रविवार, 18 अगस्त 2013

‘‘रोल बैक‘‘ करती बहुगुणा सरकार!

‘‘रोल बैक‘‘ करती बहुगुणा सरकार!
जितने कदम चले आगे उतना ही किया ‘‘रोल बैक‘‘
राजेन्द्र जोशी
देहरादून :  अपने ही निर्णयों से ‘‘रोल बैक‘‘ करना बहुगुणा सरकार की आदत में शुमार है। मुख्यमंत्री बहुगुणा द्वारा अब तक लगभग एक दर्जन से ज्यादा मामलों पर ‘‘रोल बैक‘‘ किया गया है। यह ‘‘रोल बैक‘‘ राजनैतिक कारणों से किया गया अथवा जानकारी के अभाव में, लेकिन सरकार की इस ‘‘रोल बैक‘‘ की आदत से यह साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार पहले तो घोषणा कर देती है और बाद में उस से पीछे हट जाती है।
    प्रदेश में 17 महीने पुरानी बहुगुणा सरकार ने अभी तक कभी पूर्ववर्ती सरकारों के निर्णय, तो कभी अपने ही निर्णयों पर ‘‘रोल बैक‘‘ किया है। सरकार
द्वारा लगातार किए जा रहे ‘‘रोल बैक‘‘ से सरकार की इच्छा शक्ति पर सवालिया निशान स्वतः ही लग जाते हैं। विजय बहुगुणा द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के तुरंत बाद सबसे पहले उनके द्वारा भाजपा शासनकाल के दौरान बनाए गए भू-अध्यादेश को समाप्त कर राज्य में भूमाफियाओं के लिए दरवाजे खोल दिए, वहीं प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में लोकायुक्त गठन पर अभी तक किसी भी तरह की दिलचस्पी न दिखाया जाना और खण्डूडी सरकार के दौरान स्थानांतरण एक्ट को पलटने को पिछली सरकारों के निर्णय से ‘‘रोल बैक‘‘ करना ही कहा जाएगा। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की गन्ना चीनी मिलों को पीपीपी मोड़ में देने के बाद ‘‘रोल बैक‘‘ करना, केदारनाथ में आई आपदा के दौरान देश के सामने यह कहना कि 15 जुलाई तक सबको मुआवजा दे दिया जाएगा इस निर्णय पर भी प्रदेश सरकार ने ‘‘रोल बैक‘‘ किया। इतना ही नहीं पहले प्रदेश सरकार ने आपदा के बाद यह कहा था कि एक महीने बाद केदारनाथ, रामबाड़ा, सौनप्रयाग आदि क्षेत्रों से लापता लोगों को मृत मान लिया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार अब अपनी इस घोषणा से भी ‘‘रोल बैक‘‘ कर गई है। वहीं सरकार द्वारा कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण के बाद एक्स कैडट व्यवस्था को खत्म किया जाना भी प्रदेश सरकार का ‘‘रोल बैक‘‘ ही रहा। वहीं मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली में मासूम के साथ बलात्कार के बाद राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा करना और फिर उस घोषणा से ‘‘रोल बैक‘‘ करना, वहीं केंद्र द्वारा घरेलू उपयोग के लिए प्रतिवर्ष छहः गैस सिलेंडरों को रियायती दामों पर देने की घोषणा के बाद के बाद मुख्यमंत्री द्वारा तीन अतिरिक्त गैस सिलेंडर दिए जाने की घोषणा से ‘‘रोल बैक‘‘ करना सहित प्रदेश में एफडीआई लागू करने की घोषणा करने के बाद यह कहकर ‘‘रोल बैक‘‘ करना कि राज्य में उस स्तर के कोई शहर नहीं है, जहां एफडीआई लागू किया जा सके। वहीं भाटी आयोग सहित कई अन्य मामलों सहित अब ताजे पुर्नविकास और पुर्ननिर्माण के लिए बनाए जाने वाले प्राधिकरण के मामले पर भी राज्य सरकार ने ‘‘रोल बैक‘‘ किया है।
    कुल मिलाकर इन 17 महीनों में कांग्रेस की सरकार ने जितने कदम आगे बढ़ाए हैं, उतने ही कदम ‘‘रोल बैक‘‘ भी किए हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का
मानना है कि प्रदेश में काबिज सरकार कोई भी घोषणा बिना सोचे-समझे कर देती है, यही कारण है कि उसे अपने हर निर्णय के बाद ‘‘रोल बैक‘‘ करना पड़ा
है।