गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

कहीं जांच की आंच में हाथ झुलसने से तो नहीं डर रही सरकार!

कहीं जांच की आंच में हाथ झुलसने  से तो नहीं डर रही सरकार! 

मंत्री ने कहा, नामधारी के रिश्तों की हो सीबीआई 
जांच
रहस्य बना, जांच से पहले ही दे दी क्लीन चिट देना
राजेन्द्र जोशी।
देहरादून, 06 दिसम्बर। पोंटी चढ्ढा हत्याकाण्ड में उत्तराखण्ड के दो आईएएस अधिकारियों और तीन नेताओं के नाम आने के बाद कैबिनेट मंत्री द्वारा अपनी ही सरकार से नामधारी के रिश्तों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर पत्र लिखे जाने के बाद सरकार की चुप्पी पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस मामले में सीबीआई जांच करने की बात कही है। जानकारों का कहना है कि सरकार को खतरा है कि कहीं जांच की आंच में खुद उसके हाथ ही न झुलस जाएं, इसलिए सरकार इस मामले में जांच कराने से परहेज कर रही है।
    गौरतलब हो कि दिल्ली के छतरपुर में चढ्ढा बंधुओं की हत्या के मामले में हत्यारोपी सुखदेव सिंह नामधारी के राज्य के नौकरशाहों और नेताओं से संबंध उजागर करने को लेकर दिन-ब-दिन सरकार पर जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है। अभी तक जहां नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट इस मामले पर सरकार से जांच की मांग करते हुए बार-बार तीन नेताओं और दो अफसरशाहों के नामधारी से रिश्तों को लेकर उठ रही बातों पर सरकार से वकतव्य देने की मांग कर रहे थे, वहीं अब बहुगुणा सरकार में शामिल एक कैबिनेट मंत्री ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को पत्र लिखकर अधिकारियों और नेताओं के नामधारी से रिश्तों की सीबीआई जांच कराने की मांग ने सरकार की परेशानी को और बढ़ा दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते दिन बहुगुणा कैबिनेट में शामिल दो कैबिनेट मंत्रियों ने लगभग दो घण्टे तक चली मैराथन बैठक के बाद सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि नामधारी से नौकरशाह और नेताओं का खुलास करने के लिए सरकार को मामले की सीबीआई जांच करा दी जाए।
    जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार घटना के दिन से लेकर आज तक पूरे प्रकरण पर पर्दा डालती रही है, जबकि इस मामले में आए दिन खुलासे किए जा रहे हैं कि तीन नेताओं सहित दो अधिकारियों से नामधारी ने घटना वाले दिन घटना के बाद से पोंटी को अस्पताल पहुंचाए जाने तक टेलीफोन से वार्ता की है। जानकारों का कहना है कि सरकार की चुप्पी इस प्रकरण पर और भी संदेहजनक है कि वह इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रही है। जानकारों का कहना है कि कहीं ऐसा तो नहीं सरकार इस प्रकरण में जांच की आंच आने से डर रही है।
    वहीं गुरूवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अधिकारियों को क्लीन चिट देते हुए कहा कि पॉन्टी हत्याकंाड में राज्य का कोई भी अधिकारी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संलिप्त नहीं है और इस मामले की सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा राज्य के अधिकारियों को क्लीन चिट दिये जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब इस मामले की जांच दिल्ली की क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है तो मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने जांच से पहले ही इस मामले में अधिकारियों को क्लीन चिट कैसे दे दी है। कहीं जांच की आंच में मुख्यमंत्री के यह खतरा तो नहीं कि कहीं उनके हाथ भी इस जांच में झुलस सकते हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा जांच में किये गये खुलासे के अनुसार नामधारी ने वारदात के बाद घटनास्थल से राज्य के कुछ नेताओं और अधिकारियों से टेलीफोन पर वार्ता की थी। तभी से इस मामले में राज्य के कुछ अधिकारियों और नेताओं की संलिप्तता चर्चाओं में है। तीन नेताओं और दो अधिकारियों के नामों की चर्चाओं पर भाजपा की चुप्पी भी कम रहस्यमयी नजर नहीं आती। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमों मायावती के बाद बीते दिन कांग्रेस के मंत्री प्रीतम सिंह ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग सदन में उठाई थी जिसे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि इस मामलें में उन्होंने अपने स्तर पर जांच कर ली है। डीजीपी व अन्य अधिकारी भी इस मामले में छानबीन कर चुके है और राज्य के किसी भी अधिकारी की इस मामले में कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता नहीं है। इससे पूर्व भी मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर कहा था कि घटनास्थल दिल्ली है तथा दिल्ली पुलिस मामले की तहकीकत कर रही है इसलिए राज्य सरकार का इसमें
हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं उठता है। मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले में अधिकारियों को क्लीन चिट दिये जाने पर अब कई सवाल खड़े हो रहे है कांग्रेस के नेताओं द्वारा इस मामलें की सीबीआई जांच की मांग उठायी जा रही है। मुख्यमंत्री ने उसे तो नकार ही दिया है मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जांच के मध्य में अधिकारियों को क्लीन चिट दिया जाना दिल्ली की क्राइम ब्रांच की तहकीकत में लगी है कितना उचित है। जानकारों का कहना है कि यदि दिल्ली क्राईम ब्रांच अब नामधारी से संपर्क रखने वाले तीन नेताओं और दो अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लेती है तो ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा दी गई क्लीन चिट का क्या होगा।