गुरुवार, 8 अगस्त 2013

चौधरी वीरेन्द्रसिंह बताये उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री कितने सौ करोड में बने ?

चौधरी वीरेन्द्रसिंह बताये उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री कितने सौ करोड में बने ?

मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष कितने सौ करोड में बनते हैं चौधरी साहब ?
देव सिंह रावत
नयी दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केन्द्रीय महामंत्री चौधरी  वीरेन्द्रसिंह ने रविवार को  रहस्योद्घाटन करके अपनी पार्टी कांग्रेस को ही कटघरे में खडा कर दिया है कि कि राज्यसभा सांसद बनने के लिए 100 करोड़ रूपये तक लोग खर्च करते हैं। उनके अनुसार आज के दिन जनसेवा व प्रतिभा के दम पर नहीं अपितु थेली के बल पर ही यहां राज्यसभा सांसद बनते है। उन्होंने दावा किया कि वे ऐसे एक ही नहीं अपितु 20 सांसदों को जानता हूँ जिन्होंने धन बल के बल पर राज्यसभा की सीट अर्जित की।
आज पूरा उत्तराखण्ड ही नहीं पूरा देश यह भी सर छोटू राम के वंशज चौधरी वीरेन्द्रसिंह से इस रहस्य को भी जानना चाहते हैं कि उनके प्रभारी रहते हुए उत्तराखण्ड के विधायकों व जनता दोनों की भावनाओं को रौंदते हुए क्या मुख्यमंत्री भी इसी प्रकार की थेली सौंपने से बनाये गये? अगर बनाये गये तो कितने सो करोड़ में। जब एक सांसद बनने के लिए सो करोड़ तक का रेट चोधरी वीरेन्द्रसिंह खुद बता रहे हैं तो एक प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की कीमत को सैकडों या हजारों करोड़ की होगी? उनको न केवल उत्तराखण्ड की अपितु हरियाणा व महाराष्ट्र सहित कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री बनने की कीमत की भी जानकारी अवश्य होगी। होगी क्यों नहीं वे आखिर कांग्रेस में कई मुख्यमंत्री बनाने में निर्णायक रणनीतिकारों में से थे। इसके साथ चैधरी साहब यह भी देश की जनता को बताने की कृपा करेंगे कि केन्द्रीय मंत्री व प्रदेश सरकार के मंत्री या प्रदेश अध्यक्ष बनने में कितने की थेली चढायी जाती है। सवाल यही है कि जब राज्य सभा सांसद बनने के लिए कीमत चूकानी पडती है तो ये राजनीति के व्यापारी क्यों मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री जेसे महत्वपूर्ण पद मुफत मेें किसी को यो ही खेरात में क्यों देगे।
चैधरी वीरेन्द्रसिंह के आरोपों में उसी प्रकार की सच्चाई हो सकती है जिस प्रकार की सच्चाई कांग्रेसी दिग्गज नेत्री मार्गेट अल्वा ने कांग्रेस में टिकट बेचने का आरोप लगाने में थी। उसके बाद टिकटों की खरीद परोख्त पर शायद ही कोई कमी आयी होगी परन्तु अल्वा को कांग्रेस के दिग्गज नेत्री के पद से हटा दिया गया। उसके बाद उनको मनोगुहार लगाने के बाद दया करके कांग्रेस नेतृत्व ने राज्यपाल जेसे पद पर नवाजा। परन्तु इस प्रकरण के कई साल बाद भी मार्गेट अल्वा अभी तक कांग्रेस की मुख्यधारा में वापसी नहीं कर पायी।
यही हाल अब लगता है कि हरियाणा के दिग्गज नेता व मुख्यमंत्री के एक प्रमुख दावेदार रहे चोधरी वीरेन्द्र सिंह का है। उनकी बात को लोग केवल उनको केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में व कांग्रेस की कार्यकारणी में सम्मलित न किये जाने की खीज के रूप में ही देख रहे हैं। हालांकि वे हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने की लालशा आज भी अपने दिलो दिमाग से चाह करके भी दूर नहीं कर पा रहे है। इसी को हाशिल करने की लालशा को देखते हुए हरियाणा के वर्तमान मुख्यमंत्री हुड्डा ने उनको हरियाणा से दूर रखा। अब जब कांग्रेसी नेतृत्व ने उनको बेताज कर दिया, उत्तराखण्ड, हिमाचल व दिल्ली का प्रभार से भी मुक्त करने के साथ साथ केन्द्रीय महासचिव पद से भी हटा दिया । एक आशा जगी थी उनके दिल में कि उनको केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में केन्द्रीय मंत्री बनाया जाने का वह भी नहीं बनाया गया। अब वे भी बेरोजगार हो गये हैं। इसी गुस्से में या कुछ नया खेल खेलने की रणनीति के तहत उन्होंने राज्यसभा सांसद बनने के रेट का रहस्योदघाटन किया। हो सकता हो कि उनको इस बात का भान हो गया हो कि हुड्डा के आगे कांग्रेस में उनकी दाल अब नहीं गलने वाली। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है वे कुछ राजनैतिक गुल खिलाने या राजीव गांधी के करीबी मित्र होने का कुछ लाभ उठाने के लिए यह दाव चल रहे हो। हालांकि उनके कार्यकाल में कितने कीर्तिमान बने इसकी लम्बी सूचि उनकी कृपा पात्रों ने कांग्रेस नेतृत्व को सोंप दिया था, इन्हीं महान कार्यो के देख कर शायद कांग्रेस नेतृत्व ने उनको इस उम्र में ज्यादा काम न दे कर विश्राम करने का निर्णय लिया। अब देखना है राजनीति जगत में उठापटक की राजनीति के लिए विख्यात रहे हरियाणा में चोधरी वीरेन्द्रसिंह आगामी लोकसभा चुनाव में किस नाव पर सवार हो कर चुनावी भंवर को पार लगने का दाव खेलते है। परन्तु उनके बयानों से साफ हो गया कि वे समझ चूके हैं ंकि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सवारी करना बुद्धिमता का काम नहीं है।