बुधवार, 31 अक्तूबर 2012

हरक का हवाई दौरा बना विवादित

हरक का हवाई दौरा बना विवादित
राजेन्द्र जोशी
देहरादून । कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के एक विवाह समारोह मंे हैलीकाप्टर लेकर जाना विवाद का विषय बन गया है। प्रदेश के भाजपा नेता रविन्द्र जुगरान ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि मंत्री की फीजूल खर्ची कांग्रेस के वित्तीय कुशासन को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि मंत्री को नियमों के खिलाफ सरकारी हैलीकाप्टर ले जाने की इजाज़त किसने दी, इसका पैसा मंत्री से वसूल किया जाना चाहिए।
कांग्रेस के तेजतरार नेता हरक सिंह रावत के अगस्तमुनी भाजपा कार्यकर्ता बीर सिंह की पुत्री की शादी में सरकारी हैलीकाप्टर से जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। गौरतलब हो कि भाजपा नेता बीर सिंह की पत्नी विमला रावत जो जिला पंचायत रूद्रप्रयाग की सदस्य भी हैं ने बीते विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री मातबर सिंह कण्डारी द्वारा उनके परिवार को प्रताड़ना से आजीज आकर भाजपा छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। एक जानकारी के अनुसार मातबर सिंह कण्डारी उनसे व्यक्तिगत द्वेष रखने लगे थे और उनके परिवार को लगातार भाजपा शासनकाल में ही परेशान किया जाने लगा था। यही कारण है कि उनकी जिला पंचायत सदस्य पत्नी विमला रावत ने एन विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का दामन थाम किया था, हालांकि अभी लोकसभा उपचुनाव के दौरान ही मातबर सिंह कण्डारी ने भी कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। राजनैतिक हलकों में करोड़ों रूपयों के ऋण के बोझ तले दबे उत्तराखण्ड राज्य के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की फीजूल खर्ची को लेकर चर्चाएं गर्म हैं कि जनता की गाढ़ी कमाई को प्रदेश के मंत्री उड़ाने में अपने स्तर से कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि हरक सिंह रावत को यदि कार्यक्रम में शिरकत करना ही था तो वे एक दिन पहले अगस्तमुनी पहुंचकर कार्यक्रम में शिरकत कर सकते थे, लेकिन सवाल यह उठता है कि निजी कार्यक्रम में शामिल होने पर मंत्री द्वारा सरकारी धन का दुरूपयोग क्यों किया गया और मंत्री की इस हवाई यात्रा से वहां की जनता को क्या मिला और उसका खामियाजा किसको भुगतना पड़ेगा। मामले में भाजपा नेता व उत्तराखण्ड आंदोलनकारी संगठन के नेता रविन्द्र जुगरान ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आम आदमी टैक्स देता है तो वह राजकोष में जाता है, जिससे प्रदेश की विकास योजनाएं बनती हैं। उन्होंने कहा अगर सरकार के मंत्री फीजूल खर्ची करते हैं तो इस कर्ज में डूबे प्रदेश का क्या होगा। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर को कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत एक विवाद कार्यक्रम में रूद्रप्रयाग जिले के अगस्तमुनी में सरकारी हैलीकाप्टर से गए, जिससे सरकारी धन की बर्बादी हुई। उन्होंने इस खर्च की धनराशि को मंत्री से वसूले जाने की मांग भी की।
राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तराखण्ड का गठन पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए किया गया था, लेकिन मंत्रियों के चाल-चलन से यह नहीं लगता कि उन्हें इस प्रदेश से कोई लेना देना है। दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, राज्य के कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां सरकारी योजनाएं जाना तो दूर उसकी परछाई भी नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में नेताओं को प्रदेश के विकास और आम जन के विकास के लिए हर संभव सुविधाएं जुटाए जाने का प्रयास करना चाहिए, न कि सरकारी धन को अपने निजी खर्च के प्रयोग मंे लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे लोगों में निराशा का भाव पैदा होता है, क्योंकि प्रदेश के विकास के लिए जनता ने नेताओं को सत्ता सौंपी है, लेकिन नेता जनता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।