शनिवार, 19 अक्तूबर 2013

प्रदेश में नेतृत्व को लेकर राजनैतिक अस्थिरता के माहौल

राजेन्द्र जोशी
देहरादून  । उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चायें एक बार फिर से तेज हो गई हैं। सरकार के साथ और सरकार के विरोधी विधायक लगातार घटनाओं पर नजर रखे हुये हैं। दोनों ही गुट अपने-अपने दावे कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार के कामकाज को लेकर सर्वे भी कराया है। राज्य कांग्रेस के कई दिग्गज नेता इस बीच सक्रिय हो गये हैं और-अपने अपने पक्ष में लॉबिंग भी करने लगे हैं।
    उत्तरखंड कांग्रेस में एक बार फिर से गुटबाजी तेज होती हुई दिखाई दे रही है। दिल्ली में उत्तराखंड की राजनीति और सरकार का भविश्य तय करने की खबरें पिछले कई दिनों से चल रही है। खबर है कि आलाकमान उत्तरखंड में बहुगुणा सरकार की कार्यशैली और बेलगाम अफसरशाही से काफी नाराज है। यही वजह है कि बहुगुणा सरकार पर खतरा दिख रहा है। वहीं बदलते घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री के करीबी नरेन्द्र नगर विधायक सुबोध उनियाल का कहना है कि इस तरह की खबरेें लगातार आती रही हैं और जो लोग एसी खबरों को हवा दे रहे हैं उनको इस बार भी मुंह की खानी पड़ेगी।
    वहीं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि बहुगुणा के सहयोगी और विरोधी इससे पहले अपनी बात आलाकमान तक पंहुचाने के लिए एक गुट लेकर दिल्ली का दौरा कर चुके हैं। नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच विरोधी खेमा भी एसी खबरों के आते ही सक्रिय हो गया है। नेतृत्व परिवर्तन की खबरें आने के बाद उत्तराखंड के दिग्गज कांग्रेसी भी अपने अपने पक्ष में लॉबिंग करने में जुट गये हैं। इस बीच कांग्रेस पार्टी राज्य के हालात पर जनता का मूड़ भापने के लिए लगातार सर्वे करा रही है।
    उत्तराखंड में हो रहे कांग्रेस पार्टी के सर्वे के रिजल्ट ही बहुगुणा सरकार का भग्य तय नहीं करेंगें, इसके लिए दिल्ली दरबार से हरी झंडी मिलना भी बेहद जरूरी है। अब देखना ये होगा कि उत्तरखंड की राजनीति अगले कुछ दिन किस दिशा में चलती है। वहीं विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने आलाकमान के सामने यह दलील दी है कि उनको हटाए जाने के बाद निर्दलीय विधायकों द्वारा दिया जा रहा समर्थक कांग्रेस को नहीं मिलेगा। वहीं सूत्रों का यह भी दावा है कि बहुगुणा के करीबी सरकार बनाने में मददगार रहे उन निर्दलीय विधायकों जिनको मंत्री का दायित्व दिया गया है पर पैनी नजर रखे हुए हैं, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जिन निर्दलीय समर्थकों के दम पर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी भाजपा में सरकार द्वारा प्रदेश में सरकार बनाने के दावे के बाद वे निर्दलीय चार विधायक ही नहीं बल्कि कुछ अन्य विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।
    कुल मिलाकर प्रदेश में एक बार फिर राजनैतिक अस्थिरता के माहौल व्याप्त है। विधानसभा से लेकर सचिवालय तक सोमवार प्रातः कार्यालय खुलने से लेकर सांय तक प्रदेश में सरकार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था।