बुधवार, 4 सितंबर 2013

कांग्रेस सह प्रभारी की रिपोर्ट से बढ़ेंगी बहुगुणा सरकार की मुश्किलें

कांग्रेस सह प्रभारी की रिपोर्ट से बढ़ेंगी बहुगुणा सरकार की मुश्किलें

सरकार और संगठन में अविश्वास की भावना ले डूबेगी कांग्रेस को!

राजेन्द्र जोशी
देहरादून :कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी संजय कपूर ने जो रिपोर्ट पार्टी के आलाकमान को सौंपी है, उस पर यदि गौर किया जाए तो मुख्यमंत्री बहुगुणा की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी में असंतोष, मंत्री व विधायकों से जनता नाराज और विधायकों का सरकार के प्रति अविश्वास आदि जैसे कई मुद्दों को लेकर प्रदेश सह प्रभारी ने दस जनपथ को यह रिपोर्ट सौंपी है।
    मुख्यमंत्री बनने के 18 महीने के बाद पहली बार प्रदेश में काबिज कांग्रेस सरकार ने विधायकों मंत्रियों और सहयोगी दलों के नेताओं की एक बैठक आपदा प्रबंधन के नाम पर बुलाई थी, लेकिन आठ घण्टे चली इस मैराथन बैठक में आपदा प्रबंधन पर किसी भी तरह की चर्चा नहीं हुई, बल्कि विधायक जहां मंत्रियों की खिंचाई करते नजर आए, वहीं सब मिलकर आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य की खिंचाई करते नजर आए। मामला तो यहां तक बढ़ गया कि आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य कई बार तिलमिला तक गए, वहीं सतपाल महाराज गुट के विधायकों ने तो बैठक का बायकाट ही कर डाला। यह सब प्रदेश सह प्रभारी संजय कपूर की आंखों के सामने हो रहा था। पहले इस बैठक में प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी को उपस्थित रहना था, लेकिन तेज बुखार और यात्रा न कर सकने की स्थिति के चलते मुंबई यात्रा पर गए संजय कपूर को पार्टी नेतृत्व ने देहरादून में आहूत इस बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। बैठक में जो कुछ भी हुआ उसका विवरण तैयार कर प्रदेश सह प्रभारी ने दस जनपथ को सौंप दिया है। पुष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आपदा प्रभावित इलाकांे में जिस तरह से कार्य होना चाहिए था प्रदेश सरकार उसमें विफल रही है, इतना ही नहीं उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि पार्टी के कार्यकर्ता और सहयोगी दल जिनकी बदौलत उत्तराखण्ड में कांग्रेस की सरकार बनी है, वे भी सरकार की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने पार्टी आलाकमान को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मंत्रियों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया है, कोई भी मंत्री यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आपदाकाल के दौरान उसने कितने दिन कौन से स्थान में रहकर आपदा प्रभावित स्थानों का जायजा लिया और वहां कार्य किया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया है कि पार्टी के विधायकों में सरकार के प्रति अविश्वास की भावना है, यही कारण है कि कई विधायक मुख्यमंत्री से नाराज चल रहे हैं। अपनी गोपनीय रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह के हालात उत्तराखण्ड में रहे तो इसका असर लोकसभा चुनाव में भी पड़ेगा।
    सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि प्रदेश सरकार ने अब विपक्षी विधायकों से भी संपर्क कर उनसे आपदा प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी और उनके क्षेत्रों में होने वाले कार्याें पर जानकारी मांगी है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बीते दिन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक प्रदेश सरकार पर यह आरोप भी लगा चुके हैं कि क्या केवल सत्तापक्ष के विधायकों के यहां ही आपदा हुई है, क्योंकि सरकार केवल कांग्रेस विधायकों के विधानसभा क्षेत्र में ही आपदा प्रभावित कार्यों को तवज्जो दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान इस बात की भी तस्दीक करता है कि प्रदेश सरकार सत्तापक्ष के विधायकों के अलावा विपक्ष के विधायकों के आपदा प्रभावित क्षेत्रों को नजर अंदाज कर रही है। जिसके बाद ही मुख्यमंत्री ने गोपनीय तरीके से विपक्षी दलों के विधायकों से आपदा प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी मांगी। कुल मिलाकर प्रदेश सह प्रभारी की इस रिपोर्ट से प्रदेश संगठन के आला नेता और प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों का यहां यह भी दावा है कि पार्टी आलाकमान प्रदेश संगठन के नेतृत्व को लेकर बीते काफी दिनों से होमवर्क में लगा है, जिन-जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनसे पार्टी के आला नेताओं ने बात भी की है, लेकिन जिन लोगों के नाम पार्टी संगठन के दायित्व को संभाले जाने के लिए आगे आ रहे हैं, उनमें अधिकांश प्रदेश कैबिनेट में मंत्री हैं और वे सत्ता की मलाई नहीं छोड़ना चाहते हैं, यही कारण है कि प्रदेश आलाकमान के सामने लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन चुनौति बनकर खड़ा हो गया है। जहां तक सरकार के नेतृत्व की बात है, उसमें भी कई वरिष्ठ लोगों के नाम सामने आए हैं, क्योंकि मौजूदा हालात बहुगुणा के खिलाफ चल रहे हैं। पार्टी आलाकमान को 2014 का लोकसभा चुनाव सामने दिखाई दे रहा है और वह प्रदेश सरकार का नेतृत्व कर रहे बहुगुणा और संगठन का नेतृत्व कर रहे यशपाल आर्य को तुरंत हटाना चाहता है, क्योंकि पार्टी आलाकमान को इनसे उम्मीदे बहुत कम नजर आ रही हैं।