मंगलवार, 9 जुलाई 2013

प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में हुई फेल!

प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में हुई फेल!
प्रमुख सचिव की डांट से जिलाधिकारी को पड़ा दिल का दौरा
कितने स्थानीय और कितने यात्री गायब, प्रदेश सरकार को नहीं मालूम
मुख्यमंत्री व मंत्रियों का प्रभावित क्षेत्रों में हुआ विरोध
हवाई दौरों तक सिमटे कांग्रेसी नेता
राजेन्द्र जोशी
देहरादून,22 जून । ‘‘तीन दिन चले अढ़ाई कोस‘‘ यह कहावत उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और उनके अधिकारियों पर सटीक बैठती है। प्रदेश में आई भीषण आपदा के चार दिन बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार 72 हजार से अधिक लोगों में से कुल 1200 लोगों को देहरादून व ऋषिकेश पहुंचा पाई है। जिलाधिकारियों के पास आपदा और राहत से निपटने के लिए पैसे की कमी है, जो जिलाधिकारी पैसे की कमी का रोना रो रहा है, उसे मुख्यमंत्री के मुंह लगे अधिकारी धमका रहे हैं। परिणाम स्वरूप एक जिलाधिकारी को प्रमुख सचिव की डांट के चलते दिल का दौरा पड़ गया और वह अस्पताल में भर्ती है।
इसे उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आपदा प्रबंधन पर बड़े-बड़े दावे करनी वाली प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन के मामले में फेल साबित हुई है। दुर्घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक राहत और बचाव दल उन तक नहीं पहुंच पाया है। केदारनाथ में प्रभातम हैली सर्विस चलाने वाली कंपनी के चार कर्मचारियों सहित सैकड़ों लापता हैं, वहीं बद्रीनाथ में ठंड से पांच लोगों ने दम तोड़ दिया। प्रदेश सरकार के आपदा प्रबंधन के दावे हवा में हो रहे हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री ने केदारनाथ, गुप्तकाशी, फाटा और गौचर रहित रूद्रप्रयाग के हवाई दौरे किए। रूद्रप्रयाग में मुख्यमंत्री का हैलीकाप्टर उतरने ही वाला था कि लोगों ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, आपदा मंत्री यशपाल आर्य और कृषि मंत्री का स्थानीय लोगों ने इनका घेराव कर जबरदस्त विरोध किया। यहां के लोगों का आरोप था कि बीते साल उत्तरकाशी में आई आपदा के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें कहा था कि वे भजन करें, अब उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल कि अब वे क्या करें। वहीं लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप भी लगाए व उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने यहां के लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया और वीआईपी लोगों के आवाभगत में जुट गए हैं। विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री सीधे दिल्ली रवाना हो गए, जहां की वह सप्ताह में तीन दिन विश्राम करते हैं। एक जानकारी के अनुसार सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री से बात कर उनको उत्तराखण्ड में आई विनाशलीला से निपटने के लिए एक हजार करोड़ रूपये की आर्थिक मदद दिए जाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने भी उनको भरोसा दिलाया है।  वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा किया।
आपदा प्रबंधन में फेल हुए चुकी प्रदेश सरकार की वर्तमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री के केशु भाई पटेल जैसी हालत हो गई है। गौरतलब हो कि भंुज में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान आपदा और राहत कार्याें में असफल होने के बाद भाजपा सरकार ने केशु भाई को हटाकर गुजरात की कमान नरेन्द्र मोदी के हाथ सौंपी थी। तब से अब तक गुजरात में नरेंद्र मोदी का राज है। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि उत्तराखण्ड के हालात भी ठीक इसी तरह के हो गए हैं, मुख्यमंत्री और उनकी टीम आपदा राहत एवं बचाव कार्याें में असफल साबित हुई है। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी सरकार को ठीक से यह भी पता नहीं है कि इस विनाशलीला की भेंट कितने लोग चढ़ गए। सरकार के पास यह भी आंकड़ा नहीं है कि इस विनाशलीला में कितने स्थानीय और कितने यात्री काल कलवित हो गए।
आपदा प्रभावित जिलों उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चम्पावत के जिलाधिकारी पर्याप्त पैसे के न होने के चलते हतोत्साहित हैं। सरकार इन जिलाधिकारियों को केवल निर्देश देने तक सीमित रह गई है। आपदा प्रभावित लोगों को खाने का सामान, त्रिपाल, टैंट आदि की व्यवस्था की जाएगी इन सबको लेकर जिलाधिकारी खासे सदमे में हैं। बीते दिन जब एक जिलाधिकारी ने प्रदेश के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा के सामने अपनी समस्या रखी तो राकेश शर्मा ने उसे राहत कार्याें में सुझाव देने के बजाए लताड़ लगा दी, परिणाम स्वरूप जिलाधिकारी को दिल का दौरा पड़ गया और उन्हें देहरादून के एक अस्पताल में दाखिल कराया गया है। वहां उनका ईलाज चल रहा है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन और राहत कार्याें की क्या स्थिति होगी। वहीं एक जानकारी के अनुसार केदारनाथ क्षेत्र में हैलीकाप्टर सेवा चलाने वाली प्रभातम हैली सर्विस के चार कर्मचारी उन सैकड़ों लोगों के साथ बह गए, जिनका केदारनाथ हादसे में कोई अता पता नहीं है, वहीं बद्रीनाथ क्षेत्र में बढ़ रही ठंड से पांच लोगों की मरने की खबर है।