शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

उत्तराखंड की चिकित्सा व शिक्षा व्यवस्था बदहाल : एक रिपोर्ट


मंत्री व अधिकारी सरकारी धन की लूट खसोट में व्यस्त 

राजेन्द्र जोशी 
देहरादून : उत्तराखंड के काबिना मंत्री यदि यह सोच रहे हैं कि उनके कृत्यों को कोई नही देख रहा है तो वे यह गलफहमी न पालें. मुख्यमंत्री सहित केंद्र सरकार की निगाहों में उनका वह सब कला चिट्ठा दर्ज हो रहा है जिस पर वे पर्दा पड़ा समझ रहे हैं. मुख्यमंत्री हरीश रावत की मज़बूरी चाहे जो भी या उनके आँखों में शर्म हो वे इसलिए नही कह पा रहे है लेकिन केंद्र सरकार के दो बड़े अधिकारियों ने बीते दिनों गुप-चुप तरीके से राज्य के मंत्रियों के कृत्यों का काला चिट्ठा जो तैयार किया है वह बहुत ही चौंकाने वाला है, इन अधिकारियों में एक ने गढ़वाल इलाके का दौरा कर आम जनता से बात कर राज्य के मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है तो दुसरे ने कुमायूं इलाके के मंत्रियों का. रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों ही विभागों के मंत्रियों का विभाग पर नियंत्रण नहीं है. 
हमारे हाथ लगी रिपोर्ट के अनुसार केंद्र के इन दोनों अधिकारियों ने राज्य सरकार तक को कठघरे में खड़ा किया है कि उसका राज्य के मंत्रियों पर कोई नियंत्रण नहीं है. दोनों अधिकारियों ने राज्य की चिकित्सा व शिक्षा व्यवस्था पर जमकर टिपण्णी की है और यहाँ तक कहा है दोनों विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है और चिकित्सा विभाग में तो सरकारी धन की लूट -खसोट की जा रही है. पर्वतीय इलाकों में न तो डॉक्टर है और न अस्पतालों में दवाएं ही और न स्टाफ, वहीँ शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षा का इतना बुरा हाल आज़ादी के बाद से अब तक का रिकॉर्ड है , स्कूलों में जहाँ छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी है तो कहीं बिना छात्रों के विद्यालयों में कई अध्यापक यह स्थिति पर्वतीय इलाकों की है. पर्वतीय इलाकों के सुदूरवर्ती स्कूलों में तो कोई देखने ही नही जाता कि वहां अध्यापक जाते भी हैं या नहीं. 
चिकित्सा विभाग में भी कमोवेश यही हाल है पर्वतीय इलाकों में अधिकांश अस्पतालों में डॉक्टर हैं ही नहीं. जनता द्वारा बताया गया कि पहले डॉक्टर नही होता था तो अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्ट ही दवा दे दिया करता था और यदि वह भी छुट्टी चला जाता था तो वार्डबॉय ही उनका इलाज कर देता था लेकिन पिछले दो वर्षों से तो वहां भी ताले पड़ गए हैं लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. ठीक इसी तरह की टिपण्णी कुमायूं इलाके गए अधिकारी ने वहां के अस्पतालों पर की है. 
दोनों अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का उत्तराखंड में बहुत बुरा हाल है. चाहे शिक्षा विभाग हो या चिकित्सा विभाग दोनों की विभागों में केंद्र द्वारा वित्तपोषित योजनाओं में भरी गड़बड़ी की जा रही है फर्जी आंकड़ों के सहारे योजनाओं का पैसा ठिकाने लगाया जा रहा है. वह चाहे सर्व शिक्षा अभियान हो अथवा एनआरएचएम द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ ग्रामीण इलाके की जनता को नही मिला पा रहा है. विभाग व ठेकेदार इस पैसे को आपस में ही बाँट रहे हैं. 
अंत में इस रिपोर्ट में कहा गया है यदि राज्य सरकार ने इन दोनों विभागों पर कठोर नियंत्रण नहीं लगाया तो स्थिति और भी भयावह हो जाएगी और पर्वतीय इलाके के लोग चिकित्सा व शिक्षा को लेकर सड़कों पर उतर आयेंगे.