बुधवार, 17 जुलाई 2013

चीन - नेपाल बार्डर तक 26 दिन बाद भी सड़क नहीं

चीन - नेपाल बार्डर तक 26 दिन बाद भी  सड़क नहीं


राजेन्द्र जोशी
देहरादून : 16-17 जून को केदारनाथ में आई विनाशकारी आपदा ने जहां हजारों लोगों के जीवन को लील लिया, वहीं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस राज्य की तमाम राजनैतिक और प्रशासनिक अक्षमताओं की पोल खोलकर रख दी है। तिब्बत, चीन और नेपाल की सीमा से लगे इस राज्य का अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र होने के चलते और भी महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में 26 दिन तक राज्य से भारत-चीन की सीमाओं तक जोड़ने वाले मार्गों का बंद रहना अपने आप में प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार की क्षमताओं पर सवालिया निशान लगाता है।
    उल्लेखनीय है कि बीते दिन ही चीन ने लद्दाख क्षेत्र के चुमार इलाके में भारतीय पोस्ट पर घुसकर वहां लगे सिक्योरिटी कैमरों को तोड़ा ही नहीं बल्कि भारतीय सेना द्वारा बनाए गए, कुछ अस्थाई ढांचों को भी गिरा दिया। इतना ही नहीं चीनी फौज वहां लगे कैमरों के तार और कुछ कैमरे भी साथ ले गई। भारत के विरोध के बाद चीन ने कैमरे लौटा दिए। राज्य की वर्तमान परिस्थिति पर यदि नजर दौड़ाई जाए तो प्रदेश के ऋषिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश-बद्रीनाथ और ऋषिकेश-केदारनाथ मार्ग सहित देहरादून से हिमाचल को जोड़ने वाले पर्वतीय मार्ग व हल्द्वानी-धारचूला मोटर मार्ग पिछले 26 दिनों से बंद हैं। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस राज्य की सीमा क्षेत्र में यदि चीन द्वारा लद्दाख की तरह घुसपैठ की जाती है और मौसम की स्थिति हवाई यातायात के लिए अनुकूल नहीं होती है, तो ऐसे में घुसपैठियों के खिलाफ कैसे कार्यवाही होगी यह सवाल उठ खड़ा हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि बीते 26 दिनों में राज्य की महत्वपूर्ण मुख्य मार्गों से लगभग 200 से ज्यादा पुल बल गए और कई किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग भी बाढ़ की विभिशिका की भेंट चढ़ गया, लेकिन इन 26 दिनों में न तो भारत सरकार और न ही प्रदेश सरकार भारत-तिब्बत सीमा को जोड़ने के लिए न तो अस्थाई पुल ही बना सकी और न ही वैकल्पिक मार्ग। सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में लगी फौज को कैसे रसद सामग्री पहुंचाई जा रही होगी, यह तो रक्षा मंत्रालय ही बता सकता है, लेकिन मौसम की खराबी के चलते सैन्य बेस कैंपों तक हैलीकाप्टर की आवाजाही भी नहीं हो पा रही है।
    मामले में रक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार को मिलकर सबसे पहले सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत और पुलों के निर्माण पर ध्यान देना होगा, ताकि सीमा क्षेत्र तक बिना रूके हुए यातायात चल सके। जिससे रसद सामग्री सहित आपदा प्रभावितों तक डाक्टर और अन्य सुविधाएं पहुंच सके। इससे जहां सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य की सीमाओं तक पहुंचा जा सकेगा, वहीं आपदा पीड़ितों की मदद भी हो सकी।