शनिवार, 19 अक्तूबर 2013

सियासी तूफान में CM की कुर्सी

देहरादून  :   बीते कई दिनों से प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाएं जोरों पर हैं। इन चर्चाओं से सियासी तूफान भी उठ खड़ा हुआ है।
बिना आग के धुआं नहीं उठता, इस बात को ध्यान में रखा जाए तो प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के पीछे कहीं न कहीं कोई बात जरूर है। मुख्यमंत्री विगत दिवस भी अचानक दिल्ली गए। बहाना इंटरनेशनल स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक का था।
मगर दूसरी तरफ प्रदेश के खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल देहरादून में ही नगर निगम की बैठक में व्यस्त है। जिन्हें असल में बैठक के लिए दिल्ली जाना चाहिए था।

हाईकमान की नाराजगी

इन दिनों चर्चाएं हैं कि प्रदेश में सीएम बदलने की कवायद चल रही है। हाईकमान की नाराजगी को इसके पीछे वजह बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ये नाराजगी प्रदेश में आई आपदा राहत कार्यों को लेकर भी है।
शायद यही वजह भी रही कि बीते दिनों मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा विधानसभा सत्र के बीच में ही अचानक दिल्ली रवाना हो गए। बताया गया कि दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दैवी आपदा और राहत कार्यों की रिपोर्ट दी।

स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक

संशय इस बात को लेकर भी है कि जब ये रिपोर्ट दो दिन बाद भी दी जा सकती थी, तो फिर अचानक ये कदम क्यों उठाया गया।
चर्चाओं को तब फिर हवा मिली जब एक पखवाड़े के दौरान बीते शुक्रवार भी सीएम का दिल्ली जाने का अचानक कार्यक्रम बना। हालांकि, रविवार को वहां पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक की भी बात सामने आई।
हजम नहीं हुआ, आपदा संबंधी बैठक में न जाना
पिछले दिनों प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आपदा संबंधित बैठक में मुख्यमंत्री का न जाना भी किसी को हजम नहीं हुआ। दिल्ली से जुड़े सूत्रों की माने तो ऐन वक्त पर सीएम को दिल्ली आने से मना कर दिया गया।
समर्थक विधायकों ने भी लगाई थी दिल्ली दौड़
कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री समर्थक आधा दर्जन विधायकों का दिल्ली में सरकार की पैरवी के लिए तीन दिन तक डेरा डाले रहना भी चर्चाओं में रहा। हद तो तब हुई जब इन्हें किसी बड़े नेता ने मिलने का समय तक नहीं दिया। वहीं, पिछले दिनों विधानसभा सत्र समाप्त होते ही केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और हरिद्वार सांसद हरीश रावत के समर्थक विधायक भी दिल्ली कूच कर गए थे।
...करना पड़ा सीएम के पक्ष में खड़े होने का ऐलान
सरकार को समर्थन दे रहे पीडीएफ (प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट) के विधायकों की बैठकों ने भी इस सियासी तूफान को हवा दी। इन विधायकों के बहुगुणा के पक्ष में खड़े होने के ऐलान ने तो साफ कर दिया कि कहीं कुछ ना कुछ बात तो है।