गुरुवार, 8 अगस्त 2013

डीजीसीए के पत्र से प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग में खलबली

डीजीसीए के पत्र से प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग में खलबली
राजेन्द्र जोशी
देहरादून  । उत्तराखण्ड में आई प्राकृतिक आपदा में निजी कंपनियों के हैलीकाप्टर को लगाए जाने को लेकर भारत सरकार के महानिदेशक नागरिक उड्डयन विभाग ने प्रदेश सरकार ने रिपोर्ट तलब की है कि उसने कितने हैलीकाप्टर आपदा राहत कार्या में लगाए और उन्होंने कितनी उड़ाने भरी और इसमें कितना तेल खर्च हुआ। महानिदेशक के पत्र के बाद प्रदेश सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग में खलबली मची हुई है, क्यांेकि एक जानकारी के अनुसार आपदा प्रभावितों और जागरूक नागरिकों ने महानिदेशक नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) को इस बात की शिकायत की है कि प्रदेश में निजी हैलीकाप्टरों के आपदा काल के दौरान अधिग्रहण किए जाने में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये हैलीकाप्टर गुप्तकाशी, फाटा, गौचर और जौलीग्रांट सहित सहस्त्रधारा हैलीपैड़ पर तैनात किए गए थे। सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि नागरिक उड्डयन विभाग को दी गई सूचना के मुताबिक प्रदेश सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग ने आपदा प्रभावित क्षेत्र में एक हैलीकाप्टर द्वारा 17 से 19 उड़ाने दस्तावेजों में दिखाई है, जबकि वास्तव में इन उड़ानों की संख्या सात से उपर नहीं हो सकती थी, ऐसा उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है। उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि केदारघाटी इतनी संकरी घाटी है कि वहां तीन हैलीकाप्टर से एक साथ उड़ान नहीं भर सकते हैं, ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा भारत सरकार के नागरिक उड्डयन महानिदेशक को दी गई जानकारी खुद नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों के गले नहीं उतर रही है। वहीं इसमें एक पेंच और फंस गया है कि प्रदेश सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा हैलीकाप्टर में प्रयोग होने वाला ईंधन की आपूर्ति प्रदेश में उतनी हुई ही नहीं, जितनी की दस्तावेजों में प्रदर्शित की गई है। एक जानकारी के अनुसार 23 जून के बाद ही प्रदेश के कुछ स्थानों तक हैलीकाप्टर में प्रयोग होने वाला ईंधन हैलीकाप्टरों के बेस स्टेशन तक पहुंच पाया था, ऐसे में डीजीसीए के गले यह बात भी नहीं उतर रही है कि प्रदेश सरकार द्वारा खपत में बताया गया ईंधन और वास्तविक ईंधन की खपतमें बड़ा गोलमाल है। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा यह ऐलान किया गया था कि उसने निजी कंपनियों के हैलीकाप्टरों को अधिग्रहित कर लिया था, जिसका भुगतान राज्य सरकार को करना था। ऐसे में यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि जब राज्य सरकार द्वारा निजी कंपनियों के हैलीकाप्टरों को अधिग्रहित कर लिया गया था, तो निजी कंपनियों के हैलीकाप्टर प्रचालन कंपनियों ने यात्रियों से कैसे किराए की वसूली की, क्योंकि हर्षिल, फाटा और जोशीमठ से निकाले गए कई यात्रियों ने इस बात की शिकायत मीड़िया से की कि, जो हैलीकाप्टर उन्हें रेस्क्यू करने जौलीग्रांट अथवा सहस्त्रधारा हैलीपैड़ लाए हैं, उनमें से अधिकांश हैलीकाप्टरों ने उनसे तीन लाख से लेकर 18 लाख तक की वसूली की है। आपदा काल में फंसे यात्रियों द्वारा इस तरह की तमाम शिकायतों को लेकर डीजीसीए सक्रिय हुआ है और उसने प्रदेश सरकार ने आपदा काल के दौरान प्रयुक्त किए गए हैलीकाप्टर पर रिपोर्ट तलब की है, डीजीसीए के इस पत्र के बाद प्रदेश सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है।