शुक्रवार, 24 मई 2019

मोदी अब वाकई बने प्रधानमंत्री

मोदी अब वाकई बने प्रधानमंत्री: यह चुनाव अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली की नकल पर हुआ डॉ. वेदप्रताप वैदिक मुझसे देश-विदेश के टीवी चैनलों और विपक्षी नेताओं ने आज पूछा कि मोदी की इस प्रचंड विजय का रहस्य क्या है ? आप उसकी व्याख्या कैसे करते हैं? मेरा पहला उत्तर तो यह है कि भारत का विपक्ष बिना दूल्हे की बारात […]

त्रिवेन्द्र ने अब तक मिथक को तोड़ उत्तराखंड में रचा नया इतिहास

त्रिवेन्द्र ने अब तक मिथक को तोड़ उत्तराखंड में रचा नया इतिहास: त्रिवेंद्र ने प्रतिद्वंदियों के सामने खींच डाली एक बड़ी लकीर   वोट शेयर रिकॉर्ड :भाजपा का वोट शेयर पहुंचा 60 फीसदी पार  मोदी के जादू और त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कार्यों  पर लगी मुहर राजेन्द्र जोशी  देहरादून  : उत्तराखंड में एक मिथक था, यहां जिस दल की सरकार प्रदेश की सत्ता में काबिज होती रही थी परिणाम […]

उत्तराखंड में भाजपा को मिला पूरा जनादेश

उत्तराखंड में भाजपा को मिला पूरा जनादेश: भाजपा में खुशी तो कांग्रेस में ग़म देवभूमि मीडिया ब्यूरो देहरादून  :देवभूमि उत्तराखंड ने एक बार फिर ”मोदी मैजिक” देखने को मिला है यहाँ के जनादेश ने लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय सुर में सुर मिलाते हुए भाजपा ने एक बार फिर से राज्य की पांचों लोक सभा सीटों पर अपना परचम फहराया है। हरिद्वार में […]

बद इरादे बद नियत से कोई काम नहीं करूंगा : मोदी

बद इरादे बद नियत से कोई काम नहीं करूंगा : मोदी: मैं मेरे लिए कुछ नहीं करूंगा  : मोदी  मेरे समय का पल- पल शरीर का कण- कण देशवासियों के लिए  देवभूमि मीडिया ब्यूरो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा चुनाव में प्रचंड जीत मिलने के बाद बीजेपी दफ्तर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि  वे बद इरादे बद नियत से कोई काम नहीं […]

बुधवार, 22 मई 2019

वर्ल्ड कप क्रिकेट खेलों का काउंटडाउन शुरू, दुनिया को इंतज़ार

वर्ल्ड कप क्रिकेट खेलों का काउंटडाउन शुरू, दुनिया को इंतज़ार: 30 मई को लन्दन के ओवल खेला जाएगा उद्घाटन मुकाबला हर किसी क्रिकेट प्रेमी की आँखे होंगी 22 गज की क्रिकेट पिच पर देवभूमि मीडिया खेल डेस्क देहरादून  :  12वें आईसीसी क्रिकेट विश्व कप की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 30 मई से शुरू होने जा रहे  इस खेल का दुनिया भर के क्रिकेटप्रेमी […]

मंगलवार, 21 मई 2019

छात्रवृत्ति घोटाले में अब तक 13 की गिरफ्तारी अब किसकी बारी ?

छात्रवृत्ति घोटाले में अब तक 13 की गिरफ्तारी अब किसकी बारी ?: देहरादून के कॉलेज संचालकों की धड़कने बढ़नी हुई शुरू कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरफ्तारी की लटकी तलवार ! देवभूमि मीडिया ब्यूरो देहरादून  : बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में रुड़की, हरिद्वार में कई गिरफ्तारियों के बाद अब देहरादून के कॉलेज संचालकों की धड़कने बढ़नी शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, देहरादून के  कॉलेज मालिकों की […]

शनिवार, 18 मई 2019

प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे केदारनाथ मंदिर और की 17 मिनट तक पूजा अर्चना

प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे केदारनाथ मंदिर और की 17 मिनट तक पूजा अर्चना: राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया जॉली ग्रांट में स्वागत   केदार धाम को चढ़ाया एक कुंतल का घंटा और बाघम्बर केदार के पुनर्निर्माण कार्यों का लिया बारीकी से जायजा करेंगे तांत्रिक अनुष्ठान और सुबह के पहले पहर की विशेष पूजा! देवभूमि मीडिया ब्यूरो देहरादून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गढ़वाली पोशाक और सिर पर हिमाचली टोपी […]

श्री बदरीनाथ धाम की आरती को लेकर जानिए क्या हुआ नया खुलासा…..

श्री बदरीनाथ धाम की आरती को लेकर जानिए क्या हुआ नया खुलासा…..
  • बदरीनाथ धाम की आरती को लेकर जानिए क्या हुआ नया खुलासा.....
  • कार्बन डेटिंग से स्पष्ट हुआ श्री बद्रीनाथ जी की आरती कब लिखी गयी 
  • स्व. धन सिंह बर्तवाल ने संवत 1938 (सन 1881) में लिखी यह आरती 
  • नंदप्रयाग के बदरुद्दीन के परिजन नहीं दे पाए पाण्डुलिपि का कोई प्रमाण
  • सीएम को भेंट की बर्तवाल के परिजनों ने आरती की पांडुलिपि

राजेन्द्र जोशी 
देहरादून : करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक बदरीनाथ धाम की आरती को लेकर नया खुलासा हुआ है। कार्बन डेटिंग से स्पष्ट हो गया है कि श्री बद्रीनाथ जी की आरती स्व. धन सिंह बर्तवाल द्वारा संवत 1938 (सन 1881) में लिखित है। बर्तवाल जी के परिजनों ने बद्रीनाथ जी की आरती की उस पांडुलिपि को शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भेंट की जिसकी कार्बन डेटिंग हुई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि धन सिंह जी के परिवार ने हमारी प्राचीन सभ्यता को संजोकर रखने का सराहनीय प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग होने से यह स्पष्ट हो गया है कि श्री बदरीनाथ जी की आरती स्व. धन सिंह बर्तवाल ने लिखी है। इस पांडुलिपि को संजोकर रखा जाएगा।
गौरलतब हो कि करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक बदरीनाथ धाम की आरती के रचियता के लेकर कोई स्पष्ठ प्रमाण किसी के पास नहीं था कोई इसे नंदप्रयाग के बदरुद्दीन को इसका रचियता बताता था लेकिन कोई इसका स्पष्ठ प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाया था। वहीं इसी बीच पिछले साल रुद्रप्रयाग जिले के पोखरी मार्ग पर स्थित संतेरा स्यूपुरी पट्टी के विजराणा निवासी महेंद्र बर्तवाल ने अपने परदादा स्व. धन सिंह बर्तवाल का दावा पेश करते हुए कहा था कि श्री बदरीनाथ में प्रातः और सायंकालीन आरती के दौरान जिस आरती का गायन किया जाता है वह उनके पर दादा स्व.महेंद्र बर्तवाल की रचना है।  धन सिंह बर्तवाल के परपोते महेंद्र बर्तवाल ने बताया कि उनके गांव स्युपुरी सतेरा में उनके घर में पांडुलिपि एक रिंगाल की कंडी में मिली थी । उन्होंने इसकी पांडुलिपि की प्रति भी पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर को भेजी थी।
इसी दौरान इस रचना की पांडुलिपि की प्रतिलिपि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट को भी दी गयी थी। यूसैक के निदेशक एमपीएस बिष्ट ने कहा कि पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग कराई गई है। पाण्डुलिपि पर पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने इसकी कार्बन डेटिंग कराए जाने की बात भी कही थी।  लेकिन पाण्डुलिपि के सामने आने से पूर्व अब तक यह माना जाता रहा है कि बदरीनाथ धाम में जिस आरती का पाठ किया जाता है, उसकी रचना चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी बदरूद्दीन ने करीब 150 साल पहले की।
श्री बद्रीनाथ में पठित आरती  के अंश कुछ इस तरह हैं.......
'पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम् ।
निकट गंगा बहत निर्मल बदरीनाथ विश्वंभरम, श्री बदरीनाथ विश्वंभरम ।।
शेष सुमरिन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम
वेद ब्रहमा करत स्तुति श्री बदरीनाथ विश्वंभरम, श्री बदरीनाथ विश्वंभरम।।
वहीं दूसरी तरफ धन सिंह बर्तवाल की आरती की पांडुलिपि भी लगभग उतनी ही पुरानी बताई जा रही थी । यह आरती 11 पदों की है, जो कि वर्तमान में प्रचलित आरती से चार पद अधिक है। हालांकि आरती में समानता है, लेकिन संयोजन में अंतर नजर था। लेकिन नंदप्रयाग निवासी बदरूद्दीन की कहीं पाण्डुलिपि नहीं मिल पायी है। लेकिन अब कार्बन डेटिंग से स्पष्ट हो गया है कि श्री बद्रीनाथ जी की आरती स्व. धन सिंह बर्तवाल द्वारा संवत 1938 (सन 1881) में लिखित है। इससे पूर्व बर्तवाल के परिजनों ने बद्रीनाथ जी की आरती की मूल पांडुलिपि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भेंट की जिसकी कार्बन डेटिंग हुई है।

मंगलवार, 14 मई 2019

आग में धू -धू कर जल रहे हैं प्रदेश के जंगल, प्रमुख वन संरक्षक चले विदेश यात्रा!

आग में धू -धू कर जल रहे हैं प्रदेश के जंगल, प्रमुख वन संरक्षक चले विदेश यात्रा!: शासन तय करता है छुट्टी पर जाने पर किसके पास हो चार्ज  खुद ही तय कर दिया किसको चार्ज देकर जाएंगे विदेश यात्रा  शासन तक को सूचित नहीं किया कि एचओडी हैं विदेश यात्रा पर  राजेन्द्र जोशी  देहरादून : उत्तराखंड के बारे में देशभर में एक कहावत चर्चित है कि यहां की अफसरशाही सरकारों के […]

सोमवार, 13 मई 2019

आश्चर्यजनक है परियों का रहस्यमय देश खैट पर्वत!

आश्चर्यजनक है परियों का रहस्यमय देश खैट पर्वत!: पहाड़वासी वनदेवियों को समय-समय पर करते हैं  पूजा  खैट खाल मंदिर है रहस्यमयी शक्तियों का केंद्र! देवभूमि मीडिया ब्यूरो खैट पर्वत वनदेवियों, अप्सराओं का प्रमुख निवास स्थल है। देवलोक से भू-लोक तक रमण करने वाली ये परियां हिमालय क्षेत्र में वनदेवियों के रूप में जानी जाती हैं। गढ़वाल क्षेत्र में वनदेवियों को आछरी-मांतरी के नाम […]

शुक्रवार, 10 मई 2019

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के ड्रीम प्रोजेक्ट पर कुंडली मारते सूबे के ब्यूरोक्रेट्स!



  • सूबे की ब्यूरोक्रेसी नहीं चाहती गढ़वाल-कुमायूं की दूरी हो कम  
  • अपर मुख्य सचिव बने मुख्यमंत्री के आस्तीन के सांप!
  • लालढांग -चिल्लरखाल- कंडी -रामनगर मोटर मार्ग का मामला 
  • सूबे की ब्यूरोक्रेसी नहीं चाहती गढ़वाल-कुमायूं की दूरी हो कम ? 
  • एक तरफ PWD से रुकवाया काम दूसरी तरफ मंत्री को भेजा पत्र!
  • अपर मुख्य सचिव के कैबिनेट मंत्री को सीधे पत्र लिखने पर उठे सवाल!






राजेन्द्र जोशी 

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट लालढांग-कंडी -रामनगर मोटरमार्ग को मुख्यमंत्री के अपर मुख्यसचिव पलीता लगाने पर ही नहीं जुटे हुए हैं बल्कि यदि यह कहा जाय कि वे आस्तीन के सांप बन चुके हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इतना ही नहीं आज़ाद भारत के इतिहास में शायद ही यह पहला मामला होगा जब किसी प्रदेश के एक अपर मुख्य सचिव ने किसी कैबिनेट मंत्री को सीधे पत्र लिखकर कार्रवाही करने के निर्देश देने को लिखा हो । जबकि ऐसे मामलों में ब्यूरोक्रेसी द्वारा मंत्री के निजी सचिव को संबोधित पत्र भेजा जाता रहा है ताकि वह मंत्री के संज्ञान में मामला ला सके ।
मामला लालढांग -चिल्लरखाल- कंडी -रामनगर मोटर मार्ग का है । यह सड़क पहले वन विभाग के अधीन थी और प्रदेश में भाजपा की सरकार के सत्तारूढ़ होते ही वर्ष 2017 में यह सड़क मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था तभी तो त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने  मुख्यमंत्री की कुर्सी सँभालते ही पहले कैबिनेट बैठक में इस सड़क को जो गढ़वाल और कुमायूं मंडलों को जोड़ने और देहरादून से रामनगर की दूरी लगभग 80 किलोमीटर कम करने को अपनी प्राथमिकता में रखते हुए इस सड़क को महत्वपूर्ण मानते हुए सड़क पर जल्दी कार्य करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में यह सड़क वन विभाग से लोकनिर्माण विभाग को हस्तांतरित भी की जा चुकी थी और लोकनिर्माण विभाग ने सड़क के सुदृढ़ीकरण को लेकर मार्ग में पड़ने वाले तीन पुलों के निर्माण सहित सड़क ने टेंडर भी आमंत्रित कर दिए थे।
लेकिन लोकनिर्माण विभाग द्वारा कार्य शुरू करवाने के बाद वन विभाग ने दिल्ली के कुछ स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा सड़क के राजाजी पार्क में होने के चलते पर्यावरणीय आपत्तियां लगायी थी जिसके बाद वन विभाग के प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी ने इस सड़क के लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित हो जाने के बाद भी आपत्ति लगाते हुए एक पत्र मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ)जयराज को संदर्भित कर दिया था। जिसपर पीसीसीएफ ने भी वन विभाग की सड़क को हस्तांतरित किये जाने के बाद सड़क पर आपत्ति लगाते हुए प्रमुख सचिव लोकनिर्माण विभाग व अपर मुख्य सचिव को यह पत्र भेज डाला।
वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अपर मुख्यसचिव ने भी सड़क के लोक निर्माण विभाग को हस्तांरित होने के बावजूद बिना पिछले आदेशों को देखते हुए लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों से इस सड़क पर किये जा रहे निर्माण कार्यों को रोकने के एक तरफ तो मौखिक आदेश देकर सड़क का निर्माण कार्य रुकवा डाला । इतना ही नहीं अपर मुख्य सचिव जो लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव भी हैं, ने वहीं दूसरी तरफ नियम विरुद्ध वन मंत्री को इस सड़क पर वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर स्पष्ठ निर्देश देने का अनुरोध भी कर डाला।
जबकि प्रोटोकाल के नियमों के अनुसार किसी भी सूबे का मुख्य सचिव तक किसी भी मंत्री को सीधे पत्र नहीं भेज सकता यदि उसे किसी मामले की जानकारी मंत्री के संज्ञान में लानी होती है अधिकारी मंत्री के निजी सचिव को पत्र संदर्भित करते हैं न कि सीधे ही किसी मंत्री को भेज सकते हैं। इस पत्र से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश की अफसरशाही मंत्रियों को कितना तवज्जो देती है या वे कितना प्रोटोकाल का ध्यान रखते हैं ।
मामले में अब हालात यह हैं कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट जिसे  वन मंत्री द्वारा पूर्ण करवाने का बीड़ा पिछले दो सालों से उठाया जा रहा है और जो सड़क गढ़वाल और कुमायूं की दूरी  लगभग 80 किलोमीटर कम कर रही है इस सड़क पर सूबे की अफसरशाही ही कुंडली मारकर बैठ गयी है।इससे साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के विकास कार्यों में यहाँ की ब्यूरोक्रेसी किस तरह रोड़े अटकती रही है यह तो एक उदाहरण मात्र है।