गुरुवार, 8 अगस्त 2013

नेताओं के बाद सामने आया अधिकारियों का संवेदनहीन चेहरा

नेताओं के बाद सामने आया अधिकारियों का संवेदनहीन चेहरा

जहां इतने मर गए, एक और मर जाए तो क्या फर्क पड़ेगा: एसडीएम
राजेन्द्र जोशी
देहरादून, 2 अगस्त। उत्तराखण्ड में आई आपदा के बाद नेताओं का संवेदनहीन चेहरा सामने तो आया ही था, अब अफसरशाही का भी संवेदनहीन चेहरा सामने आने लगा है। गुप्तकाशी के एक स्थानीय व्यक्ति के दो साल के बच्चे को जब इलाज के लिए कहीं ले जाने की मिन्नतें स्थानीय व्यक्ति एसडीएम गुप्तकाशी से करता रहा, तो उसने उस व्यक्ति को बेरूखी से मना ही नहीं कर दिया, बल्कि यहां तक कह दिया कि जब हादसे में इतने सारे लोग मरे हैं, ये तेरा बच्चा भी मर जाएगा तो क्या हो जाएगा। यह उत्तराखण्ड सरकार की अफसरशाही का एक वो घिनौना चेहरा है, जो आपदा में फंसे स्थानीय लोगों के सामने आया है, क्योंकि गुप्तकाशी, फाटा, सौनप्रयाग और गौरीकुण्ड में प्राथमिक चिकित्सा के अलावा गंभीर रोगों से निजात पाने की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही यातायात हेतु सड़क मार्ग। प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण आखिर जाएं तो जाएं कहां, उनके पास सरकार के संवेदनहीन अधिकारियों के सामने मिन्नत करने के सिवा आखिर बचता भी क्या है। इसी तरह की घटना धारचूला क्षेत्र में एक बच्ची के साथ भी हुई, जिसको हायर सेंटर तक इलाज के लिए ले जाने को लेकर उसके परिजन और स्थानीय लोग अधिकारियों से मिन्नतें करते रहे, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा, आखिरकार मीड़िया में चर्चा होने के तीन दिन बाद उस बच्ची को हल्द्वानी बेस चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां स्थिति नाजुक होने पर उसे दिल्ली रैफर किया गया, हालांकि बच्ची की जान तो नहीं बच पाई, लेकिन बच्ची की मौत ने उत्तराखण्ड सरकार की अफसरशाही के उस घिनौने चेहरें को सार्वजनिक कर दिया, जिसमें संवेदन और भावनाओं की कोई कद्र नहीं है।
    ताजा प्रकरण गुप्तकाशी के पास स्थानीय ग्रामीण जब एसडीएम हरक सिंह रावत के सामने अपने बच्चे हायर सेंटर को रैफर करने को लेकर मिन्नतें करता रहा, तो एसडीएम ने उसे धमकाया ही नहीं बल्कि उसे बंद करने तक की धमकी दे दी और यहां तक कह दिया कि जब केदारनाथ हादसे में इतने लोग मारे जा चुके हैं, अगर तेरा एक बच्चा मर जाएगा तो क्या फर्क पड़ जाएगा। मामले में भाजपा नेता प्रकाश पंत का कहना है कि उत्तराखण्ड सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है, उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का इस तरह का सार्वजनिक स्थान पर कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश सरकार के मंत्रियों और नेताओं पर हैलीकाप्टरों के दुरूपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जीवन और मौत के बीच झूल रहे लोगों के लिए हैलीकाप्टर उपलब्ध नहीं है और मंत्रियों व नेताओं के लिए हैलीकाप्टरों में घूमने की छूट मिली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया है, जबकि इतनी गंभीर घटना राष्ट्रीय आपदा की श्रेणी में आती है। उन्होंने इस बात पर भी शक जाहिर किया कि आपदा के बाद राहत के नाम पर कांग्रेसी नेताओं में जो बंदरबांट होगी उसको रोकने के उपाय जनता को ही करने होंगे।