गुरुवार, 29 अगस्त 2013

आपदा प्रभावित गांवों की तरह खिसक रही है कांग्रेस की भी जमीन

आपदा प्रभावित गांवों की तरह खिसक रही है कांग्रेस की भी जमीन
राजेन्द्र जोशी
देहरादून : उत्तराखण्ड में आए जलप्रलय ने कांग्रेस को भी शिकार बना दिया है। 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी आलाकमान आपदा राहत और आपदा का विषय भुलाकर कुछ और नया नारा देकर जनता के बीच जाने को आतुर है, लेकिन जनता आपदा के दिए जख्मों से कराह रही है और सरकार के पास उन जख्मों पर लगाने को मरहम नहीं है, क्योंकि इन दो महीनों में प्रदेश सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लोग अपने जख्मों को भुलाकर सरकार के नए राग को सुनने को तैयार हों। वहीं समूचे देश के उन लोगों के जख्म भी अभी हरें हैं, जिन्होंने इस महाप्रलय में अपनों को खो दिया है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव को सामने देख कांग्रेस आलाकमान को उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि समूचे देश में अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, क्योंकि उत्तराखण्ड के पावन धामों में समूचे के देश के लोग किसी न किसी पीड़ा से प्रभावित हुए हैं। बदले परिदृश्य में प्रदेश सरकार पर भरोसा न कर अब सोनिया ने प्रदेश पर अपनी नजर लगा दी है। इसी कड़ी में प्रदेश की नब्ज टटोलने केंद्र के नेता सोनिया के इशारे पर प्रदेश की ओर लगातार रूख किए हुए हैं और प्रदेश की राजनैतिक और सामाजिक गतिविधियों की पल-पल की खबर वे दस जनपथ को दे रहे हैं।
हालांकि प्रदेश सरकार ने केंद्रीय नेताओं और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपनी उपलब्धियों की जमकर तारीफें की है, लेकिन सोनिया गांधी को प्रदेश सरकार के दावों पर कोई भी विश्वास नहीं है। हालांकि आपदा के बाद प्रदेश में जो विकास कार्य होने चाहिए थे वह नहीं हो पाए हैं, लेकिन आपदा प्रभावित लोगों को भी सरकार राहत नहीं दे पाई। ऐसे में प्रदेश के लोग काफी नाराज हैं और इसका असर आने वाले लोकसभा चुनाव में पड़ने वाला है। वर्तमान में कांग्रेस के उत्तराखण्ड से चार सांसद हैं, एक सीट मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के टिहरी लोकसभा सीट से इस्तीफे के बाद खाली हुई थी इस सीट पर उपचुनाव में भाजपा ने बाजी मार ली थी। कांग्रेस सरकार ने अपने डेढ़ साल में कोई भी नई योजना नहीं शुरू की है और विकास कार्य भी धरातल पर नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में जहां पहले लोग महंगाई से त्रस्त थे अब आपदा ने लोगों को खून के आंसू रूला दिया है। प्रदेश सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित होती नजर आ रही है। कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौति अपनी राजनैतिक जमीन को बचाने के साथ ही राज्य की पांचों लोकसभा सीटों पर जीतने की है, उधर मुख्यमंत्री अब आपदा और उससे जुड़े मामलों को जल्द निपटाना चाहते हैं, ताकि प्रदेश में होने वाले लोकसभा चुनाव में संगठन के साथ ही सरकार एक साथ मिलकर काम करें। चुनाव नजदीक आते देख सरकार ने आपदा में मारे गए लोागें की सूची अन्य प्रदेशों से मंगवाई है ताकि मृतक आश्रितों को मुआवजा देकर इस विषय को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके। इसकों लेकर उनकी दिल्ली में कई केंद्रीय नेताओं के साथ बातचीत हो रही है। मुख्यमंत्री आपदा प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि देकर और केदारनाथ धाम में 11 सितंबर से पूजा पुनः कराने के बाद इस विषय को भुलाना चाहते हैं। वैसे भी प्रदेश सरकार आपदा विषय को जल्द ही बंद करना चाहती है। इसको लेकर मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्रियों समेट पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी चर्चाए कर चुके हैं, यही कारण है कि सरकार केदारनाथ में पूजा करने के बाद आपदा शब्द पर नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव की तैयारियांे में काम करना चाहती है। अभी तक प्रदेश सरकार के खाते में कोई भी उपलब्धियां नहीं है, ऐसे में पार्टी और सरकार की चिंताए भी बढ़ती जा रही है।
प्रदेश में आई आपदा के बाद सरकार की गाड़ी भी पटरी से उतर गई, दो माह पहले आई आपदा में हजारों लोग मारे गए, आपदा आने के दो माह बाद भी सरकार ने मलबे में फंसे शवों को निकालने का काम पूरा तक नहीं किया है। सरकार आपदा में मारे गए लोगों की संख्या तक बताने से परहेज कर रही है। आपदा में मारे गए लोगों की संख्या यदि बता दी जाएगी तो सरकार की पूरे देश में किरकिरी होगी और आश्रितों को मुआवजा भी देना पड़ेगा, मरने वाले लोगों के परिजनों को भले ही अपनों की तलाश में रात को नींद न आए लेकिन सरकार को इससे क्या लेना-देना है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे मुआवजे की धनराशि बढ़ाने की मांग भी है, राजस्थान सरकार ने उत्तराखण्ड में आई आपदा में मारे गए राजस्थान के लोगों के आश्रितों को मुआजवा राशि पांच लाख दिए जाने के बाद भाजपा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का कहना है कि जब दूसरे राज्य मृतकों के आश्रितों को पांच लाख रूपये मुआजवा दे रहे हैं तो उत्तराखण्ड सरकार को भी यह धनराशि बढ़ानी चाहिए। उनका कहना है कि आपदा में मारे गए लोगों को अनय पद्रेश की सरकारें पांच लाख रूपये मुआवजा दे रही है और प्रदेश सरकार उससे आधा मुआवजा दे रही है। जिससे मृतक आश्रितों को कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से धनराशि को बढ़ाने की मांग की। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूडी भी पहले ही कह चुके हैं कि आपदा के दो माह बाद भी प्रदेश में कहीं भी राहत का काम नजर नहीं आ रहा है और लोग भूखे मरने को मजबूर हैं।