शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

उत्तराखंड में मोदी पर बैन, तो राहुल को क्यों मिली जाने की इजाजत?



उत्तराखंड में मोदी पर बैन, तो राहुल को क्यों मिली जाने की इजाजत?


देहरादून : उत्तराखंड में तबाही के एक सप्ताह बाद आखिरकार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी देश में 'प्रकट' हुए और निकल पड़े 'आपदा पर्यटन' पर। सोमवार को राहुल ने बेहद गोपनीय तरीके से आपदा प्रभावित इलाकों का रुख किया। वह सबसे ज्यादा प्रभावित रुद्रप्रयाग भी गए। रात को वह गोचर में आईटीबीपी के गेस्ट हाउस में रुके। इसके बाद आज सुबह वे  हेलिकॉप्टर से गुप्तकाशी पहुंचे और अस्पताल में भर्ती लोगों से मिलने पहुंचे। उनका पूरी तरह से तबाह हो चुके केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने का भी कार्यक्रम है।
उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार और देश के गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हवाई सर्वे तक सीमित रखा था। शिंदे ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को छोड़कर किसी भी वीआईपी को आपदा प्रभावित इलाकों में न जाने की सलाह दी थी। उन्होंने मोदी का नाम लिए बिना कहा था कि किसी मुख्यमंत्री को तो छोड़िए देश के गृहमंत्री को भी प्रभावित क्षेत्रों में लैंड करने की इजाजत नहीं है। वीआईपी दौरे से पुलिस उनकी सुरक्षा के तामझाम में लग जाएगी और राहत व बचाव कार्य प्रभावित होगा। सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने भी मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग आपदा पर्यटन पर निकले हैं।
ऐसे में यह सवाल वाजिब है कि राहुल गांधी कौन से पर्यटन पर निकले हैं? क्या एसपीजी सुरक्षा प्राप्त राहुल के प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से राहत और बचाव कार्य प्रभावित नहीं हो रहे हैं? इस सवाल के जवाब में कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि वह उत्तराखंड बतौर कांग्रेस उपाध्यक्ष गए हैं न कि वीआईपी की हैसियत से। अब यह तर्क तो शायद ही किसी के गले से उतरे कि एसपीजी सुरक्षा प्राप्त राहुल गांधी के दौरे से राहत कार्य प्रभावित नहीं होगा। सूत्रों ने हमें बताया कि एसपीजी सुरक्षा मानकों के अनुरूप राहुल गांधी की सुरक्षा काफिले में एसपीजी के जवानों से लैस कम से कम 7 गाड़ियां होती हैं। इसके अलावा लोकल पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होती हैं।
गौरतलब है कि इस आपदा की घड़ी में राहुल के देश से बाहर होने को बीजेपी ने मुद्दा बना दिया था। नरेंद्र मोदी आनन-फानन में उत्तराखंड पहुंच गए थे और दावा किया गया था कि उनके दो दिन के दौरे के दौरान ही उन्होंने देहरादून और ऋषिकेश से करीब 15000 गुजरातियों के घर लौटने की व्यवस्था करवा दी थी। आपदा प्रभावितों से 'हमदर्दी' इस रेस में राहुल पीछे छूटते दिख रहे थे। चौतरफा दबाव के बाद राहुल गांधी रविवार की शाम भारत लौटे। दिल्ली में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस की राहत सामग्री को रवाना करने के तुरंत बाद उन्होंने उत्तराखंड के प्रभावित क्षेत्रों का रुख किया।
कांग्रेस भी राहुल के इस दौर पर अब खुलकर उनका पक्ष ले रही है। कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी व्यक्तिगत तौर पर वहां जाकर नुकसान का जायजा लेना चाहते हैं। राहुल के आपदा के समय देश से बाहर रहने पर हो रही आलोचनाओं को चौधरी ने खारिज किया। उन्होंने कहा, 'आपको पता नहीं है कि वह क्या कर रहे हैं। आप क्या चाहते हैं...क्या हम आपको यह बताएं कि उन्होंने बाल कब कटवाए या कब थूका या फिर छींका। हर कोई ऐसा नहीं होता कि जो इन चीजों की पब्लिसिटी करे।' उन्होंने कहा कि राहुल ने अपने उत्तराखंड दौरे को लो प्रोफाइल रखा है। वह राहत कार्य में बाधा नहीं पहुंचाना चाहते हैं।