शनिवार, 19 अक्तूबर 2013

बहुगुणा और आर्य पर श्राद्ध पक्ष समाप्ति के बाद कभी भी गिर सकती हैं गाज़

देहरादून।  7  अगस्त 2013  को हमने ये  खबर की थी कि  15 अगस्त के बाद कभी भी छिन  सकती है मुख्यमंत्री की कुर्सी अब सही होने जा रही है  ... उत्तराखंड में जून में आई आपदा ने इस पर्वतीय प्रदेश की सियासत को गर्म कर दिया था, आपदा इतनी भीषण थी की केंद्र सरकार और कांग्रेस नेतृत्व ने उत्तराखंड सरकार और वहां के मुख्यमंत्री को आपदा से निपटने के लिए पूरी छूट दे दी थी, पूरे देश ने इस आपदा से निपटने में वहां की सरकार का पूरा साथ दिया। लाखो लोग उत्तराखंड आपदा से प्रभावित हुये, चार धाम यात्रा भी पूरी तरह से रोक दी गई। उत्तराखंड में आई उस विनाशलीला में बाबा केदारनाथ का धाम और पूरी केदारघाटी तबाह हो गई।
कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री वजय बहुगुणा को आर्थिक, सैन्य बल और सिस्टम सपोर्ट देकर आपदा प्रभावित लोगो को राहत पहुंचाने के लिए हर सम्भव मदद की थी इस बीच विजय बहुगुणा की सुस्ती और उनके काम करने के तरीके को लेकर भी सवालिया निशान लगने शुरू हो गए। वही बहुगुणा सरकार में शामिल उन्ही के सहयोगी उनके लिए गड्ढा खोदने का काम करने लगे। आपदा के समय मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की निष्क्रियता को लेकर स्थानीय कांग्रेसियों ने कांग्रेस नेतृत्व और आलाकमान सोनिया गांधी के सामने उनकी बखिया उधेड़ कर रख दी।
विजय बहुगुणा के विरोधियों का नेतृत्व खुद केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत ने किया वजह साफ़ थी जिस तरह विधानसभा चुनावों के बाद विजय बहुगुणा ने अपने ब्राह्मण होने का फायदा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने के लिए उठाया था वो हरीश रावत को नागवार गुजरा था, विधानसभा चुनावों के बाद अगर विजय बहुगुणा कांग्रेस आलाकमान से अपनी नजदीकियों का फायदा उठाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुये थे उसने अन्दर ही अन्दर हरीश रावत गुट को आंदोलित कर दिया था।
हरीश रावत इस आपदा के बहाने विजय बहुगुणा से मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने की पूरी तैयारी कर चुके थे लेकिन सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने आपदा को प्राकृतिक आपदा मान कर उन्हें जीवनदान दे दिया था। विजय बहुगुणा भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए आपदा के राहत कार्य के साथ साथ पार्ट के अन्दर उठ रहे विरोध के स्वर को थामने पर भी लगे थे, इसी बीच उन्ही के मंत्रिमंडल के हरक सिंह रावत ने उत्तराखंड की राजनीति को अस्थिर करने के लिए नई राजनीतिक चाल चली जिसमें उन्होंने कांग्रेसी विधायको का मन टटोलने के लिए अपने आवास पर एक डिनर पार्टी आयोजित की थी जिसमें ऐसी घटना घटी जिसने हरक सिंह रावत की मुख्यमंत्री की कुर्सी हलाने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
हरक सिंह रावत की इस डिनर पार्टी के दौरान हुई फायरिंग में दो लोगो के जख्मी हो गए| कांग्रेस के खानपुर विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष कुंवर प्रणव सिंह के चैंपियन पर गैरकानूनी फायरिग करने का आरोप हैं| कृषि मंत्री ने के यहाँ आयोजित इस भोज में प्रदेश के कई बड़े-बड़े मंत्री और विधायक शिरकत करनें पहुंचे थे। करीब 9 बजे खानपुर विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन भी समारोह में सम्मलित होनें पहुंचे प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हरक सिंह रावत से मुलाकत करनें के बाद उन्होंने हवाई फायर किये| इसके बाद कुंवर सिंह चैंपियन नें डाइनिंग हॉल में जाकर भी हवाई फायरिंग का प्रदर्शन किया। इसी दौरान एक गोली छिटकर कांग्रेस नेता विवेकानंद खंडूरी के पाँव में जा लगी और दूसरी गोली हरिद्वार के नेता रवींद्र सैनी को लगी।
हरक सिंह रावत की इस डिनर पार्टी में खुद मुख्यमंत्री भी शामिल होने वाले थे लेकन उसके पहले ही हुई इस फायरिंग ने बहुगुणा के कार्यक्रम को रद्द करा दिया साथ ही हरक सिंह की मुख्यमंत्री बनने के सपने को भी तोड़ दिया था। हरक सिंह रावत स पार्टी के बहाने अपनी ताकत दिखाना चाहते थे। दिल्ली दरबार से आ रही ख़बरों के मुताबिक लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व उतराखंड में परिवर्तन के संकेत दे चुका है, विजय बहुगुणा इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे है वही उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और राजनीतिक विरोधी उनकी कुर्सी के पाये उखाड़ने पर लगे हुये है।
विजय बहुगुणा के साथ ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या से भी उनकी प्रदेश की अध्यक्षी वापस ली जा रह है कांग्रेस ने उनको हटाने के लिए एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले उतराखंड में भारी बदलाव देखने को मिलेगा कुछ नेता जोड़तोड़ भी करते मिलेंगे तो कुछ के सपने उनके द्वारा किये जा रहे गलत कामों की वजह से टूटेंगे। कांग्रेस नेतृत्व किस पर भरोसा दिखाती है साथ ही किसका भाग्य बाकी नेताओं पर भर पड़ता है ये उतराखंड की राजनीति में मची उथल पुथल के शांत होने के बाद ही सामने आयेगा। लेकन ये तो तय है कि विजय बहुगुणा के सर से ताज उतरने वाला है।
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