गुरुवार, 8 अगस्त 2013

आपदा से बचने के बाद आखिर कहां गए वो!

                            आपदा से बचने के बाद आखिर कहां गए वो!
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। लखनऊ की प्रजापति परिवार की महिला, नोएडा में रहने वाली रूचि के पिता और न जाने कितने उत्तराखण्ड में आई आपदा के बाद बच तो गए, लेकिन आज तक उनका कहीं कोई पता नहीं है और न ही सरकार ने ऐसे लोगों को ढूंढने की कोशिश की जो प्रकृति के प्रलय के बाद बच तो गए थे, लेकिन उसके बाद न जाने कहां गुम हो गए। लखनऊ की प्रजापति परिवार की इस महिला का आखिरी फोटो 21 जून को बद्रीनाथ में एक सैन्य अधिकारी के सामने गिडगिड़ाते हुए, बेबसी, लाचारी और दर्द का अहसास कराते हुए देखा जा सकता है।
एक महीने बाद भी ऐसे हजारों लोग हैं, जो न तो वापस लौटे और न ही उनके शव ही अभी तक मिले हैं। वहीं ऐसे लोगों की अभी तक गुमशुदगी भी कहीं दर्ज हो पाई होगी, इसमें संदेह है। 21 जून को प्रजापति परिवार की इस महिला की फोटो पत्रकार दानिश सिद्दकी ने बद्रीनाथ में उस वक्त खींची थी, जब वे सेना के एक हैलीकाप्टर से बद्रीनाथ पहुंचे थे। दानिश सिद्दकी ने बीबीसी की वंदना को बताया कि उस दिन मैं सेना के हैलीकाप्टर से बद्रीनाथ के इस इलाके पहुंचा था, बहुत छोटा सा हैलीकाप्टर था, जिसके द्वारा लोगों को निकाला जा रहा था, उन्होंने कहा कि मेरी नजर इस महिला पर पड़ी जो बहुत बुरी तरह रो रही थी औरी सैनिक से कह रही थी कि मुझे जाने दीजिए, लेकिन वह सैनिक इतना बेबस था कि वह उसे नहीं ले जा सकता था, क्योंकि उसे उसके उच्चाधिकारियों के आदेश थे कि सबसे पहले बुजुर्गों और जख्मी लोगों को ले जाना है। दानिश सिद्दकी ने कहा कि वह यह साफ कह सकते हैं कि मेरे वहां से जाने तक वह महिला सुरक्षित थी और उसे किसी तरह की चोट भी नहीं थी। दानिश ने बताया कि एक अखबार में तस्वीर छपने के बाद महिला के परिजनों ने किसी तरह उनका नंबर ढूंढ निकाला और वह इस उम्मीद के साथ मुझसे बात करने लगे कि शायद कुछ सुराग मिल जाए, लेकिन बद्रीनाथ से वह महिला कहां गई, इसका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया है। दानिश ने यह भी बताया कि महिला का भाई इस बात को लेकर बहुत परेशान है कि जब उसकी बहन बद्रीनाथ में सुरक्षित थी और लोगों को वहां से हैलीकाप्टर से निकाला जा रहा था, तो आखिर वह उसके बाद से कहां गायब हो गई। यह तो केवल आपदा की एक बानगी है, न जाने कितने परिवारों की ऐसी कहानी होगी, जिनके मां, बहन, बच्चे, बुजुर्ग अभी भी अपनों का इंतजार कर रहे होंगे। ठीक इसी तरह नोएडा की रहने वाली रूचि के पिता भी उत्तराखण्ड से लापता हैं। पिता की तलाश में जुटी रूचि ने बीबीसी को फोन किया और बीबीसी फोटोग्राफर सज्जाद हुसैन जिसने उनकी फोटो खींची थी, उनसे संपर्क किया। इसके बाद रूचि और उसके मां के मन में अपने पिता के जिंदा होने की आस बंधी थी, लेकिन जब सज्जाद ने उन्हें बताया कि जिनकी फोटो उन्होंने खिंची थी, वह रूचि के पिता जैसे तो थे, लेकिन रूचि के पिता नहीं थे।
प्रकृति के प्रकोप के शिकार बने न जाने देश के ऐसे कितने लोग हैं, जो आज भी अपनों को ढूंढ रहे हैं। वहीं इनमें से कुछ परिवार को ऐसे हैं, जिन्होंने अपने दिलों में पत्थर रखकर खुद को समझाना शुरू कर दिया है कि शायद अब उनके अपने कभी नहीं लौटंेगे।