गुरुवार, 25 जुलाई 2013

पहली बार श्रावण मास में केदारधाम में नहीं किया श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक

पहली बार श्रावण मास में केदारधाम में नहीं किया श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक
राजेन्द्र जोशी
देहरादून। देश के इतिहास में शायद यह पहला श्रावण माह है, जब भगवन केदारनाथ के मंदिर में कोई जलाभिषेक नहीं हुआ। हालांकि बीते दिन कुछ राजनीतिक दलों के लोगों ने वहां जलाभिषेक का नाटक तो किया, लेकिन धर्माचार्यों ने उनके जलाभिषेक को इसलिए नकार दिया कि केदारनाथ मंदिर का अभी शुद्धिकरण नहीं हुआ है, लिहाजा ऐसे में जलाभिषेक का कोई औचित्य नहीं।
    देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब शिव के 12वें ज्योर्तिलिंग में श्रावण मास में जलाभिषेक की परंपरा टूटी हो। इससे पहले प्राचीनकाल से शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंग में श्रावण के पहले सौमवार से जलाभिषेक के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का वो हुजूम उमड़ता था कि केदारपुरी में तिल रखने की जगह भी नहीं होती थी। श्रावण में शिव के ज्योर्तिलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है, इसी महत्व को देखते हुए श्रद्धालु शिव के मंदिरों में जलाभिषेक ही नहीं करते, बल्कि शिवलिंग का पंचगब्य स्नान भी करते रहे हैं। इस बार 16-17 जून को आए महाप्रलय ने श्रद्धालुओं को शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक भगवान केदारधाम के शिवालय में जल चढ़ाने का अवसर अपने श्रद्धालुओं से छीन लिया। शिवधाम में सन्नाटा पसरा हुआ है और बोल बम, हर-हर महादेव, जय केदारबाबा के नारे जो कभी पिछले वर्ष तक यहां सुनाई देते थे, वे इस बार नहीं सुनाई दे रहे हैं। केवल केदारधाम से एक किलोमीटर उपर भैरव बाबा के मंदिर में जरूर रोज पूजा-अर्चना पूर्व की भांति अभी भी की जा रही है, लेकिन वह मंदिर भी सूना-सूना है, क्योंकि केदारधाम की यात्रा तब ही पूरी मानी जाती थी, जब श्रद्धालु भैरव बाबा के दर्शन करने के बाद केदारनाथ धाम में जलाभिषेक कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान के दरबार में सर नवाते थे।
    हालांकि बीते दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित, कृषि मंत्री, भाजपा नेता उमा भारती, भगत सिंह कोश्यारी और डा. रमेश पोखरियाल निशंक सहित तमाम राजनेताओं ने द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन तो किए, लेकिन धर्माचार्यों की नजर में वह गलत था, धर्माचार्यों के अनुसार जब तक केदार मंदिर परिसर का शुद्धिकरण नहीं हो जाता और विधिविधान से जब तक वहां पूजा-अर्चना शुरू नहीं हो जाती, तब तक जलाभिषेक का कोई औचित्य नहीं है। वहीं केदारधाम के रावल का कहना है कि केदारधाम की सफाई होने तक श्रावण के बावजूद जलाभिषेक का कार्यक्रम उखीमठ स्थिति ओमकारेश्वर मंदिर में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओमकारेश्वर मंदिर में भगवान केदार की विगृह मूर्ति शीतकाल में रखी जाती है और यह स्थान भी केदारनाथ का शीतकालीन गद्दी के रूप में प्राचीन समय से पूज्यनीय रहा है। उन्होंने कहा कि केदारधाम के शुद्धिकरण के बाद मंदिर में जल्द ही पूजा शुरू कर दी जाएगी।