बुधवार, 17 जुलाई 2013

प्रदेश का आपदा प्रबंधन पूरी तरह रहा नाकाम: कुंजवाल

प्रदेश का आपदा प्रबंधन पूरी तरह रहा नाकाम: कुंजवाल


मुख्यमंत्री  को कई सुझाव भी दिये

राजेन्द्र जोशी
देहरादून । उत्तराखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष गोविन्द सिह कुंजवाल ने एक बार फिर मुख्यमंत्री की मुसीबतों को बढ़ा दिया है । इस बार मुसीबत राजनैतिक नहीं बल्कि राज्य में आयी आपदा से निपटने में सरकार की हीला हवाली व नाकामी को लेकर है। विधानसभा अध्यक्ष नें तो मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में यहां तक कह दिया है कि प्रदेश का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से नाकाम रहा है जिससे आपदा से ज्यादा नुकसान हुआ है। जिसे रोका जा सकता था। पत्र में गोविन्द सिंह कुंजवाल ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर चिन्ता जाहिर करते हुए रोजगार व जनजीवन को भी इंगित किया है।
   विगत दिनांे उत्तराखण्ड में आई भीषण दैवीय आपदा के बाद प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने सड़क मार्ग से गढ़वाल एवं कुमाऊॅ के दैवीय आपदा ग्रस्त क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर आपदा से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया तथा राहत कार्यों का मौके पर जायजा लिया। कुंजवाल ने दैवीय आपदा से ग्रस्त क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण के बाद आज प्रदेश के मुख्यमंत्री को आपदा प्रभावित क्षेत्रों एवं प्रभावित स्थानीय लोगों के पुनर्वास व आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास, आपदा से जान माल की सुरक्षा हेतु प्रभावी कार्य योजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए पत्र भेजा है।
    मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कुंजवाल ने बताया है कि उत्तराखण्ड राज्य अपनी  भौगोलिक एवं भूगर्भीय विशिष्ठताओं एवं विषमताओं के कारण देश के अन्य राज्यों से भिन्न है। उन्होंने कहा कि अन्य हिमालयी राज्यों से उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक एवं भूगर्भीय समानताएं हैं, लेकिन नवगठित उत्तराखण्ड राज्य आपदाओं की दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील राज्य है। उन्होंने कहा है कि गत दिनों प्रदेश में आई भीषण आपदा से निपटने हेतु हमें नवसृजित आधारभूत संरचनाओं की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए रूपरेखा तैयार करनी होगी। कुंजवाल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सरकार को सुझाव दिया है कि आपदाग्रस्त क्षेत्रों को अलग-अलग बांट कर आपदा प्रबन्धन की रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। जिसके तहत मोटर मार्ग से पूर्ण रूप से कट गये क्षेत्रों का चिन्हीकरण करने व साथ ही आपदा से पूर्ण रूप से प्रभावित हो चुके क्षेत्रों का चिन्हीकरण किया जाना चाहिए। इसके अलावा कुंजवाल ने सुझाव दिया है कि प्रदेश के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के पुर्ननिर्माण हेतु पूरे प्रदेश की माइक्रोजोनेशन मानचित्र का कार्य भूवैज्ञानिकों से पूरा कराया जाना चाहिए।
   उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जनपद हेतु जो माइक्रोजोनेशन मानचित्र तैयार किया गया है उसे तत्काल प्राप्त कर उसी के अनुरूप पूरे प्रदेश की माइक्रोजोनेशन मानचित्र कम समय से तैयार करने की कार्य योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मानचित्र से यह पता लग पायेगा कि प्रदेश में कौन सा क्षेत्र आपदा की दृष्टि से सुरक्षित है और कौन से क्षेत्र संवेदनशील। साथ ही आपदाग्रस्त क्षेत्रों के पुर्ननिर्माण की कार्ययोजना में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना उचित होगा।
पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश में आयी दैवीय आपदा से जहॉ बड़ी जनहानि हुई है वहीं आपदा से प्रदेश का पर्यटन, पशुपालन, कृषि, औद्यानिकी पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा है। जिसे देखते हुए उक्त हानि का सूक्ष्म अध्ययन शीघ्र करते हुए उनके पुनर्वास की कार्य योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक रूप से यह सामने आया है कि प्रदेश का आपदा तंत्र पूरी तरह से फेल रहा है। इसलिए आपदा प्रबन्धन तंत्र को चुस्त-दुरस्त रखते हुए आपदा प्रबन्धन तंत्र कार्य योजना के अन्तर्गत इस पुर्नसृजित किया जाना जनहित में होगा।
    कुंजवाल ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि आपदा से निपटने तथा आपदा को रोकने हेतु नदियों के किनारों में भवन निर्माण व सार्वजनिक निर्माण कार्यो में तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए नदी के किनारों का अध्ययन कर प्रतिबन्धित क्षेत्र का निर्धारण करते हुए नदी के बाढ़ वाले क्षेत्रों से सभी निजी व सरकारी भवनों को तत्काल हटाने, चारधाम यात्रा में जाने वाले सभी यात्रियों व उनके वाहनों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण किये जाने, आपदाग्रस्त गॉवों में आवश्यकतानुसार राहत सामग्री पहुॅचाने तथा इस हेतु शीघ्र एक अल्पकालिक तंत्र विकसित किये जाने, राहत सामग्री के वितरण हेतु स्थानीय भूतपूर्व सैनिकों का तंत्र जिला, तहसील,ब्लाक व ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार कर वितरित किये जाने, सभी आपदाग्रस्त गॉवों में जहॉ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है का चिन्हीकरण कर वहॉ अनिवार्य रूप से एक चिकित्सकों की तैनाती करने, चार धाम यात्रा मार्ग में आपदा से प्रभावित जिनका व्यवसाय प्रभावित हो चुका है उसे देखते शीघ्र चारधाम यात्रा प्रारम्भ करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की सलाह देते हुए आशा व्यक्त की है कि मुख्यमंत्री इन सुझावों को गम्भीरता से लेते हुए प्रभावी कदम उठायेंगे ताकि राज्य की जनता को परेशानी से बचाया जा सके।