शनिवार, 4 मई 2013

एक करोड़ रूपया और आउट ऑफ टर्न पदोन्नति तक का लालच भी नहीं डिगा पाया अधिकारी का ईमान!

एक करोड़ रूपया और आउट ऑफ टर्न पदोन्नति तक का लालच भी नहीं डिगा पाया अधिकारी का ईमान!
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। राजधानी देहरादून की मेयर सीट कांग्रेस के लिए जी का जंजाल बनकर रह गई है। तमाम दांव पेंचों के बाद भी कांग्रेस भाजपा से इस प्रतिष्ठित सीट को हथियाने में कामयाब नहीं हो पाई। चर्चा तो यहां तक है कि मतदान के एक दिन पूर्व, जिले के एक अधिकारी को एक करोड़ रूपया और आउट ऑफ टर्न पदोन्नति तक का लालच दिया गया, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र के इस अधिकारी ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। यदि कांग्रेस की यह चाल कामयाब हो जाती तो, भाजपा प्रत्याशी विनोद चमोली को जीतने के बावजूद हारने को मजबूर होना पड़ता।
    राजधानी में स्थानी निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद यह चर्चा खासो आम है कि कांग्रेस ने अधिकारियों तक को खरीदने की पूरी कोशिश की। इतना ही नहीं पर्वतीय समाज बाहुल्य मौहल्लों व क्षेत्रों के वोटरों के नाम इसलिए वोटर लिस्ट से हटा दिए गए कि उन्हें पता था कि ये वोट कांग्रेस को नहीं पड़ने वाले। देहरादून क्षेत्र में लगभग 30 हजार से अधिक पर्वतीय प्रवासियों को जानबूझकर उनके मताधिकार से वंचित रखा गया, अन्यथा कांग्रेस को भाजपा से मिलने वाली टक्कर का मतांतर 22912 से बढ़कर लगभग 40 हजार का होता। इस बात की तस्दीक दूसरी बार मेयर बने विनोद चमोली भी करते हैं। उनका कहना है कि राज्य आंदोलनकारी होने के नाते पर्वतीय जनमानस का उनके साथ भावनात्मक लगाव रहा है। यही कारण है कि पर्वतीय लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब किए गए। उनका यह भी कहना है कि अधिकारी आज भले ही यह कहें कि लोगों ने अपने वोटों को सुरक्षित रखने के लिए निर्वाचन कार्यालय से संपर्क नहीं किया या उन्होंने अपने वोट अंकित कराने के लिए प्रयास नहीं किए। इस पर मेयर विनोद चमोली का कहना है कि यह सब लफ्बाजी है, उनके अनुसार यह जानबूझकर कांग्रेस की चाल रही है।
    राजधानी देहरादून में आज यह चर्चा रही है कि कांग्रेस ने मतगणना से पूर्व की रात ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ की पूरी तैयार कर ली थी, इसके लिए उसे हरी झंडी भी मिल चुकी थी, लेकिन एक अधिकारी के इस मामले में अपनी संलिप्तता से साफ मना करने पर कांग्रेस की यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई, वहीं यह भी चर्चा है कि इस अधिकारी को एक करोड़ रूपया और आउट ऑफ टर्न पदोन्नति तक का लालच दिया गया, लेकिन इस अधिकारी ने साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ की भनक के बाद भाजपा खेमें के सक्रिय हो जाने के बाद और भाजपा द्वारा स्ट्रांग रूम की चौकसी बढ़ाए जाने के बाद मशीनों से छेड़छाड़ नहीं हो पाई। इस पर मेयर विनोद चमोली का कहना है कि जब उन्हें इस बात की भनक लगी तो वे अपने चार-पांच साथियों के साथ रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में बने स्ट्रांग रूम की ओर गए, तो उन्हें वहां मात्र चार सुरक्षाधिकारी ड्यूटी बजाते मिले। उन्होंने कहा कि अमूमन स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में एक टुकड़ी पीएसी के साथ कई जवान तैनात किए जाते हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन ने मिलकर ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ की योजना के तहत स्ट्रांग रूम की सुरक्षा बहुत हल्की की गई थी, ताकि वे ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ कर सके, लेकिन प्रशासन के एक अधिकारी की ईमानदारी के चलते ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देहरादून की मेयर सीट पर कब्जा करने के लिए जहां मुख्यमंत्री तक को मैदान में उतारा वहीं मुख्यमंत्री पुत्र व उनकी पत्नी ने भी कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में जमकर अनर्गल बयानबाजी की, जिसका जवाब राजधानी की जनता ने उन्हें दे दिया है।