रविवार, 18 अगस्त 2013

11 सितम्बर से पुनः शुरू होगी केदारनाथ धाम में पूजा

11 सितम्बर से पुनः शुरू होगी केदारनाथ धाम में पूजा
देहरादून : केदारनाथ धाम में 11 सितम्बर को सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग के दिन पूजा पुनः प्रारम्भ करवाने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। शंकराचार्य, रावल, स्थानीय तीर्थ पुरोहित व संत समाज ने इस पर अपनी सहमति व्यक्त की है। शुक्रवार को सचिवालय में विश्व की आस्था के केंद्र केदारनाथ में पूजा दुबारा शुरू करवाने पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विस्तार से विचार विमर्श हुआ।
     मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर समिति द्वारा केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह, सभामण्डप में मलबे की सफाई की जा चुकी है। इसके दरवाजे भी लगाए जा चुके हैं। यहां तक की नंदी की मूर्ति के पास चबूतरा बनाया जा चुका है। आस्था के केंद्र केदारनाथ में पूजा प्रारम्भ करवाने के साथ ही इस कार्य में लगे लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी है। उन्होंने केदारनाथ में लोहे का पुल, रेलिंग सहित लगवाने के लिए लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देशित किया। साथ ही 100 लोगों के लिए प्री-फेब्रिकेटैड आवास की व्यवस्था करने के लिए भी निर्देशित किया गया। उन्होंने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी दिलीप जावलकर को केदारनाथ में दो माह का राशन व अन्य आवश्यक वस्तुएं भिजवाने को कहा ताकि वहां कार्यरत मंदिर समिति के पदाधिकारी व पुरोहित, पुलिस व प्रशासन के कार्मिकों को दिक्कत ना हो।
      मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित केदारनाथ के रावल भीमाशंकरलिंग, शंकराचार्य के प्रतिनिधि सुबोधानंद सहित स्थानीय तीर्थ पुरोहितों व मंदिर समिति के पदाधिकारियों से पूजा प्रारम्भ करवाने के बारे में उनकी राय जानी। सभी ने एक स्वर में कहा कि 11 सितम्बर को सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग बन रहा है। इस दिन पूजा प्रारम्भ करने में किसी को कोई आपŸिा नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री ने भी राज्य सरकार की आरे से सैद्धांतिक सहमति दी। उन्होंने अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में एक बैठक और बुलाए जाने के निर्देश दिए जिसमें आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने डीएम रूद्रप्रयाग को केदारनाथ के लिए वैकल्पिक पैदल मार्ग चिन्हित करने को भी कहा। यूसेक के निदेशक डा. एमएम किमोठी ने केदारनाथ में वैकल्पिक मार्गों पर थ्रीडी प्रस्तुतिकरण दिया।
      इस अवसर पर केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, डा.हरक सिंह रावत, श्रीमति अमृता रावत, दिनेश अग्रवाल, मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, रावल भीमाशंकरलिंग, शंकराचार्य के प्रतिनिधि सुबोधानंद, स्थानीय तीर्थ पुरोहित, सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।