारिश का कहर केदारनाथ पर टूटा है। हाल ये है कि केदारनाथ के पास रामबाड़ा बाजार पूरी तरह बह गया है। केदारनाथ मंदिर का मुख्य द्वार भी पानी के तेज बहाव की चपेट में आने से बह गया है। हेलीकॉप्टर से ली गई फोटो में साफ दिख रहा है कि केदारनाथ में अब सिर्फ मुख्य़ मंदिर की इमारत बची है वो भी आधी मलबे में डूबी हुई है। आसपास सबकुछ तबाह हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने बताया कि केदारनाथ में गांधी सरोवर मलबे में तब्दील हो गया है। 5 हजार खच्चर और उनके इतने ही मालिकों का अता पता नहीं है। केदारनाथ मंदिर टेढ़ा हो गया है। खुद एसडीएम घायल हैं। उन्हें जोशी मठ लाया गया है। गौरी कुंड वीरान हो गया है। वहां कुछ नहीं पहचाना जा सकता। गांधीताल तूट गया है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लोग सो रहे थे, कुछ पूजा कर रहे थे, घूम रहे थे तभी अचानक बहुत भारी मात्रा में पीछे से पत्थर, मलबा, पानी आया। ये इतनी तेजी से आया कि कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही वे मलबे की चपेट में आ गए। ये मलबा बीच-बाजार से गुजरा। सिर्फ मंदिर दिख रहा है बाकी पीछे के होटल, लॉज, मंदिर का मुख्य द्वार  तथा शंकराचर्या  की लाट  आदि सब पानी में बह गए। कई लोग मलबे के नीचे दबे और उनके बचने की कोई संभावना नहीं लगती।

एक प्रत्य़क्षदर्शी ने बताया कि केदारनाथ एक श्मशान घाट में बदल गया है। मंदिर के आसपास लाशें पड़ी हैं। मंदिर के आसपास का बाजार, दुकान, घर, होटल सब तबाह हो गई हैं। वहां अब कुछ नहीं बचा है। हेलीकॉप्टर के जरिए जिन लोगों को बचाकर लाया जा रहा है वो रो रहे हैं क्योंकि किसी के मां-बाप नहीं हैं तो किसी के बच्चे। नुकसान का सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है। चश्मदीदों का दावा है कि केदारनाथ मंदिर के अलावा यहां कुछ नहीं बचा है। केदारनाथ में हुई तबाही का आकलन अभी तक नहीं किया जा सका है। केदारनाथ के बाद गौरीकुंड में भी भारी तबाही हुई है। केदारनाथ, गौरीकुंड और रामबाड़ा में जान-माल का कितना नुकसान हुआ है, इसका अंदाजा भले ही अभी नहीं लग पाया हो लेकिन यहां भारी तबाही हुई है।
भाजपा के वरि’ठ नेता और उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मंगलवार से उत्तराखण्ड के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के दौरे पर हैं। भ्रमण के पहले दिन डाॅ0 नि”ांक ने फाटा और गुप्तका”ाी क्षेत्रों का दौरा किया तथा केदारनाथ व रामबाड़ा क्षेत्र का हवाई दौरा किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने अपदा प्रभावित इलाकों का जायजा लिया तथा पीडि़त क्षेत्रवासियों तथा रास्ते में फंसे लोगों का हाल चाल जाना।
डाॅ0 नि”ांक ने आपदाग्रस्त इलाकों का हाल देखने के बाद कहा कि यह आपदा सदी की सबसे वीभत्स आपदा है। दिल दहला देने वाला मंजर चारों ओर देखने को मिल रहा है। राज्य की राजधानी में मीडिया के माध्यम से जो खबरें आ रही हैं, वास्तविक परिस्थितियां उससे कई ज्यादा खतरनाक और भयावह हैं।
राज्य सरकार तथा प्र”ाासनिक रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्र”ाासनिक मदद मौके से नदारद है। जब सरकार को भारी बरसात का पूर्वानुमान मौसम विभाग से मिल चुका था तो आपदा से पूर्व की तैयारियां क्यों नहीं की गयी।
पीडि़तों के लिए भोजन तथा स्वास्थ्य संबंधी कोई सुविधाएं नहीं हैं। दे”ा विदे”ा से आए हजारों पर्यटक दर बदर भटक रहे हैं। उनके लिए न तो खाने पीने की कोई पुख्ता व्यवस्था है और ना ही जगह-जगह कंटोल रूम बनाए गए हैं। आम जनता सरकार के रवैये से बहुत ज्यादा आक्रो”िात है। सेना के जवानों द्वारा किए जा रहे बचावकार्यों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने बताया कि संपर्क मार्गों के कट जाने से सेना भी कई इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही है। हालात इतने खराब हैं कि आपदा के बाद गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हालात की गंभीरता को देखते समय रहते हालात से मुस्तैदी से निपटना होगा। यदि समय रहते वहां फंसे यात्रियों तथा क्षेत्रवासियों को सुरक्षित नहीं निकाला गया तो कई लोगों की जान जा सकती है, और आपदा और विकराल रूप धारण कर सकती है।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों के दौरे में उनके साथ भाजपा नेता सुरे”ा जो”ाी जी, बलराज पासी जी, आ”ाा नौटियाल जी आदि हैं। वे रात्रि को वहीं क्षेत्र में रूकेंगे तथा बुधवार को सभी लोग उत्तरका”ाी में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।