मंगलवार, 9 जुलाई 2013

रिपोर्ट ने खोली पोल नंदा देवी राजजात के लिए सरकार के दावे बड़े और जमीनी हकीकत कुछ और

रिपोर्ट ने खोली पोल
नंदा देवी राजजात के लिए सरकार के दावे बड़े और जमीनी हकीकत कुछ और
राजेन्द्र जोशी
देहरादून,6 मई । विश्व की सबसे बड़ी और अद्भुत तीर्थ यात्रा वह भी हिमालयी क्षेत्र में 28 अगस्त 2013 से शुरू होनी है। सरकार भले ही इस यात्रा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यात्रा मार्ग में अब स्थाई निर्माणों की बात तो दूर अस्थाई निर्माण भी होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इस बात का खुलासा नंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष कुंवर डा. राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में मुख्य यात्रा मार्ग एवं सहायक यात्रा मार्गों की स्थलीय निरीक्षण के हुआ है, जिसकी रिपोर्ट समिति द्वारा मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। समिति की रिपोर्ट का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राज्य के अधिकारी ही इस यात्रा की तैयारियों पर पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री को प्रेषित रिपोर्ट में समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने बताया कि 14 दिसंबर और 10 अप्रैल को हुई बैठक में अधिकारियों के जो तेवर दिखाई दिए, उनसे तो यह लगता है कि वे इस अंतर्राष्ट्रीय स्तर की यात्रा के मार्ग में सबसे बड़े व्यवधान हैं। उन्होंने यहां तक कहा है एक प्रमुख सचिव द्वारा यात्रा को महत्वहीन बनाने व व्यवस्थाओं को न्यून करने का दबाव दिया गया। यही कारण है कि यात्रा की व्यवस्थाएं वित्तीय स्वीकृतियों के अभाव में अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चमोली और अल्मोड़ा के जिलाधिकारियों को विशेष कार्याधिकारी बनाया गया है और अभी तक उनके द्वारा पड़ाव व यात्रा मार्गों पर पैदल चलकर वास्तविकता से सही रिपोर्ट पेश नहीं की गई है। इतना ही नहीं पड़ाव अधिकारियों के पास पड़ाव की कोई फाईल नहीं है और विभागों का आपस में कार्यदायी संस्था से कोई सांमजस्य नहीं है। पड़ाव समितियों की बैठक भी नियमित नहीं हो रही है और 16 पड़ावों की समीक्षा बैठक में मात्र सात नोडल अधिकारियों के उपस्थित होने से यह बात साफ हो जाती है कि सरकार इस यात्रा को कितनी गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पड़ाव पर आवासीय मेला व मंदिर क्षेत्र तक अस्थाई व्यवस्था होनी चाहिए, प्रत्येक पड़ाव व यात्रा मार्ग पर पेजयल की व्यवस्था की जानी चाहिए, वहीं यात्रा की स्वच्छता के लिए पांच लाख तीर्थयात्रियों का लक्ष्य बनाते हुए कुंभ मेले के आधार पर अस्थाई मुत्रालय, शौचालय की व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं प्रत्येक पड़ाव पर यात्रा के दो दिन पहले सचल चिकित्सालय 108 वाहन और एंबुलेंस हैलीकाप्टर की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि बेदनी, ग्वालदम, गोपेश्वर, अल्मोड़ा, श्रीनगर, गौचर, कर्णप्रयाग, देहरादून में आपात चिकित्सा की व्यवस्था हो, वहीं लाता, पैंतोली, दसोली, दशमद्वार, कुरूड़, वदियाकोट और अल्मोड़ा आदि स्थानों को चिकित्सक दल भेजे जाएं, साथ ही कर्णप्रयाग में नवनिर्मित ट्रामा सेंटर को शुरू किया जाए। रिपोर्ट की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री और प्रदेश के सांसदों और विधायकों को भी भेजी गई है।