देहरादून
: बीते कई दिनों से प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाएं जोरों पर
हैं। इन चर्चाओं से सियासी तूफान भी उठ खड़ा हुआ है।
बिना
आग के धुआं नहीं उठता, इस बात को ध्यान में रखा जाए तो प्रदेश में नेतृत्व
परिवर्तन के पीछे कहीं न कहीं कोई बात जरूर है। मुख्यमंत्री विगत दिवस भी
अचानक दिल्ली गए। बहाना इंटरनेशनल स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक का
था।
मगर दूसरी तरफ प्रदेश के खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल देहरादून में ही नगर निगम की बैठक में व्यस्त है। जिन्हें असल में बैठक के लिए दिल्ली जाना चाहिए था।
हाईकमान की नाराजगी
इन दिनों चर्चाएं हैं कि प्रदेश में सीएम बदलने की कवायद चल रही है। हाईकमान की नाराजगी को इसके पीछे वजह बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ये नाराजगी प्रदेश में आई आपदा राहत कार्यों को लेकर भी है।
शायद यही वजह भी रही कि बीते दिनों मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा विधानसभा सत्र के बीच में ही अचानक दिल्ली रवाना हो गए। बताया गया कि दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दैवी आपदा और राहत कार्यों की रिपोर्ट दी।
स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक
संशय इस बात को लेकर भी है कि जब ये रिपोर्ट दो दिन बाद भी दी जा सकती थी, तो फिर अचानक ये कदम क्यों उठाया गया।
चर्चाओं को तब फिर हवा मिली जब एक पखवाड़े के दौरान बीते शुक्रवार भी सीएम का दिल्ली जाने का अचानक कार्यक्रम बना। हालांकि, रविवार को वहां पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक की भी बात सामने आई।
हजम नहीं हुआ, आपदा संबंधी बैठक में न जाना
पिछले दिनों प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आपदा संबंधित बैठक में मुख्यमंत्री का न जाना भी किसी को हजम नहीं हुआ। दिल्ली से जुड़े सूत्रों की माने तो ऐन वक्त पर सीएम को दिल्ली आने से मना कर दिया गया।
समर्थक विधायकों ने भी लगाई थी दिल्ली दौड़
कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री समर्थक आधा दर्जन विधायकों का दिल्ली में सरकार की पैरवी के लिए तीन दिन तक डेरा डाले रहना भी चर्चाओं में रहा। हद तो तब हुई जब इन्हें किसी बड़े नेता ने मिलने का समय तक नहीं दिया। वहीं, पिछले दिनों विधानसभा सत्र समाप्त होते ही केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और हरिद्वार सांसद हरीश रावत के समर्थक विधायक भी दिल्ली कूच कर गए थे।
...करना पड़ा सीएम के पक्ष में खड़े होने का ऐलान
सरकार को समर्थन दे रहे पीडीएफ (प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट) के विधायकों की बैठकों ने भी इस सियासी तूफान को हवा दी। इन विधायकों के बहुगुणा के पक्ष में खड़े होने के ऐलान ने तो साफ कर दिया कि कहीं कुछ ना कुछ बात तो है।
मगर दूसरी तरफ प्रदेश के खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल देहरादून में ही नगर निगम की बैठक में व्यस्त है। जिन्हें असल में बैठक के लिए दिल्ली जाना चाहिए था।
हाईकमान की नाराजगी
इन दिनों चर्चाएं हैं कि प्रदेश में सीएम बदलने की कवायद चल रही है। हाईकमान की नाराजगी को इसके पीछे वजह बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ये नाराजगी प्रदेश में आई आपदा राहत कार्यों को लेकर भी है।
शायद यही वजह भी रही कि बीते दिनों मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा विधानसभा सत्र के बीच में ही अचानक दिल्ली रवाना हो गए। बताया गया कि दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दैवी आपदा और राहत कार्यों की रिपोर्ट दी।
स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक
संशय इस बात को लेकर भी है कि जब ये रिपोर्ट दो दिन बाद भी दी जा सकती थी, तो फिर अचानक ये कदम क्यों उठाया गया।
चर्चाओं को तब फिर हवा मिली जब एक पखवाड़े के दौरान बीते शुक्रवार भी सीएम का दिल्ली जाने का अचानक कार्यक्रम बना। हालांकि, रविवार को वहां पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्टेडियम की गवर्निंग बाडी की बैठक की भी बात सामने आई।
हजम नहीं हुआ, आपदा संबंधी बैठक में न जाना
पिछले दिनों प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आपदा संबंधित बैठक में मुख्यमंत्री का न जाना भी किसी को हजम नहीं हुआ। दिल्ली से जुड़े सूत्रों की माने तो ऐन वक्त पर सीएम को दिल्ली आने से मना कर दिया गया।
समर्थक विधायकों ने भी लगाई थी दिल्ली दौड़
कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री समर्थक आधा दर्जन विधायकों का दिल्ली में सरकार की पैरवी के लिए तीन दिन तक डेरा डाले रहना भी चर्चाओं में रहा। हद तो तब हुई जब इन्हें किसी बड़े नेता ने मिलने का समय तक नहीं दिया। वहीं, पिछले दिनों विधानसभा सत्र समाप्त होते ही केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और हरिद्वार सांसद हरीश रावत के समर्थक विधायक भी दिल्ली कूच कर गए थे।
...करना पड़ा सीएम के पक्ष में खड़े होने का ऐलान
सरकार को समर्थन दे रहे पीडीएफ (प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट) के विधायकों की बैठकों ने भी इस सियासी तूफान को हवा दी। इन विधायकों के बहुगुणा के पक्ष में खड़े होने के ऐलान ने तो साफ कर दिया कि कहीं कुछ ना कुछ बात तो है।
देहरादून।
उत्तराखण्ड सरकार ने भले ही खनन कार्याें के लिए राज्य कैबिनेट के पांच
सदस्यों की एक उप समिति बनाई हो, लेकिन खनन के खेल में सरकार भी अपने हाथ
धोना चाहती है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार गढ़वाल
मण्डल विकास निगम, कुमाउं मण्डल विकास निगम, वन विकास निगम के अलावा निजी
क्षेत्र को भी खनन कार्य देने पर विचार कर रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि
निजी खनन माफियाओं के मैदान में आने से जहां प्रदेश सरकार के निगमों के
सामने प्रतिस्पर्धा का माहौल होगा, वहीं इसका विपरीत असर राज्य की कानून
व्यवस्था पर भी पड़ेगा। उत्तर प्रदेश के कालान्तर में राज्यवासी निजी हाथों
में माफियाओं के आपसी वर्चस्व के लड़ाई का कोपभाजन बन चुके हैं और माफियाओं
की आपसी गुटबंदी से कई लोगों को जान से भी हाथ धोना पड़ा है। राज्य बनने के
बाद प्रदेश सरकार ने खनन को निजी हाथों में देने के बजाय प्रदेश के निगमों
को सौंप दिया था, जिसके बाद से प्रदेश में अपराधों पर अंकुश भी लगा था।
सूत्रों का यह भी दावा है कि यदि खनन निजी हाथों में दिया गया तो, उससे
अनियोजित तरीके से जहां खनन होगा, वहीं पर्यावरण को तो नुकसान होगा ही साथ
ही वन्य प्राणियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा, लिहाजा प्रदेश के
पर्यावरणविद् सरकार के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका
दायर करने जा रहे हैं। जिससे सरकार के मंसूबों पर पानी फिर सकता है। पुख्ता
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में खनन कार्यों को निजी हाथों
में देने की पैरवी मुख्यमंत्री का मुंह लगा एक प्रमुख सचिव कर रहा है।
विवदास्पद रहे इस प्रमुख सचिव के खनन माफिया पोंटी चढ्ढा से भी तत्कालीन
समय में नजदीकी संबंध रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार
अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नामधारी और पोंटी चढ्ढा के बीच दिल्ली के
एक फार्म हुए गोलाबारी के दौरान उक्त प्रमुख सचिव भी वहां मौजूद था, लेकिन
प्रशासनिक पकड़ होने के चलते वह पुलिस की गिरफ्त से दूर हो गया। सूत्रों ने
यहां यह भी बताया है कि पोंटी चढ्ढा के परिजन दिल्ली पुलिस द्वारा की जा
रही जांच से खुश नहीं है और वह इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच चाहते
हैं। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार बीते 13 वर्षों से शांत प्रिय उत्तराखण्ड में
खनन कार्य सरकार के निगमों के साथ निजी हाथों में देकर प्रदेश की फिजा को
बिगाड़ना चाहती है। सूत्रों ने तो यहां तक बताया है कि वर्तमान में सरकार
हरियाणा और दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश के खनन माफियाओं को उत्तराखण्ड में
प्रवेश देने जा रही है।
राजेन्द्र जोशी


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यौन
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