शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

एमडीडीए आखिर बिना लाभ हानि का खेल किसके लिए रहा है खेल

एमडीडीए आखिर बिना लाभ हानि का खेल किसके लिए रहा है खेल
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। राजधानीवासियों को यह समझ नहीं आ रहा है कि घंटाघर से कृष्णापैलेस तक की इमारतों को ध्वस्त कर वहां बहुमंजिले शापिंग सेन्टर व आवासीय फ्लैट बनाने में जब फायदा नहीं है तो आखिरकार ये योजना किसके फायदे के लिए बनायी जा रही है? पुश्तों से दुकानदारी कर अपने परिवार का भरणपोषण कर इन लोगों को उजाड़ने की योजना से किसको फायदा होगा यह तो एमडीडीए कभी भी नहीं बताने वाला लेकिन सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे किसी राजनैतिक व्यक्ति का दिमाग काम कर रहा है जो अपने पुत्र सहित एक बिल्डर को इसका लाभ देना चाहता है।
 उल्लेखनीय है कि घंटाघर का बॉटल नेक खोले हुए अभी चंद समय भी नहीं हुआ कि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण महानगर योजना के तहत दिग्विजय सिनेमा से कृष्णा पैलेस तक की इमारतों को ध्वस्त कराकर उन पर छह मंजिला इमारतें बनाने के लिए दिल्ली-चंडीगढ़ के एक बड़े बिल्डर से रणनीति के तहत एक बड़ा खेल खेलने की तैयारी चल रही है। आशंका यहां तक उठ रही है कि इस पूरी डील में एक राजनेता का पुत्र भी शामिल है जोकि बिल्डर का मित्र बताया जा रहा है। इस पूरे खेल के पीछे यह रणनीति तैयार की जा रही है कि जमीन सरकारी होगी और उसका निर्माण बिल्डर करेगा तथा जिनकी कामर्शियल में दुकानें व संस्थान हैं उन्हें उसी आधार पर उसका कब्जा मिलेगा और जिनके मकान टूटेंगे उन्हें फ्लैट दिया जायेगा और बाकी के जो फ्लोर खाली रहेंगे उन पर बिल्डर का अधिकार होगा। इस डील में अरबों रुपए का खेल होने की आशंकाएं उठ रही हैं।
  विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने घंटाघर दिग्विजय सिनेमा से चकराता रोड में कृष्णा पैलेस के समीप तक की सारी इमारतें ध्वस्त कर महानगर योजना के तहत वहां छह मंजिला इमारत बनाने के लिए एक बड़ा खाका तैयार किया है। इस खाके पर एमडीडीए के उपाध्यक्ष तेजी के साथ काम करते हुए नजर आ रहे हैं। उनकी इस योजना के प्रति कितनी उत्सुकता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि पिछले चंद दिनों के भीतर कई बार एमडीडीए उपाध्यक्ष ने दिग्विजय इमारत में मौजूद सभी दुकानदारों से विभाग की योजना के बारे मंे सहमति देने का प्रयास किया और इतना ही नहीं उन्होने व्यापारियों व वहां रह रहे परिवारों सें कहा कि एमडीडीए दिग्विजय सिनेमा से कृष्णा पैलेस तक के पीछे की सारी इमारतें तोड़कर वहां छह मंजिला इमारतों के चार ब्लाक बनायेगी। नेता पुत्र की इस महत्वाकांक्षी योजना को छह से आठ महीने के रिकार्ड समय के भीतर पूरा कर लिया जायेगा। दिग्विजय इमारत के दुकानदारों को यह भी लालच दिया गया है कि जिसकी दुकान व संस्थान कॉमर्शियल में हैं उन्हें कॉमर्शियल में जगह दी जाएगी और जो दुकान व फ्लैट बनाए जाएंगे वह पीड़ित पक्ष को नो प्रॉफिट व नो लॉस पर दिये जाएंगे। यहां वर्षों से रह रहे कई परिवारों व दुकानदारों का साफ आरोप है कि एमडीडीए उपाध्यक्ष ने उन्हें इस योजना के प्रति यहां तक धमकाया कि अगर उन्होंने एमडीडीए को इमारत तोड़ने के लिए मना किया तो इस जमीन को अधिग्रहण कर लिया जायेगा।
वहीं दूसरी ओर इस महानगर योजना को लेकर कई दुकानदारों का आरोप है कि एमडीडीए महानगर योजना के तहत इस स्थान पर जो छह मंजिला इमारत बनाने की रणनीति तैयार कर रहा है उससे आखिरकार सरकार को कोई लाभ होने वाला तो है नहीं। चर्चा यहां तक है कि इस महायोजना को घंटाघर से कृष्णा पैलेस तक लागू कराने के लिए एक राजनेता का पुत्र पर्दे के पीछे रहकर बड़ा खेल खेल रहा है। यहां तक  चर्चा है कि नेता पुत्र का बिल्डर मित्र चंडीगढ़ व दिल्ली में बड़ा व्यवसाय करता है और इस बिल्डर को बड़ा लाभ दिलाने के लिए नेता पुत्र इस योजना के निर्माण का काम मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण से दिलाने के लिए पूरा खाका गोपनीय तरीके से तैयार किया जा चुका है। दिग्विजय सिनेमा के अंतर्गत मौजूद एक दुकानदार ने बताया कि एमडीडीए इस महानगर योजना को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए काफी उतावला हो रखा है। चूंकि दिग्विजय सिनेमा का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए एमडीडीए वहां के दुकानदारों व सिनेमा मालिक से यह सहमति लेने की कोशिश कर रहा है कि जब न्यायालय का फैसला किसी के पक्ष में आएगा तो उसका हिस्सा मिल जायेगा। लेकिन एमडीडीए के इस विचार से दुकानदार सहमत नहीं दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस जगह पर यह योजना लागू करनी है वहां डेढ़ से दो लाख रुपए गज जमीन का बाजार भाव है। ऐसे में अगर बिल्डर नो प्रॉफिट व नो लॉस पर पीड़ितों को दुकानें व मकान देता भी है तो भी लगभग चार फ्लोर बिल्डर के पास बच जाएंगे। ऐसे में उसे अरबों रुपए का फायदा होगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार किसी बिल्डर को लाभ दिलाने के लिए ऐसा खेल एमडीडीए क्यों खेलना चाह रहा है। यह अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। यह योजना अगर लागू हुई तो इस पूरे खेल में बिल्डर व राजनेता के पुत्र के खजाने में अरबों रुपया भर जायेगा जबकि सरकार को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है।