गुरुवार, 11 सितंबर 2014

राका का खनन का खेल,देखिये किस -किस से है उसका मेल

हरीश रावत जैसे जमीनी नेता पर कहीं उत्तराखंड का ‘’यदुरप्पा’’ का टैग न लग जाए

राजेन्द्र जोशी
राका’’ नए गेम को धरातल में क्रियान्वयन की तैयारी में है इस बार उसका गेम काफी बड़ा लगता है। राका ने प्रदेश के खनिज भंडारों को हथियाने की तैयारी पूरी कर ली है जिसमे उसके कुछ साथी जिनमे एक टी वी चैनल का पत्रकार तथा दूसरा हरियाणा का खनन माफिया जो अभी अभी भाजपा में शामिल चौधरी वीरेन्द्र सिंह का करीबी बताया जाता है तथा खनन विभाग का एक अधिकारी शामिल है। एक जानकारी के अनुसार इस उद्योग पति ने खनन विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर विगत एक वर्ष में प्रदेश के लगभग सारे खनिज क्षेत्रों की सूक्ष्म जानकारियाँ एकत्रित कर ली है। जिनमे जनपद वागेश्वर के क्षेत्र में 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के सोपस्टोन भंडार, चमोली जनपद के घाट इलाके के सोप स्टोन के भंडार, जनपद उत्तरकाशी के सिलिका सेंड भंडार जनपद अलमोड़ा के धातु भंडार तथा जनपद देहारादून,टिहरी के चूना पत्थर भंडार शामिल है। इस गुट ने प्रदेश् में जहां जहां भी जल विधयुत परियोजना निर्माणाधीन है वहाँ कंपनियों से दवाब बना कर उपखनिज की सप्लाई का ठेका लिया जा रहा है। विगत 2011 के बाद से प्रदेश के राजनेतिक स्थिति   डांवाड़ोल चल रही है पहले खंडुरी, फिर बहुगुणा और अब रावत जी आज गए कल गए की स्थिति है। इसी अवसर का लाभ उठा कर ‘’राका’’ अपना काम करता रहा है । उसने कुछ राजनैतिक लोगों व कुछ कथित पत्रकारों को भी साथ मिला रखा है जो गाहे –बगाहे उसके इर्द गिर्द घूमते रहते हैं और उसके काले धंधे में शामिल हैं ।
   “राका” ने अपनी इस गेम प्लान के अंतर्गत दो चार दिन पहले ही खनन विभाग में अधिकारियों की कुर्सिया उसी हिसाब से लगाने का हुक्म सुनाया है, अपने एक खासम खास अधिकारी को उसने दो वरिष्ठ अधिकारियों के विभाग में तैनात रहने के बावजूद स्वतंत्र प्रभार देकर कुछ इशारा दे दिया है। राज नीति में तो यह संभव है कि प्रधान मंत्री, किसी राज्य मंत्री को केबिनेट मंत्री के होते हुए भी उसे नज़र अंदाज कर सीधे प्रधान मंत्री को पत्रावली प्रस्तुत करने का आदेश जारी कर सकता है। किन्तु सरकारी व्यवस्था में यह संभव नहीं है कि दो दो जाइंट डाइरेक्टर के मौजूद होने के बावजूद भी एक उप निदेशक स्तर के अधिकारी को स्वतंत्र प्रभार दिया जाय।
     चर्चा तो यहाँ तक है ‘’राका’’ ने खनन विभाग के पर्वतीय अधिकारियों को दरकिनार कर अन्यत्र के अधिकारियों को राज्य के 9 जिलों का काम दे दिया है, सुनील पंवार, राजपाल लेघा व एस एल पेट्रिक पर मेहरबान ‘’राका’’ के ख़ास इन अधिकारियों के खनन माफियाओं से रिश्ते किसी से छिपे भी नहीं हैं यही कारण है कि एक बार तो ‘’राका’’ ने इनसे सीनियर अधिकारी को इनसे जूनियर बना डाला उसको उसके अधिकार तब मिले जब वाह ‘’राका’’ के निर्णय के खिलाफ न्यायालय से आदेश करा लाया . जानकारी तो यहाँ तक आई है कि इन्ही अधिकारियों के जरिये राज्य में ‘’राका’’ का खनन का खेल चल रहा है. वहीँ सुनने में तो यह भी आया है कि पहले तो राका ने खनन विभाग में अलग से खनन सेग्मेंट बना कर इन्ही मुंह लगे अधिकारियों के सहारे पूरे प्रदेश का खनन प्रशासन चलवाया और अब राज्य के मालदार जिलों का काम भी इनको दे दिया,
    प्रदेश में चल रहे खनन के इस खेल में स्थानीय अधिकारियों को किनारे कर अपने मुंह लगे अधिकारियों को आगे कर ‘’राका’’ का खेल चल रहा है । जहाँ हमारे राज नेता तो अपनी कुर्सी बचाने में ही व्यस्त हैं वहीँ ‘’राका’’ अपना खेल खेलने में व्यस्त है। प्रदेश के बुद्धिजीवियों का कहना है कि समय रहते यदि इस षड्यंत्र का भंडाफोड़ कर इन सब को तितर बितर नहीं किया गया। तो प्रदेश के सारे खनिज भंडारों पर राका की किसी कंपनी का कब्जा हो जाएगा उसके करीबी कुछ राजनेताओं को चवन्नी अठन्नी तो मिल जाएगी लेकिन राज्य वासियों के हाथ बाबा जी का ठुल्लू ही लगेगा । वही यदि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तत्काल इस नेक्सेस को नहीं तोडा तो हरीश रावत जैसा जमीनी नेता पर कहीं उत्तराखंड का ‘’यदुरप्पा’’ का टैग न लग जाए.