रविवार, 18 अगस्त 2013

सरकार का श्रद्धालुओं की मौत के साथ घिनौना खिलवाड़

सरकार का श्रद्धालुओं की मौत के साथ घिनौना खिलवाड़
श्रद्धालुओं के शवों को कूड़ें की तरह जलाया गया: पंडित
देहरादून : उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा में हजारों श्रद्धालुओं के मारे जाने से देश के कई राज्यों में मातम छाया हुआ है क्योंकि जिस राज्य के श्रद्धालु इस आपदा में मारे गये उनके परिजनों में उत्तराखण्ड सरकार के प्रति एक बड़ी नाराजगी है और वह अपनों को केदारधाम में खोजते-खोजते आंखों में आंसू लेकर लौट गये।
केदारधम व रामबाड़ा में इधर-उधर बिखरे पड़ें शवों का अन्तिम संस्कार राज्य सरकार ने वहीं कराने का दावा तो किया है लेकिन इन शवों का संस्कार विधि के अनुरूप न किए जाने को लेकर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। धर्मनगरी के पुरोहित सभा के अध्यक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि जिन शवों का अन्तिम संस्कार किया जा रहा है उसकी न कपाल क्रिया की जा रही है और न ही उनके शवों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है जिससे आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। इसी बात से आहत होकर अखिलभारतीय युवा तीर्थ पुरोहित सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को भावनात्मक पत्र लिखा है। उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा के बाद केदारधाम व रामबाड़ा में हजारों श्रद्धालुओं की मौत हो गई। हालांकि सरकार
ने मौत का आंकड़ा सिर्फ एक हजार तक बताया। केदारधाम व रामबाड़ा के मलबे में हजारों श्रद्धालुओं के मारे जाने की आशंका से सरकार भी विचलित हो गई। सरकार ने केदारधाम व रामबाड़ा में मलबों को हटाने के लिए तत्काल बड़ी-बड़ी मशीने वहां तैनात करने का दावा किया था लेकिन अभी तक इन मलबों को
हटाने के लिए सरकार ने कोई पहल नहीं की। जिसको लेकर सरकार की कार्यशैली पर पूरे देश के अन्दर सवाल उठ रहे हैं। देश के कई राज्यों के श्रद्धालु इस आपदा में हमेशा के लिए मौत की नींद सो गये, जिसको लेकर उनके अपनों की आंखों में रात-दिन आंसूओं की गंगा बह रही है। केदारधाम व रामबाड़ा में
इधर-उधर बिखरे पड़ें कई शवों का अन्तिम संस्कार कराने के लिए सरकार ने दावे किए लेकिन इन संस्कारों के समय मीडिया को दूर रखना कहीं न कहीं कई सवाल खड़े कर गया। केदारधाम व रामबाड़ा में श्रद्धालुओं के संस्कार का मजाक उड़ाए जाने को लेकर हरिद्वार के अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उज्वल पंडित ने प्रदेश के मुख्यमंत्री  विजय बहुगुणा को एक पत्र  लिखा है जिसमें उन्होंने केदारधाम व रामबाड़ा में श्रद्धालुओं के शवों के अन्तिम संस्कार पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि केदारधाम में श्रद्धालुओं के शवों का अन्तिम संस्कार मकानों की खिड़कियों व दरवाजों की लकड़ियों से किया जा रहा है तथा शवों को अधजली अवस्था में ही छोड़ा जा रहा है इतना ही नहीं उन्होंने पत्र में लिखा है कि सनातन संस्कार प्रक्रिया के तहत मृतकों की कपाल क्रिया भी नहीं की गई और न ही इन शवों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने का आज तक कोई काम हुआ है जिसके चलते उनकी अस्थियां वहां जा रहे लोगों के पैरों में आ रही हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि सरकार इन सभी अस्थियों को हरिद्वार तक पहंुचाए जिसके बाद तीर्थ पुरोहित सभा उन अस्थियों को सनातन संस्कार विधि से गंगा में प्रवाहित करंेगे। क्योंकि ऐसा न होना इन श्रद्धालुओं की मौत के साथ घिनौना खिलवाड़ है और भविष्य में इसके दुःखद परिणाम भी सामने आ सकते हैं और वहां ऐसी घटनाओं की पुनवृर्ति भी होती रहेगी। अखिलभारतीय युवा पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सीधा आरोप लगाया कि केदारधाम में श्रद्धालुओं के शवों को कूड़ें की तरह जलाया गया है जिसके चलते आने वाले समय में इसके घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।