गुरुवार, 12 सितंबर 2013

आखिर क्या छिपाया जा रहा था केदारधाम में!

आखिर क्या छिपाया जा रहा था केदारधाम में!

केदारधाम के हलात कमोबेश आज भी आपदा के बाद जैसे!

राजेन्द्र जोशी
देहरादून, 12 सितम्बर। इंजीनियर्स प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेट (ईपीआईएल) और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउण्टेनियरिंग (एनआईएम) के भरोसे बीते दिन प्रदेश सरकार की केदारनाथ में बीते 86 दिन से होने वाली पूजा सम्पन्न कराई गई, लेकिन वहां ऐसा कुछ भी था जिसे वहां पहुंचे लोगों से छिपाया जा रहा था। शासन-प्रशासन ने फिनाईल और ब्लीचिंग पाउडर छिड़क कर केदारधाम को पूजा के समय के लिए सांस लेने के काबिल तो बना दिया, लेकिन मंदिर से थोड़ी दूरी पर उठ रखी बदबू आज भी केदारधाम के हालातों को बयां करने के लिए काफी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस हाल में केदारनाथ धाम 17 जून को था, कमोबेश आज भी केदारधाम के वही हालात हैं। हलके हे हवा के झोंके के साथ उठने वाली बदबू आज भी यह बयां कर रही है कि केदारपुरी में हजारों लोग व पशु दफन हुए होंगे। जिला प्रशासन ने मंदिर और आस-पास के क्षेत्रों को कनात लगाकर नजर से दूर तो कर दिया, लेकिन वहां के हालात 16-17 जून को आए भीषण तबाही की कहानी खुद ही बयां कर रहे थे। मंदिर के आस-पास जहां 16-17 जून से पहले घनी बस्ती हुआ करती थी, जिसमें स्थानीय लोगों की चाय और खाने के होटल बने थे, वे सब नज़ाने कहां गुम हो गए। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने फैब्रिकेटिड कुटियाओं को स्थापित करने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन बीते दिन केदारनाथ में रूकने वाले मंत्री और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए एनआईएम के टैंट ही काम आए। गिने-चुने लोग तीर्थ पुरोहितों के सुरक्षित बची धर्मशालाओं और लॉज में रूके।
    जहंा तक केदारनाथ मंदिर में पूजा की बात है, तो प्रदेश सरकार की घोषणा से स्थानीय लोगों के हाथ निराशा ही लगी, क्योंकि इस पूजा में जितने भी लोग केदारधाम पहुंचे, वे सब हैलीकाप्टर से ढोऐ गए थे, जबकि बीते दिन ही भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक की पैदल केदारनाथ कूच की घोषणा ने भले ही उसे लोग राजनैतिक रंग दे, ने स्थानीय लोगों के चेहरों पर खुशी जरूर लौटा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार गुप्तकाशी से आगे जाने वालों को इस तरह रोक रही थी, जैसे कि वे पाकिस्तान जाने के लिए बाघा बॉर्डर पार कर रहे हों। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक को प्रदेश सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उनको मिलने वाले प्रोटोकोल से भी दूर रखा, उन्हें मात्र एक सिपाही सेटेलाईट फोन के साथ दिया गया।
    सरकार की 11 सितम्बर की पूजा को लेकर राजनैतिक जानकारों का कहना है कि सरकार ने यह प्रदर्शित करने की कोशिश की कि केदारनाथ में सबकुछ सामान्य हो गया है और वह केंद्र पर अब राहत राशि को अवमुक्त कराने के लिए दबाव बनाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूजा कराकर यह संदेश भी देने का कुत्सित प्रयास किया है कि वह संवेदनशील है और प्रभावित क्षेत्र में काम कर रही है। कुल मिलाकर केदारनाथ के हालात आज भी जस के तस हैं, स्थानीय प्रभावित लोग आज भी टैंटों में अपने दिन गुजारने को मजबूर हैं और स्थानीय बच्चे शिक्षा से भी वंचित। प्रभुद्ध लोगों का कहना है कि क्या ही अच्छा होता, प्रदेश सरकार पूजा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की चिंता भी करती, ताकि उनका जीवन भी पटरी पर लौटता, लेकिन सरकार ने झूठी लोकप्रियता पाने के लिए केदारधाम में पूजा का नाटक रचा। प्रत्यक्षदर्शितों के अनुसार परम्परागत तरीके से बीतीे कई सदियों से केदारधाम में पूजा की थाली चांदी की हुआ करती थी, लेकिन बीते दिन सामान्य थाली में पूजा कर सरकार ने लोगों की भावनाओं की ठेस पहुंचाया है।